अनजान नंबर को नजरअंदाज करना पड़ा भारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओडिशा के नवनियुक्त राज्यपाल ब्रजमोहन राम से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प वाकया चर्चा का विषय बना हुआ है। अक्सर लोग किसी अनजान नंबर से आने वाली कॉल को नहीं उठाते हैं, लेकिन कभी-कभी यह गलती भारी पड़ सकती है। कुछ ऐसा ही अनुभव झारखंड बीजेपी के कद्दावर नेता ब्रजमोहन राम के साथ भी हुआ। जब उन्हें राज्यपाल पद की जिम्मेदारी देने के लिए खुद प्रधानमंत्री मोदी संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे, तब ब्रजमोहन राम ने उन कॉल्स को यह सोचकर अनसुना कर दिया कि यह कोई सामान्य या अनजान व्यक्ति का फोन है।
दस बार आई कॉल, लेकिन नहीं हो पाई बात
ब्रजमोहन राम के अनुसार, उन्हें लगातार एक प्राइवेट नंबर से कॉल आ रही थी। उन्होंने उस कॉल को बार-बार काटा और नहीं उठाया। उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि दूसरी तरफ देश के प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएमओ की ओर से उन्हें कुल 10 बार कॉल की गई, लेकिन किसी न किसी कारण से प्रधानमंत्री से उनकी सीधी बात नहीं हो सकी।
दूसरे नंबर से हुई पुष्टि
जब बार-बार प्रयास के बाद भी संपर्क नहीं हुआ, तब किसी दूसरे नंबर से उनके पास कॉल आया और उन्हें सूचित किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे बात करना चाहते हैं। इस सूचना के बाद, जब फिर से उसी प्राइवेट नंबर से कॉल आया, तब ब्रजमोहन राम ने उसे उठाया। फोन पर खुद प्रधानमंत्री मोदी थे। उन्होंने बेहद आत्मीयता से बातचीत की शुरुआत की और सबसे पहले उन्हें जोहार कहकर अभिवादन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने उनका हालचाल जाना और संगठन से जुड़े विभिन्न कार्यों पर भी चर्चा की। यह घटना दिखाती है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली कितनी सीधे संवाद पर आधारित है।
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