मां-बाप अपनी पूरी जिंदगी बच्चों को पालने और बड़ा करने में खपा देते हैं। वे हर जरूरत का ध्यान रखते हैं और एक बेहतर भविष्य देने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। इन सबके बदले उन्हें बस इतना ही भरोसा होता है कि बुढ़ापे में उनके बच्चे उनका सहारा बनेंगे। लेकिन जब वही औलाद अपने मां-बाप को अकेला छोड़ देती है, तो यह सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनशीलता पर उठा सवाल बन जाता है। फरीदाबाद के ताऊ देवीलाल वृद्धाश्रम से जुड़ी ऐसी ही एक घटना हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रही है।
वृद्धाश्रम में मिले बुजुर्ग
जब लोकल टीम ताऊ देवीलाल वृद्धाश्रम पहुंची तो वहां एक बुजुर्ग मिले, जिनकी उम्र करीब 65 से 70 साल के बीच बताई जा रही है। उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वे ढंग से बातचीत भी नहीं कर पा रहे थे। उन्हें फरीदाबाद के बीके अस्पताल में अकेला छोड़ दिया गया था। इसकी सूचना मिलते ही वृद्धाश्रम के संचालक किशन लाल बजाज उन्हें वहां से अपने साथ आश्रम ले आए।
क्या कहते हैं बुजुर्ग
बातचीत में बुजुर्ग ने अपना नाम मोहम्मद अजगर बताया। उन्होंने कहा कि वे बिहार के आरा के रहने वाले हैं। उनके शब्दों में, "मुझे यह तक याद नहीं है कि फरीदाबाद मुझे कौन लेकर आया था। मुझे अस्पताल में छोड़ दिया गया और उसके बाद कोई वापस लौटकर नहीं आया। मेरे बच्चे भी हैं और परिवार भी, फिर भी इस वक्त मैं बिल्कुल अकेला हूं।"
बुजुर्ग बिहार के आरा के निवासी हैं और उन्हें फरीदाबाद के बीके अस्पताल में छोड़ा गया था। वृद्धाश्रम उन्हें करीब दो दिन पहले अपने साथ लेकर आया।
संचालक ने तुरंत संभाली जिम्मेदारी
वृद्धाश्रम के संचालक किशन लाल बजाज बताते हैं कि उनकी खुद की तबीयत भी ठीक नहीं थी, लेकिन सूचना मिलते ही वे फौरन बीके अस्पताल पहुंचे और बुजुर्ग को अपने साथ आश्रम ले आए। उन्होंने बताया कि आश्रम में किसी भी धर्म और जाति के जरूरतमंद बुजुर्गों को रखा जाता है। अगर किसी को स्वास्थ्य संबंधी कोई दिक्कत होती है तो उसका इलाज भी कराया जाता है। उनके मुताबिक, इस बुजुर्ग की देखभाल की जा रही है और आगे भी पूरी जिम्मेदारी के साथ उनका ख्याल रखा जाएगा।
जरूरत के वक्त ही छोड़ दिया
किशन लाल कहते हैं कि आज के दौर में ऐसे मामले बेहद दुखी करते हैं, जहां बुजुर्गों को सबसे ज्यादा सहारे की जरूरत होती है, लेकिन उसी समय उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है। फिलहाल मोहम्मद अजगर ताऊ देवीलाल वृद्धाश्रम में हैं, जहां उन्हें रहने, खाने और इलाज की पूरी सुविधा दी जा रही है। जब तक जरूरत होगी, उनकी पूरी देखभाल की जाएगी ताकि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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