बिहार के गया जिले में झारखंड की सीमा से सटे गंगटी गांव के रहने वाले 11 वर्षीय मोहम्मद फरहान खान ने अपनी प्रतिभा से हर किसी को चकित कर दिया है। इतनी छोटी उम्र में फरहान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित दो वेबसाइट विकसित कर डाली हैं। इनमें एक का नाम 'सेहत साथी' और दूसरी का 'मम्मी का स्मार्ट किचन बॉट' है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही वेबसाइटों को ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जरूरतों को सामने रखकर बनाया गया है।
महज 11 साल की उम्र में फरहान कोडिंग और एआई तकनीक पर अच्छी पकड़ बना चुके हैं। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें बिहार एआई समिट 2026 में सम्मानित भी किया जा चुका है। फरहान का कहना है कि आने वाले दिनों में इन वेबसाइटों को मोबाइल ऐप के रूप में भी उतारा जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इनका फायदा उठा सकें।
तीन साल से एआई की पढ़ाई
फरहान पिछले तीन वर्षों से एआई की पढ़ाई कर रहे हैं। तकनीक की समझ विकसित करने के बाद उन्होंने करीब दो साल की मेहनत से इन दोनों वेबसाइटों को तैयार किया। उनका पहला प्लेटफॉर्म 'सेहत साथी' ग्रामीण इलाकों के लोगों तक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी और मार्गदर्शन पहुंचाने के मकसद से बनाया गया है।
'सेहत साथी' क्यों है खास
फरहान बताते हैं कि उनके गांव और आसपास के इलाकों में बेहतर चिकित्सा सुविधा तक पहुंच पाना आसान नहीं है। कई बार अच्छे डॉक्टर से इलाज कराने के लिए लोगों को 80 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि छोटी-मोटी बीमारियों के लिए भी 15 से 20 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। ऐसे हालात में 'सेहत साथी' लोगों को सेहत से जुड़ी सामान्य जानकारी, घरेलू उपायों और दवाओं से संबंधित बुनियादी जानकारी उपलब्ध कराने की कोशिश करेगी।
इस वेबसाइट की एक खासियत यह भी है कि इसे कई भाषाओं में तैयार किया गया है। जो लोग लिख नहीं सकते, वे अपनी परेशानी बोलकर भी जानकारी हासिल कर सकते हैं। एआई पर आधारित यह प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ता की दी गई जानकारी के आधार पर जवाब देने का प्रयास करता है।
रसोई के लिए स्मार्ट किचन बॉट
फरहान की दूसरी वेबसाइट 'मम्मी का स्मार्ट किचन बॉट' रसोई से जुड़ी दिक्कतों को आसान बनाने के लिए बनाई गई है। यह प्लेटफॉर्म सब्जियों की कीमत, उनके पोषण मूल्य और उनसे तैयार होने वाले व्यंजनों की जानकारी देता है। इसका मकसद लोगों, खासकर बच्चों को हरी सब्जियों के प्रति जागरूक करना है।
बचपन से ही पढ़ाई में तेज
फरहान के पिता मोहम्मद शमशेर खान बताते हैं कि उनका बेटा बचपन से ही पढ़ाई में तेज रहा है। वह पांच साल की उम्र से इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहा है और आठ साल की उम्र से एआई तकनीक सीख रहा है। फिलहाल फरहान ऑनलाइन एआई कोर्स कर रहे हैं और अब तक 40 से अधिक प्रमाणपत्र हासिल कर चुके हैं। वह इस समय कोठी बाजार स्थित एमएस मेमोरियल अकादमी में कक्षा छह के छात्र हैं। इतनी कम उम्र में उनकी यह कामयाबी न सिर्फ गया, बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व की बात मानी जा रही है।
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