तेजस Mk1A की वायुसेना में एंट्री का रास्ता साफ, GE ने भेजे और इंजन

भारतीय वायुसेना के स्वदेशी फाइटर जेट तेजस Mk1A के उत्पादन में तेजी आने की उम्मीद है क्योंकि GE Aerospace ने इंजनों की सप्लाई को रफ्तार दी है।

इंजन आपूर्ति में तेजी से बढ़ेगी तेजस Mk1A की रफ्तार

भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने के लिए तैयार स्वदेशी फाइटर जेट तेजस Mk1A की डिलीवरी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। विमान के लिए बेहद जरूरी F404-IN20 इंजनों की खेप अब मिलने लगी है, जिससे विमानों के उत्पादन में गति आने की प्रबल संभावना है। अमेरिका की दिग्गज कंपनी GE Aerospace ने हाल ही में चार और F404-IN20 इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL को सौंप दिए हैं। इन चार इंजनों के साथ अब तक तेजस Mk1A कार्यक्रम के लिए कुल 14 इंजन मिल चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हर महीने इसी प्रकार चार इंजनों की आपूर्ति जारी रही, तो HAL के लिए अपने उत्पादन लक्ष्यों को समय पर पूरा करना काफी आसान हो जाएगा।

हर महीने चार इंजन मिलने की उम्मीद

लंबे समय से तेजस Mk1A परियोजना के सामने F404-IN20 इंजन की कमी सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई थी। इंजन समय पर न मिलने के कारण विमानों की डिलीवरी और निर्माण का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हुआ था। हालांकि, अब GE Aerospace ने अपनी आपूर्ति क्षमता को बढ़ाते हुए सितंबर के महीने में चार इंजन भेजे हैं, जो इस बात का संकेत है कि अब नियमित आपूर्ति का दौर शुरू हो गया है। HAL के उत्पादन शेड्यूल के लिए हर महीने चार इंजनों का मिलना एक सकारात्मक बदलाव है। नियमित इंजन उपलब्धता से अब उन एयरफ्रेम्स को अंतिम रूप देने में तेजी आएगी, जो इंजन के इंतजार में खड़े थे।

83 विमानों के बड़े ऑर्डर पर फोकस

भारतीय वायुसेना ने साल 2021 में देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 48,000 करोड़ रुपये का बड़ा सौदा किया था, जिसके तहत 83 तेजस Mk1A विमान खरीदे जाने हैं। इस ऑर्डर में 73 सिंगल-सीट फाइटर जेट और 10 ट्विन-सीट ट्रेनर विमान शामिल हैं। इन विमानों की डिलीवरी मूल रूप से मार्च 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन इंजन की किल्लत और कुछ तकनीकी प्रमाणन देरी के कारण इसमें बाधा आई। इस संपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए कुल 99 F404-IN20 इंजनों का अनुबंध किया गया था। अब इंजन की नियमित सप्लाई शुरू होने से HAL पर उत्पादन का दबाव कम होगा और विमानों को वायुसेना में शामिल करने का रास्ता साफ होगा।

दूसरे कॉन्ट्रैक्ट के तहत 97 और विमानों की योजना

भारतीय वायुसेना ने तेजस की उपयोगिता को देखते हुए सितंबर 2025 में 97 और नए तेजस Mk1A विमानों के लिए एक और बड़ा अनुबंध किया है। लगभग 62,370 करोड़ रुपये की लागत वाले इस दूसरे बड़े समझौते में 68 सिंगल-सीट फाइटर और 29 ट्विन-सीट ट्रेनर विमान शामिल हैं। इन विमानों की डिलीवरी का लक्ष्य वर्ष 2027-28 से शुरू करके अगले छह वर्षों में पूरा करना है। यदि हम दोनों प्रमुख अनुबंधों को जोड़ दें, तो भारतीय वायुसेना के लिए कुल 180 तेजस Mk1A लड़ाकू विमानों का एक बड़ा जखीरा तैयार करने की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके लिए इंजनों की निर्बाध आपूर्ति ही सफलता की कुंजी है।

तेजस की वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियां

वर्तमान में भारतीय वायुसेना में तेजस के दो स्क्वाड्रन ऑपरेशनल हैं, जिनमें नंबर 45 स्क्वाड्रन 'फ्लाइंग डैगर्स' और नंबर 18 स्क्वाड्रन 'फ्लाइंग बुलेट्स' शामिल हैं। इससे पहले के 40 विमानों का उत्पादन कार्यक्रम (20 IOC और 20 FOC कॉन्फिगरेशन) सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। अब पूरा ध्यान 180 विमानों वाले Mk1A प्रोग्राम पर है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रवि कुमार ने हाल ही में पुष्टि की थी कि तेजस विमानों के परीक्षण के दौरान कुछ सॉफ्टवेयर संबंधित बदलाव किए जा रहे हैं। कंपनी इन तकनीकी बिंदुओं को जल्द से जल्द हल करने में जुटी है ताकि विमान की डिलीवरी प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ाया जा सके।

तेजस Mk2 की तैयारी

जहां Mk1A का ध्यान उत्पादन बढ़ाने पर है, वहीं DRDO और HAL का भविष्य का बड़ा लक्ष्य तेजस Mk2 है। यह एक मीडियम-वेट फाइटर जेट है जो Mk1A से अधिक शक्तिशाली होगा। हालांकि, यह अभी विकास के चरणों (development phase) में है। यदि Mk2 के विकास में समय लगता है, तो वायुसेना को अपने फाइटर स्क्वाड्रन की संख्या बनाए रखने के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, राफेल या रूसी Su-57 जैसे किसी भी अन्य विकल्प को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है। इस समय पूरी प्राथमिकता तेजस Mk1A कार्यक्रम की गति को तेज करने और HAL की निर्माण क्षमता को अधिकतम स्तर तक ले जाने की है।

https://www.indiatv.in/india/national/tejas-mk1a-early-entry-hopes-rise-iaf-as-ge-dispatches-four-more-f404-in20-engines-2026-10-07-1247421