झारखंड का 'मिनी कश्मीर' है ढाईकुशुम गांव, जमशेदपुर से 70 किलोमीटर दूर झरनों और कॉटेज के बीच बसी सुकून भरी वादियां

जमशेदपुर से करीब 70 किलोमीटर दूर घाटशिला रोड पर बसा ढाईकुशुम गांव अपनी हरियाली, झरनों और लकड़ी से बने कॉटेज के कारण तेजी से लोकप्रिय पर्यटन स्थल बनता जा रहा है।

कुछ साल पहले सोशल मीडिया पर एक रील खूब वायरल हुई थी, जिसमें सवाल उठाया गया था कि झारखंड को आखिर कौन जानता है और यहां देखने लायक है ही क्या। लेकिन जिसने एक बार भी इस राज्य की प्राकृतिक सुंदरता को नजदीक से निहार लिया, उसके मन में शायद ऐसा सवाल दोबारा कभी नहीं उठेगा। घने जंगल, ऊंचे पर्वत, कलकल बहती नदियां, झरने और शांति से भरी वादियां—प्रकृति प्रेमियों के लिए झारखंड किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

जमशेदपुर से 70 किलोमीटर दूर बसा है यह नगीना

अगर आप जमशेदपुर से करीब 70 किलोमीटर का सफर तय करते हुए घाटशिला रोड की ओर बढ़ते हैं, तो रास्ते में एक बेहद मनमोहक स्थान आता है—ढाईकुशुम गांव। बीते दिनों यह गांव लोगों के बीच तेजी से पसंदीदा पर्यटन स्थल बनता जा रहा है। यहां कदम रखते ही ऐसा अहसास होता है मानो आप झारखंड में नहीं, बल्कि कश्मीर के सोनमर्ग या गुलमर्ग जैसे किसी खूबसूरत इलाके में आ पहुंचे हों।

ठंडी हवाएं और प्राकृतिक शांति है खास पहचान

ढाईकुशुम गांव की सबसे बड़ी विशेषता यहां की प्राकृतिक शांति और ठंडी हवाएं हैं। गर्मी के मौसम में भी यहां का वातावरण लोगों को राहत और सुकून देता है। दूर-दूर तक फैली हरी-भरी घास, पहाड़ों के बीच से बहती नदी, छोटे-छोटे झरने और चारों ओर बिखरी हरियाली इस जगह को बेहद अनोखा बना देती है। शहर की भागदौड़ और शोरगुल से दूर यह स्थान लोगों को प्रकृति के और करीब ले जाता है।

मानसिक सुकून की तलाश में पहुंचते हैं पर्यटक

यहां आने वाले सैलानी केवल घूमने नहीं, बल्कि खुद को मानसिक रूप से तरोताजा करने के मकसद से भी पहुंचते हैं। कई लोग अपने परिवार, मित्रों या जीवनसाथी के साथ यहां समय बिताना पसंद करते हैं। इस गांव की एक और खासियत यह है कि पर्यटकों के ठहरने के लिए यहां सुंदर कॉटेज तैयार किए गए हैं। लकड़ी और प्राकृतिक डिजाइन से बने ये कॉटेज आगंतुकों को बिल्कुल अलग तरह का अनुभव कराते हैं।

भीड़ से दूर शांति चाहने वालों के लिए परफेक्ट जगह

सुबह की ठंडी हवा, पक्षियों की चहचहाहट और पहाड़ों के बीच से उगता सूरज यहां के माहौल को और भी खूबसूरत बना देता है। ढाईकुशुम गांव उन लोगों के लिए आदर्श स्थल बन चुका है, जो भीड़भाड़ से दूर कुछ पल सुकून के साथ बिताना चाहते हैं। यहां का शांत वातावरण लोगों को मानसिक शांति देने के साथ-साथ प्रकृति से जुड़ने का अहसास भी कराता है।

खदानों और उद्योगों से परे झारखंड की पहचान

गौरतलब है कि झारखंड केवल खदानों और उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और अनदेखी वादियों के लिए भी प्रसिद्ध है। ढाईकुशुम गांव इसी का एक सुंदर उदाहरण है, जो हर आने वाले को अपनी मनोहारी छटा से मंत्रमुग्ध कर देता है।

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