शारदीय नवरात्रि 2026: तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा का विधान और शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। आइए जानते हैं कि इस दिन पूजा का सही समय क्या है और किन नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

शारदीय नवरात्रि 2026: मां चंद्रघंटा की महिमा

नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। इन नौ दिनों में तीसरा दिन माता चंद्रघंटा को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ देवी चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा करते हैं, उनके जीवन की समस्त परेशानियां और बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। माता का यह स्वरूप अत्यंत कल्याणकारी और भक्तों की रक्षा करने वाला माना गया है। शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन 13 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस विशेष अवसर पर पूजा से जुड़े नियमों और शुभ समय के बारे में जानना अत्यंत आवश्यक है।

सुबह की पूजा के लिए शुभ समय

तीसरे दिन की पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर होगी और यह सुबह 5 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा, प्रातः संध्या मुहूर्त का समय सुबह 5 बजकर 19 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। यदि आप दोपहर के समय पूजा करना चाहते हैं, तो अभिजीत मुहूर्त का चयन कर सकते हैं। यह मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 1 मिनट पर शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 48 मिनट पर संपन्न होगा।

शाम की पूजा का शुभ समय

सांध्यकालीन पूजा के लिए भी विशेष समय की जानकारी दी गई है। गोधूलि मुहूर्त का समय शाम 6 बजकर 17 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 31 मिनट तक है। साथ ही, सायाह्न संध्या का आयोजन भी इसी अवधि में, यानी शाम 6 बजकर 17 मिनट से शाम 7 बजकर 31 मिनट तक किया जा सकता है।

पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य नियम

  • माता रानी की आराधना करते समय नीले या काले रंग के वस्त्र धारण करने से बचना चाहिए।
  • देवी की प्रतिमा या तस्वीर और कलश की स्थापना हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में ही करें।
  • पूजा करते समय मन में किसी के प्रति भी दुर्भावना नहीं रखनी चाहिए।
  • माता के लिए भोग तैयार करते समय पूर्ण स्वच्छता और सात्विकता का पालन अनिवार्य है।
  • तीसरे दिन की पूजा में सफेद, सुनहरे, पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है। मां चंद्रघंटा को ये रंग विशेष प्रिय हैं।
  • देवी को भोग के रूप में दूध, खीर या दूध से बनी मिठाइयां अर्पित करें। साथ ही उन्हें शुद्ध शहद का भोग लगाना भी शुभ फलदायी माना गया है।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप और शस्त्र

देवी चंद्रघंटा का वाहन सिंह है। उनके स्वरूप की बात करें तो मां के दस हाथ हैं। दाहिनी ओर के चार हाथों में कमल, धनुष, जप माला और तीर सुशोभित हैं, जबकि पांचवां हाथ अभय मुद्रा में रहता है। बाईं ओर के चार हाथों में त्रिशूल, गदा, कमंडल और तलवार हैं, वहीं उनका पांचवां हाथ वरद मुद्रा का प्रतीक है।

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