रूस पर प्रतिबंधों से छूट देने के फैसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति का स्पष्टीकरण
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए कानून के तहत रूस को व्यापक प्रतिबंधों से राहत देने के अपने निर्णय की हो रही तीखी आलोचनाओं का कड़ा जवाब दिया है। ट्रंप ने इस कदम को एक बेहद 'अच्छा फैसला' करार दिया और कहा कि आम लोगों तथा आलोचकों को अभी यह समझ में नहीं आ रहा है कि इस निर्णय का वास्तव में क्या अर्थ है। मियामी स्थित अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में शनिवार की शाम संवाददाताओं से बातचीत करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने रुख का बचाव किया।
संवाददाताओं को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि आपमें से कई लोगों को अभी यह पूरी तरह से समझ में नहीं आया है कि मेरा यह निर्णय क्या है, लेकिन समय के साथ आप इसे जरूर समझ जाएंगे। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि यह एक बहुत ही शानदार फैसला है जो हमारे देश के लिए बेहद अच्छा साबित होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम केवल अमेरिका के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए भी काफी अच्छा रहने वाला है।
भारत और चीन समेत 5 देशों पर 100 प्रतिशत शुल्क के प्रावधान से राहत
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस शासकीय आदेश के माध्यम से रूस को नए प्रतिबंध कानून, जिसे 'ग्राहम अधिनियम' कहा जाता है, से विशेष छूट प्रदान की गई है। इस कड़े कानून को अमेरिकी संसद ने पिछले महीने ही भारी समर्थन से मंजूरी दी थी।
इस शासकीय आदेश के लागू होने से प्रमुख आर्थिक प्रावधानों में ढील मिली है:
- रूस से तेल और गैस की खरीदारी करने वाले प्रमुख देशों को इस आदेश से सीधी राहत प्रदान की गई है।
- चीन और भारत समेत दुनिया के 5 सबसे बड़े देशों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने के जो कड़े प्रावधान तय किए गए थे, उनसे भी फिलहाल छूट दे दी गई है।
- यह छूट तब तक लागू रहेगी, जब तक अमेरिकी राष्ट्रपति या विदेश मंत्री, आवश्यकता अनुसार वित्त मंत्री और व्यापार प्रतिनिधि से परामर्श करने के बाद यह तय नहीं कर लेते कि आगे कोई नई कार्रवाई करना उचित है।
अमेरिकी राजनीति में मचा घमासान, दोनों दलों के सांसदों ने की आलोचना
रूस को प्रतिबंधों से राहत देने के ट्रंप के इस कदम से अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों ही प्रमुख दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति के इस निर्णय की जमकर आलोचना की है। उल्लेखनीय है कि दोनों दलों के सांसदों ने मिलकर पिछले महीने 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' को भारी बहुमत से पारित किया था।
दक्षिण कैरोलाइना से रिपब्लिकन पार्टी की सांसद डार्लिन ग्राहम ने रूस को इस कानून से छूट देने के फैसले पर गहरा ऐतराज जताया है। यह कानून उनके भाई लिंडसे ग्राहम की पहल पर आगे बढ़ाया गया था और उन्हीं के नाम पर इसका नामकरण किया गया था। लिंडसे ग्राहम का निधन हो चुका है। डार्लिन ग्राहम ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर, मैं युद्ध समाप्त कराने और गैस की कीमतें कम करने के लिए रूस पर दबाव बनाने का विकल्प चुनती, क्योंकि मुझे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और रूस पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है।
रूसी तानाशाह के सामने झुकने का आरोप, थॉम टिलिस ने बताया गैर-जिम्मेदाराना
उत्तरी कैरोलाइना के रिपब्लिकन सांसद थॉम टिलिस ने सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति के इस फैसले पर तंज कसते हुए इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना बताया। टिलिस ने सवाल उठाया कि सीनेट में 86 के मुकाबले 11 मतों से पारित किए गए कानून को लागू करने की आवश्यकता राष्ट्रपति और उनके सलाहकारों की समझ में क्यों नहीं आ रही है?
सांसद टिलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह अक्षम्य है कि यह प्रशासन उस रूसी तानाशाह के सामने झुक रहा है जिसने यूक्रेन पर अवैध रूप से हमला किया है।
ईरान के साथ तनाव और तेल कीमतों पर नेताओं के कड़े बयान
सांसद टिलिस ने आगे कहा कि यदि राष्ट्रपति ट्रंप वास्तव में ऊर्जा और ईंधन की कीमतें कम करना चाहते हैं, तो उन्हें ईरान के साथ युद्ध समाप्त करना चाहिए, जिसे ईंधन दरों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ट्रंप को इसके बजाय व्लादिमीर पुतिन पर कोई एहसान नहीं करना चाहिए।
इसी मुद्दे पर टेक्सास के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। कॉर्निन ने कहा कि लिंडसे इस फैसले से बेहद नाराज होते। उन्होंने दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम का स्मरण करते हुए यह बात कही, जिन्होंने इस गर्मी में अपने निधन से पहले तक इस कानून को संसद में आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए थे।
https://www.indiatv.in/world/us/people-dont-know-what-my-decision-means-find-out-why-donald-trump-said-this-2026-10-18-1249567