आज के दौर में ज्यादातर युवा अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नौकरी को ही सफलता की सबसे मजबूत बुनियाद मानते हैं। लेकिन जयपुर जिले के गोकुलपुरा गांव की कल्पना कुमावत ने इससे हटकर एक अलग राह चुनी। जुनून और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने स्वरोजगार के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की है, और आज उनकी कहानी कई युवाओं तथा महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
नौकरी की राह से एक नए विचार की ओर
कल्पना कुमावत ने मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशन (एमसीए) की पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब चार वर्षों तक असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम किया। उनके सामने एक सुरक्षित और स्थायी करियर मौजूद था, लेकिन जीवन के एक अनुभव ने उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया।
उनकी मां कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। इसी दौरान उन्होंने देसी गाय के दूध और उससे जुड़े स्वास्थ्य लाभों को नजदीक से समझा। इसी अनुभव ने उनके मन में शुद्ध और प्राकृतिक दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में काम करने का विचार जगाया।
पांच गिर गायों से हुई शुरुआत
साल 2011 में उन्होंने एक बड़ा और साहसिक कदम उठाते हुए अपनी स्थायी नौकरी छोड़ दी। उस समय न तो उनके पास बड़ा निवेश था और न ही कोई बड़ी टीम। उन्होंने केवल पांच गिर गायों के साथ गोकुलपुरा में श्रीराम गीर गौ सेवा धाम की नींव रखी।
शुरुआती दिनों में कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय लगातार मेहनत और सीखने की प्रक्रिया को जारी रखा।
ऑर्गेनिक सोच बनी सबसे बड़ी पहचान
कल्पना ने शुरुआत से ही यह तय कर लिया था कि उनका मकसद केवल डेयरी का कारोबार करना नहीं, बल्कि लोगों तक शुद्ध और सेहतमंद दूध पहुंचाना है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने फार्म में पूरी तरह ऑर्गेनिक पद्धति अपनाई।
उनके फार्म में गायों को 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक हरा चारा और ड्राई फॉडर दिया जाता है। इसके साथ ही उनकी नियमित खुराक में अश्वगंधा और शतावरी जैसे आयुर्वेदिक तत्व भी शामिल किए जाते हैं, जिससे गायों की सेहत बेहतर बनी रहती है और दूध की गुणवत्ता भी उच्च स्तर की रहती है। यही ऑर्गेनिक नजरिया आज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन चुका है।
पांच से बढ़कर 60 से अधिक गायों तक का सफर
लगातार मेहनत और बेहतर उत्पाद के कारण लोगों का भरोसा बढ़ता गया। जो सफर पांच गायों से शुरू हुआ था, वह आज 60 से अधिक गिर गायों तक पहुंच चुका है। वर्तमान में उनका गौ सेवा धाम हर दिन 100 लीटर से अधिक शुद्ध दूध जयपुर के घरों तक पहुंचा रहा है।
कल्पना कुमावत का मानना है कि शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ लोगों तक पहुंचाना भी समाज सेवा का ही एक रूप है। उनकी कामयाबी इस बात को साबित करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो स्वरोजगार भी रोजगार का एक सशक्त माध्यम बन सकता है।
आज उनका गौ सेवा धाम महज एक डेयरी फार्म नहीं, बल्कि उन युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र है, जो जोखिम उठाकर कुछ नया करने का सपना देखते हैं।
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