मेजर गरिमा यादव: ग्लैमर से राजभवन तक का सफर
दृढ़ संकल्प और देश सेवा की प्रबल इच्छाशक्ति हो, तो किसी भी मुकाम को हासिल करना संभव है। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण मेजर गरिमा यादव हैं, जिन्होंने हाल ही में उत्तर प्रदेश के राजभवन में इतिहास रच दिया है। भारतीय सेना की आर्मी सर्विस कॉर्प्स यानी एएससी (ASC) की अधिकारी मेजर गरिमा यादव को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की पहली महिला एडीसी (Aide-de-Camp) के रूप में तैनात किया गया है। राज्य के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी महिला सैन्य अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जीवन यात्रा मॉडलिंग, प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी और अंत में सेना की वर्दी तक बेहद रोमांचक रही है।
एडीसी की भूमिका और जिम्मेदारियां
एडीसी यानी 'एड-डी-कैंप' का पद अत्यधिक सम्मान और बड़ी जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है। संवैधानिक प्रमुख के रूप में राज्यपाल या राष्ट्रपति के साथ एक विशेष सैन्य अधिकारी की नियुक्ति एडीसी के तौर पर की जाती है। मेजर गरिमा यादव की मुख्य जिम्मेदारियों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- प्रोटोकॉल और सुरक्षा: मेजर गरिमा यादव राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के सभी आधिकारिक दौरों, सैन्य समारोहों और राजभवन के प्रमुख प्रोटोकॉल का प्रबंधन करती हैं।
- प्रशासनिक समन्वय: वह राज्यपाल के दैनिक कार्यक्रमों में एडमिनिस्ट्रेटिव कोऑर्डिनेशन की महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- मैदानी स्तर पर सक्रियता: हाल ही में 21 जुलाई 2026 को जब राज्यपाल ने मेरठ स्थित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का निरीक्षण किया, तब मेजर गरिमा यादव वहां सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संभालते हुए हर कदम पर मौजूद थीं।
शिक्षा और आईएएस बनने का सपना
मेजर गरिमा यादव की शुरुआती शिक्षा आर्मी पब्लिक स्कूल (दागशाई) से संपन्न हुई। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कॉलेज का रुख किया, जहां से उन्होंने इकोनॉमिक्स में ऑनर्स की डिग्री हासिल की। करियर की शुरुआत में उनका सपना प्रशासनिक सेवाओं में जाकर आईएएस अफसर बनने का था। उन्होंने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में हिस्सा भी लिया, लेकिन दुर्भाग्य से वह मेन्स परीक्षा में सफल नहीं हो सकीं।
सीडीएस में सफलता का कीर्तिमान
असफलता से निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ा और कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज यानी सीडीएस (CDS) 2017 की परीक्षा में शामिल हुईं। अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल करके इतिहास रच दिया। साथ ही, उन्होंने एसएसबी इंटरव्यू भी पहली बार में ही पास कर लिया।
इटली का ऑफर और देश सेवा का जज्बा
मेजर गरिमा यादव की प्रतिभा केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं थी। नवंबर 2017 में उन्होंने इंडियाज मिस चार्मिंग फेस का खिताब अपने नाम किया था। उनकी इस सफलता के बाद उन्हें इटली में आयोजित होने वाले एक अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी पेजेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करने का शानदार अवसर मिला। लेकिन, जब बात देश सेवा और ग्लैमर की दुनिया के बीच चुनने की आई, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी पेजेंट के ऑफर को ठुकरा दिया।
देश के प्रति अपने समर्पण को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में कठिन सैन्य प्रशिक्षण लेने का निर्णय लिया। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और 9 मार्च 2019 को उन्हें भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन मिला।
आर्मी सर्विस कॉर्प्स और सैन्य अनुभव
भारतीय सेना में शामिल होने के बाद उन्हें आर्मी सर्विस कॉर्प्स (ASC) में नियुक्त किया गया। एएससी सेना का एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिकल अंग है, जो युद्ध हो या शांति काल, हर परिस्थिति में रसद, ईंधन, परिवहन और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था सुचारू रूप से बनाए रखने का कार्य करता है। पिछले कई वर्षों में मेजर गरिमा यादव ने विभिन्न सैन्य ऑपरेशंस और प्रशासनिक भूमिकाओं में अपनी कुशलता सिद्ध की है। उनकी इसी कार्यकुशलता और अनुभव के आधार पर 14 सितंबर 2025 को उन्हें राजभवन में उत्तर प्रदेश की पहली महिला आर्मी एडीसी नियुक्त किया गया।
युवाओं के लिए प्रेरणा
मेजर गरिमा यादव अपनी इस असाधारण सफलता का श्रेय अपनी मां के निरंतर समर्थन और प्रोत्साहन को देती हैं। ब्यूटी क्वीन से लेकर राजभवन के इतिहास में नाम दर्ज कराने तक का उनका सफर उन लाखों युवतियों के लिए एक बड़ी सीख है जो असफलता के डर से घबरा जाती हैं। यदि आप भी मेजर गरिमा यादव की तरह भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सपना देखती हैं, तो स्नातक के बाद सीडीएस या एनसीसी स्पेशल एंट्री के माध्यम से आवेदन कर सकती हैं।
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