सूरत में सेहत से खिलवाड़ का बड़ा मामला
गुजरात के सूरत शहर में मासूम बच्चों और नागरिकों की जान के साथ एक खतरनाक खेल का पर्दाफाश हुआ है। सूरत स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG ने खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर गोपीपुरा के मोमनावाद रोड पर स्थित शांतिनाथ मेडिकल स्टोर पर अचानक छापा मारा। इस छापेमारी के दौरान चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई, जहां मेडिकल स्टोर का संचालक मोहम्मद साजिद इब्राहिम मुल्ला बच्चों की सेहत के साथ गंभीर धोखाधड़ी कर रहा था। आरोपी पर आरोप है कि वह पशुओं के लिवर टॉनिक को छोटी बोतलों में डालकर, उन पर नामी कंपनी के नकली लेबल चस्पा कर रहा था और उन्हें बच्चों की दवा के रूप में बाजार में बेच रहा था। पुलिस ने इस मामले में कुल 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।
कैसे चलता था यह काला कारोबार
जांच में पता चला है कि आरोपी पशुओं के लिए बनने वाले ‘लिव.52 प्रोटेक लिक्विड एनिमल फीड सप्लीमेंट’ की बड़ी बोतलों को खरीदता था। इन बोतलों की पैकिंग 1 लीटर या 5 लीटर की होती है। आरोपी इन बड़े पैक से तरल पदार्थ निकालकर उसे 60 ML और 100 ML की छोटी बोतलों में भरता था। इसके बाद, वह उन बोतलों पर बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा के नकली स्टिकर लगा देता था। इस तरह पशुओं के लिए बना फीड सप्लीमेंट, मानव उपयोग की दवा के रूप में बाजार में उतारा जा रहा था। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की टीमें और खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारी विस्तृत जांच कर रहे हैं।
मुनाफे का गणित और अवैध कमाई
पुलिस की शुरुआती पड़ताल से पता चला है कि पशुओं के लिए उपयोग होने वाले 1 लीटर के पैक की बाजार कीमत करीब 330 रुपये है। वहीं, अगर हम मनुष्यों के लिए बेचे जाने वाले ‘लिव.52 ड्रॉप्स’ की बात करें, तो इसकी घोषित MRP 160 रुपये प्रति 60 ML बोतल है। आरोपी इसी अंतर का फायदा उठाता था। वह बड़े पैक से दवा निकालकर उसे छोटी बोतलों में भरता और नकली लेबल लगाकर अधिक दाम पर बेचता था। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया के जरिए आरोपी पिछले एक साल से अवैध रूप से मोटा मुनाफा कमा रहा था।
साल भर में खपाईं 1,000 बोतलें
पुलिस के अनुसार, यह रैकेट पिछले करीब एक साल से सक्रिय था। पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि आरोपी अब तक लगभग 1,000 बोतलें बाजार में बेच चुका है। अब पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इन बोतलों की सप्लाई किन-किन इलाकों में की गई है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या ये नकली दवाएं अन्य मेडिकल स्टोर, क्लीनिकों या फिर अस्पतालों तक भी पहुंचाई गई थीं, जिससे और भी ज्यादा खतरा पैदा हो सकता था।
मेडिकल स्टोर की संदिग्ध भूमिका
शांतिनाथ मेडिकल स्टोर लगभग 20 साल पुराना बताया जा रहा है, लेकिन इसके संचालन से जुड़े लाइसेंस हाल ही में जारी किए गए थे। आरोपी की बेटी ने बी.फार्म की पढ़ाई पूरी की है और उसी के नाम पर जारी फार्मासिस्ट लाइसेंस का उपयोग करके दुकान को चलाया जा रहा था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या दुकान की आड़ में किए जा रहे इस फर्जीवाड़े में परिवार के अन्य सदस्य या कोई और बाहरी व्यक्ति भी शामिल है।
स्वास्थ्य के लिए बेहद जोखिम भरा
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भले ही ये उत्पाद आयुर्वेदिक बताए जाते हों, लेकिन पशुओं के लिए बने सप्लीमेंट को बिना किसी जांच और अनुमति के बच्चों को देना जानलेवा साबित हो सकता है। किसी भी दवा के मानव उपभोग के लिए सुरक्षित होने की पुष्टि करना अनिवार्य होता है, जिसे यहां पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। यह पूरी तरह से स्वास्थ्य के नियमों का उल्लंघन और मासूमों के साथ किया गया एक खतरनाक अपराध है।
दर्ज हुआ गंभीर धाराओं में मुकदमा
इस पूरे मामले में आरोपी मोहम्मद साजिद मुल्ला और अन्य सहयोगियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें धारा 123, 125, 336(2), 336(3), 336(4) और 278 प्रमुख हैं। इसके साथ ही औषधि और सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। SOG अब यह पता लगा रही है कि नकली स्टिकर छपवाने के लिए प्रिंटिंग प्रेस का इस्तेमाल कहां किया गया था और इस अपराध के तार और किन लोगों से जुड़े हुए हैं।
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