टीएमसी भवन पर मालिकाना हक का दावा, असली मालिक बोले- खाली करो हमारा घर

कोलकाता के ईएम बाईपास स्थित जिस इमारत में तृणमूल कांग्रेस का दफ्तर चल रहा है, उसके असली मालिक मंटू साहा ने संपत्ति वापसी की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। रेंट एग्रीमेंट खत्म होने के बावजूद कब्जा न छूटने पर उन्होंने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ी एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। कोलकाता के ईएम बाईपास से सटे मेट्रोपोलिटन इलाके में स्थित एक बहुमंजिला इमारत को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इसी आलीशान बिल्डिंग में फिलहाल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का कामकाज चल रहा है, लेकिन अब इसके असली मालिक ने पार्टी के खिलाफ ही आवाज बुलंद कर दी है। इमारत के स्वामी और कोलकाता के जाने-माने डेकोरेटर्स व्यवसायी मंटू साहा अपनी संपत्ति वापस पाने के लिए अपने बेटे के साथ सीधे टीएमसी भवन जा पहुंचे, मगर वहां पार्टी का कोई नेता मौजूद नहीं मिला।

नेताओं ने फोन उठाना बंद किया

मंटू साहा अपने बेटे अमित साहा के साथ इमारत का मालिकाना हक वापस लेने के इरादे से मेट्रोपोलिटन स्थित टीएमसी भवन गए थे। उनका मकसद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से आमने-सामने बैठकर घर वापसी के मुद्दे पर बात करना था। लेकिन उस वक्त भवन में कोई भी बड़ा नेता या पदाधिकारी मौजूद नहीं था। नतीजतन पिता-पुत्र को भवन के गार्ड से ही बातचीत कर बैरंग लौटना पड़ा। साहा का आरोप है कि पार्टी नेता अब उनका फोन तक नहीं उठा रहे हैं।

पत्र भेजेंगे, जवाब नहीं मिला तो कानूनी कार्रवाई

टीएमसी की ओर से किसी सकारात्मक प्रतिक्रिया के अभाव में निराश मंटू साहा अब सख्त रुख अपनाने की तैयारी में हैं। उन्होंने तय किया है कि वे घर खाली करने की मांग करते हुए पार्टी नेतृत्व को एक आधिकारिक पत्र सौंपेंगे। पिता-पुत्र ने दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि इस पत्र का उचित उत्तर नहीं मिला और टीएमसी ने इमारत का कब्जा नहीं छोड़ा, तो वे पार्टी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे।

क्या है पूरा मामला और रेंट एग्रीमेंट

दरअसल साल 2022 में जब तपसिया स्थित पुराने टीएमसी भवन में मरम्मत का काम शुरू हुआ था, तब पार्टी ने ईएम बाईपास के मेट्रोपोलिटन इलाके की इस बहुमंजिला इमारत को किराए पर लिया था। मंटू साहा के मुताबिक शुरुआत में यह इमारत सिर्फ 2 साल के अनुबंध पर दी गई थी, जिसे बाद में 2 और वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया।

साहा का कहना है कि अब वे अपनी संपत्ति इसलिए वापस चाहते हैं क्योंकि टीएमसी के साथ उनके अनुबंध की अवधि पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक माहौल में अपनी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई है। हालांकि उन्होंने ईमानदारी से यह भी स्वीकार किया कि टीएमसी ने अब तक किराए का पूरा बकाया चुका दिया है और पैसों को लेकर कोई विवाद नहीं है।

हाथ जोड़कर कह रहा हूं, घर वापस कर दें

मंटू साहा ने पहले ही बताया था कि उन्होंने टीएमसी नेतृत्व को घर खाली करने के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय भी दिया था, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। पूरे विवाद पर उनके बेटे अमित साहा ने बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि किराए का समझौता खत्म हो चुका है, इसलिए अब वे अपना घर वापस मांग रहे हैं।

घर के किराए का समझौता खत्म हो चुका है, इसलिए अब हम अपना घर वापस मांग रहे हैं। लेकिन हम तृणमूल के किसी भी नेता से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए मैं हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं कि कृपया हमारा घर हमें वापस दे दीजिए।

एक नजर में पूरा विवाद

  • मालिक कौन: इमारत के असली मालिक मंटू साहा हैं, जो कोलकाता के मशहूर व्यवसायी हैं।
  • किराए पर कब और क्यों: साल 2022 में तपसिया स्थित पुराने टीएमसी भवन के रिनोवेशन के चलते पार्टी ने ईएम बाईपास की यह इमारत 2 साल के अनुबंध पर ली थी, जिसे बाद में 2 साल और बढ़ाया गया।
  • चेतावनी: मंटू साहा और उनके बेटे अमित साहा ने कहा है कि वे घर खाली करने के लिए पत्र भेजेंगे और कब्जा न छोड़े जाने पर पार्टी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।

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