67 साल पुराना लता मंगेशकर का यह गीत आज भी लोग मानते हैं प्रेम गीत, असल में बेटे की जुदाई के दर्द में लिखा गया था

लता मंगेशकर का सदाबहार गीत 'आ लौट के आजा मेरे मीत' जिसे लोग प्रेमी-प्रेमिका की जुदाई से जोड़ते हैं, दरअसल गीतकार ने अपने बेटे से बिछड़ने के गम में लिखा था। यह गीत 1959 की फिल्म 'रानी रूपमति' का है।

लता मंगेशकर का एक ऐसा कालजयी गीत है, जिसे सुनकर ज्यादातर लोग प्रेमी और प्रेमिका के बिछोह की पीड़ा को महसूस करते हैं। दशकों बाद भी यह गाना लोगों की जुबान पर है और इसे एक प्रेम गीत के रूप में ही याद किया जाता है। मगर इस गीत के पीछे की असली कहानी इससे बिल्कुल अलग और बेहद भावुक कर देने वाली है।

कौन सा है यह गीत

यहां बात हो रही है साल 1959 में आई फिल्म 'रानी रूपमति' के मशहूर गाने 'आ लौट के आजा मेरे मीत' की। इस गीत के बोल पंडित भरत व्यास ने लिखे थे। सुनने में यह किसी प्रेमी की पुकार जैसा लगता है, लेकिन इसे लिखते समय गीतकार के मन में जो दर्द था, उसका रिश्ता प्रेम से नहीं बल्कि एक पिता की ममता से था।

बेटे की जुदाई में लिखे गए बोल

जब पंडित भरत व्यास यह गीत लिख रहे थे, तब उनके मन-मस्तिष्क पर अपने बेटे से बिछड़ने का गहरा दुख छाया हुआ था। उन्होंने इस गाने के जरिए अपने बेटे से दूर हो जाने की वेदना को शब्दों में पिरो दिया। दरअसल, यह गीत उस समय लिखा गया था, जब उनका बेटा नाराज होकर घर छोड़कर कहीं चला गया था। बेटे के बिछड़ने का सारा दर्द गीतकार ने इन्हीं पंक्तियों में उंडेल दिया।

छोटी बातों पर आहत हो जाते थे बेटे

बताया जाता है कि उनके बेटे सुंदर दास को छोटी-छोटी बातें बहुत गहराई से चुभ जाती थीं। एक बार वह अपने पिता की किसी बात से नाराज होकर घर से निकल गए। काफी तलाश करने के बावजूद उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसी टीस और बेचैनी ने इस गीत को जन्म दिया, जो आगे चलकर अमर हो गया।

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