किसानों के लिए नई मुश्किल! बिना एग्री स्टैक आईडी अटक सकती है पीएम किसान की किस्त, फौरन बनवाएं यह पहचान

धान सीजन की तैयारियों के बीच अंबाला के किसानों के लिए अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ लेने के लिए एग्री स्टैक आईडी जरूरी कर दी गई है। जिनकी आईडी नहीं बनी या भूमि रिकॉर्ड में गड़बड़ी है, उन्हें आगामी किस्तों से वंचित रहना पड़ सकता है।

धान सीजन की तैयारियों के बीच अंबाला जिले के किसानों के सामने एक नई प्रशासनिक अड़चन खड़ी हो गई है। अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए एग्री स्टैक आईडी (यूनिक फार्मर आईडी) अनिवार्य कर दी गई है। ऐसे में जिन किसानों ने यह पहचान नहीं बनवाई है या जिनके भूमि रिकॉर्ड में किसी तरह की त्रुटि है, उन्हें आने वाली किस्तों से हाथ धोना पड़ सकता है।

अब तक कितने किसानों की बनी आईडी

कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में अब तक 53,231 किसानों की एग्री स्टैक आईडी तैयार की जा चुकी है। इसके बावजूद हजारों किसान अब भी ऐसे हैं, जिनकी यह प्रक्रिया अलग-अलग कारणों से पूरी नहीं हो सकी है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन किसानों को आ रही है, जिनकी जमीन का रिकॉर्ड अब तक अपडेट नहीं हुआ है या जिनके नाम भूमि का इंतकाल लंबित पड़ा है।

भूमि रिकॉर्ड की पुरानी उलझनें बनीं रोड़ा

वर्षों से लटके भूमि रिकॉर्ड संबंधी मामलों का असर अब सीधे सरकारी योजनाओं पर दिखाई देने लगा है। कृषि विभाग के पास करीब 6 हजार से अधिक ऐसे मामले लंबित हैं, जिनमें तकनीकी खामियां, नाम को लेकर विवाद या जमीन के बंटवारे के बाद रिकॉर्ड अपडेट न होने जैसी परेशानियां सामने आई हैं। कई जगहों पर रिकॉर्ड में आज भी पुराने मालिकों के नाम दर्ज हैं, जिसके चलते किसानों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

हर नए वारिस को बनवानी होगी अलग आईडी

कृषि विभाग के डीडीए जसविंदर सिंह ने बताया कि यदि किसी परिवार में जमीन मालिक की मृत्यु हो जाती है और बाद में जमीन नए वारिसों के नाम दर्ज होती है, तो प्रत्येक नए भूमि मालिक को अलग-अलग एग्री स्टैक आईडी बनवानी होगी। इसके बाद ही वह प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिए पात्र माना जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके लिए भूमि रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन भी जरूरी होगा।

उनके अनुसार एग्री स्टैक के बिना अब नए मालिकों को किसान सम्मान निधि योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा और इसके लिए उन्हें अपनी अलग पहचान बनवानी ही होगी।

पारदर्शिता के लिए सख्त हुए नियम

केंद्र और राज्य सरकारें कृषि योजनाओं में पारदर्शिता लाने के मकसद से नियमों को लगातार सख्त कर रही हैं। पहले जहां ई-केवाईसी के आधार पर ही लाभ मिल जाता था, वहीं अब हर किसान के पास यूनिक फार्मर आईडी यानी एग्री स्टैक आईडी होना अनिवार्य कर दिया गया है। साल 2019 से लंबित कई मामलों का समाधान अब तक नहीं हो पाया है, जिसके कारण हजारों किसान प्रभावित हो रहे हैं।

धान सीजन से पहले फसल पंजीकरण पर जोर

खरीफ सीजन को देखते हुए कृषि विभाग ने ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है। किसानों से अपील की गई है कि वे समय रहते अपनी फसलों का पंजीकरण करा लें। विभाग ने साफ किया है कि पंजीकरण न कराने वाले किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत आ सकती है। इतना ही नहीं, यूरिया और डीएपी जैसी उर्वरकों की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि 15 जून के बाद जिले में धान की रोपाई शुरू होने की संभावना है।

लगातार बढ़ रहा धान का रकबा

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार साल 2016-17 में जिले में धान का रकबा 83 हजार हेक्टेयर था, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 1.06 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया। इससे साफ है कि जिले में धान की खेती का दायरा निरंतर बढ़ता जा रहा है।

कई योजनाओं का लाभ पंजीकरण से जुड़ा

कृषि विभाग के मुताबिक फसल पंजीकरण कराने वाले किसानों को धान की सीधी बिजाई, पराली प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, मेरा पानी मेरी विरासत योजना और कृषि यंत्रों पर मिलने वाले अनुदान सहित कई सरकारी योजनाओं का फायदा मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को खाद की उपलब्धता को लेकर भी किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि एग्री स्टैक आईडी और फसल पंजीकरण की यह व्यवस्था आगे चलकर कृषि योजनाओं को अधिक पारदर्शी और लक्षित बनाएगी, लेकिन इसके लिए जमीन रिकॉर्ड से जुड़ी लंबित समस्याओं का जल्द हल निकलना भी उतना ही जरूरी है, ताकि कोई भी पात्र किसान सरकारी लाभ से वंचित न रह जाए।

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