कारोबार की दुनिया में अक्सर देखा जाता है कि बड़े और रसूखदार परिवारों के बच्चों को बिना किसी मेहनत के बड़े पद आसानी से मिल जाते हैं। लेकिन इस चलन से अलग हटकर एस्कॉर्ट्स कुबोटा (Escorts Kubota) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर निखिल नंदा ने एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि उनकी कंपनी में किसी को सिर्फ इसलिए कोई पद नहीं मिलेगा क्योंकि उसके नाम के साथ 'नंदा' सरनेम जुड़ा है—फिर चाहे वह उनकी अपनी बेटी नव्या नवेली नंदा ही क्यों न हों।
स्टार परिवार की बेटी, फिर भी कोई VIP एंट्री नहीं
निखिल नंदा 31,000 करोड़ रुपये की मार्केट कैप वाली कंपनी के मालिक हैं और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के दामाद भी हैं। उनका कहना है कि उनकी 31,000 करोड़ रुपये की कंपनी में पारिवारिक विरासत के आधार पर किसी को कुर्सी नहीं सौंपी जाएगी, बल्कि असली कसौटी काबिलियत और मेरिट ही होगी।
पढ़ाई और अनुभव के बावजूद एंट्री पक्की नहीं
नव्या नवेली नंदा अमिताभ बच्चन की नातिन हैं और उन्होंने IIM अहमदाबाद से पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्हें मेटा (Meta) जैसी बड़ी कंपनी में काम करने का अनुभव भी है। इतनी मजबूत शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि के बावजूद उनके पिता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी में उनकी जगह तय नहीं मानी जा सकती।
सरनेम नहीं, काबिलियत होगी पैमाना
निखिल नंदा का यह बयान इन दिनों खासी चर्चा बटोर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी बेटी को कंपनी में स्थान सरनेम के बल पर नहीं, बल्कि अपनी योग्यता साबित करने पर ही मिलेगा। उनका यह रुख कारोबारी घरानों में चलने वाली विरासत आधारित परंपरा से एकदम अलग नजरिया पेश करता है।
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