सुप्रीम कोर्ट के आदेश में फर्जीवाड़ा: उम्रकैद काट रहे कैदी की रिहाई के मामले में DIG प्रिजन्स गिरफ्तार

कर्नाटक में सुप्रीम कोर्ट के जाली आदेश का इस्तेमाल कर एक आजीवन कारावास की सजा काट रहे अपराधी को रिहा कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस साजिश में बेंगलुरु सेंट्रल जेल के तत्कालीन चीफ सुपरिटेंडेंट और वर्तमान DIG प्रिजन्स की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।

मामले का खुलासा और गिरफ्तारी

कर्नाटक की जेल व्यवस्था में एक गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश में कथित तौर पर हेरफेर करके आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी को रिहा कराने के आरोप में बेंगलुरु सेंट्रल जेल के पूर्व चीफ सुपरिटेंडेंट, जो वर्तमान में DIG प्रिजन्स के पद पर तैनात हैं, सोमशेखर को गिरफ्तार किया गया है। यह पूरा मामला तब सामने आया जब इस वर्ष 20 मई को बेंगलुरु सेंट्रल जेल के प्रभारी सुपरिटेंडेंट ने परप्पना अग्रहारा पुलिस थाने में एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, शंकर ए नामक एक दोषी कैदी को सुप्रीम कोर्ट के एक फर्जी आदेश के आधार पर 13/11/2018 को जेल से रिहा कर दिया गया था।

क्या है पूरा मामला?

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि शंकर ए के खिलाफ चिकपेट पुलिस स्टेशन में एक मुकदमा दर्ज था, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने 12/07/2004 को उसे उम्रकैद की सजा और ₹10,000/- का जुर्माना भरने का आदेश दिया था। आरोपी ने अपनी सजा को चुनौती देने के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन दोनों ही अदालतों ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। पुलिस की तफ्तीश में खुलासा हुआ कि उस समय SDA के तौर पर कार्यरत श्रीकांत एस ने शंकर ए की क्रिमिनल अपील से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के कथित आदेश की एक जाली प्रति तैयार की थी। इस फर्जी दस्तावेज में यह दर्शाया गया था कि कैदी की रिहाई का आदेश 02/11/2018 को पारित किया गया है।

फर्जी आदेश की आड़ में रिहाई

सर्वोच्च अदालत के नाम पर तैयार किए गए इस नकली आदेश को दिखाकर शंकर ए को 13/11/2018 को बेंगलुरु सेंट्रल जेल से बाहर निकाल दिया गया। मामले की गहन जांच के दौरान कैदी की पत्नी से भी पूछताछ की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल से पति को बाहर निकालने के लिए उस समय के चीफ सुपरिटेंडेंट ने उनकी मदद की थी और इसके बदले में अधिकारी ने सेक्सुअल फेवर की मांग की थी। इन गंभीर आरोपों की भी जांच की जा रही है। इस मामले में पहले ही दो आरोपियों को अदालत में पेश किया जा चुका है, जिन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

DIG ने छिपाई थी अहम जानकारी

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, यह साफ हो गया कि जेल और सुधार सेवा विभाग के तत्कालीन चीफ सुपरिटेंडेंट, जो अब DIG के पद पर हैं, ने न केवल मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई बल्कि जांच में सहयोग करने से भी इनकार कर दिया। इसके परिणामस्वरूप 04/10/2026 को उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उन्हें माननीय अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें आगे की पूछताछ के लिए 9 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य पहलुओं को भी खंगाल रही है।

https://www.indiatv.in/india/national/karnataka-former-chief-superintendent-of-bengaluru-central-jail-somashekhar-arrested-accused-in-case-of-manipulating-supreme-court-order-and-release-2026-10-05-1247114