सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का असर
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में सफाई कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार ने पूरे क्षेत्र की सफाई व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले तीन दिनों से जारी इस हड़ताल के कारण अब स्थिति विकराल होती जा रही है। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर रिहायशी इलाकों तक हर तरफ कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं। घरों और दुकानों से निकलने वाला कचरा उठ न पाने के कारण गंदगी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अकेले मंदसौर शहर में करीब 800 सफाई कर्मचारी अपने काम से दूर हैं। कचरा उठाने वाली गाड़ियां भी अधिकांश क्षेत्रों में नहीं पहुंच रही हैं, जिससे नागरिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
शहर और जिले में कचरे का बढ़ता संकट
सफाई व्यवस्था के ठप होने का गणित काफी चिंताजनक है। मंदसौर शहर में प्रतिदिन औसतन 60 टन कचरा निकलता है, इस लिहाज से बीते तीन दिनों में ही शहर में 180 टन कचरा जमा हो गया है। स्थिति केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले की बात करें तो यहाँ रोजाना 200 टन कचरा उत्पादित होता है। हड़ताल के कारण पिछले तीन दिनों में पूरे जिले में लगभग 600 टन कचरा सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर जमा हो चुका है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ गए हैं।
हड़ताल की मुख्य वजहें और मांगें
सफाई कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ लामबंद हैं। उनकी प्रमुख मांगों में वेतन का समय पर भुगतान, कर्मचारियों का नियमितीकरण, परिवार के सदस्यों के लिए अनुकंपा नियुक्ति और विवादास्पद आउटसोर्स व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी इन वाजिब मांगों को लेकर प्रशासन से गुहार लगा रहे थे, लेकिन समाधान न होने के कारण अंततः उन्हें काम बंद कर आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा। प्रशासन के अधिकारी और जनप्रतिनिधि लगातार कर्मचारियों के साथ बातचीत कर गतिरोध को समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल किसी समाधान पर सहमति नहीं बन पाई है।
सड़कों पर विरोध का प्रदर्शन
विरोध का एक उग्र रूप शामगढ़ में देखने को मिला, जहाँ कर्मचारियों ने नगर परिषद अध्यक्ष के प्रति अपना आक्रोश जताने के लिए सड़क पर ही कचरा डाल दिया। इस घटना के बाद वहां की सड़कों पर भारी गंदगी फैल गई और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। फिलहाल जिले भर में करीब 3 हजार सफाई कर्मचारी हड़ताल पर बताए जा रहे हैं। इस आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। आज कांग्रेस पार्टी के विधायक विपिन जैन ने भी हड़ताली कर्मचारियों का समर्थन करते हुए उनके धरने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। यदि जल्द ही कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में जिले में कचरे का संकट और अधिक गहरा सकता है।
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