पटना में भावुक वापसी
बिहार के राजनीति गलियारों में उस समय चर्चाएं तेज हो गईं, जब पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य लंबे अंतराल के बाद पटना पहुंचीं। सिंगापुर से गुरुवार को लौटीं रोहिणी का स्वागत करने के लिए खुद लालू प्रसाद यादव, उनकी मां राबड़ी देवी और बहन मीसा भारती पटना एयरपोर्ट पर मौजूद थीं। अपनी इस यात्रा के दौरान रोहिणी ने अपने पिता के प्रति गहरा प्रेम और सम्मान व्यक्त किया है, जो उनके सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट
पटना पहुंचने के बाद रोहिणी आचार्य ने एक्स पर एक वीडियो और अपने पिता के साथ एक तस्वीर साझा की। इस वीडियो में वह कार में अपने पिता के साथ यात्रा करती नजर आ रही हैं। इस पोस्ट के साथ उन्होंने एक बेहद भावुक संदेश लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि पापा का हाथ थामने से जीवन की कठिन राहें भी आसान हो जाती हैं। उन्होंने अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोते हुए लिखा, पापा की हर एक मुस्कान में मेरी जान बसती है। रोहिणी ने अपने पिता को बरगद की छाया बताया और कहा कि इस संसार में उनके पिता से बड़ा या उनसे बढ़कर उनके लिए कोई और नहीं है। उन्होंने इस रिश्ते को निस्वार्थ और पवित्र बताया है।
क्या थी पिछले विवाद की पृष्ठभूमि
रोहिणी आचार्य का यह पटना आना काफी मायने रखता है, क्योंकि पिछले एक साल से उनके और उनके परिवार के बीच रिश्तों को लेकर सार्वजनिक रूप से काफी चर्चाएं और अटकलें लगाई जाती रही हैं। नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद एक बड़ा मोड़ आया था, जब रोहिणी ने राजनीति से किनारा करने और परिवार से संबंध खत्म करने की बात कही थी। उस दौरान उन्होंने अपने भाई तेजस्वी यादव और उनके करीबियों पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद वह पटना से वापस सिंगापुर चली गई थीं।
परिवार के साथ मुलाकात पर नजरें
एयरपोर्ट पर जब रोहिणी का सामना अपने परिवार से हुआ, तो वहां का माहौल काफी भावुक नजर आया। रोहिणी ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और अपनी मां राबड़ी देवी से भी मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर राजनीति के जानकारों का कहना है कि यह वापसी परिवार के भीतर जमी बर्फ को पिघलाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, रोहिणी ने मीडिया से बातचीत के दौरान साफ तौर पर कहा है कि उनकी यह यात्रा पूरी तरह से निजी है और इसे राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने अपने माता-पिता से मिलने की इच्छा को अपनी यात्रा का एकमात्र उद्देश्य बताया है।
अटकलों का दौर
हालांकि रोहिणी आचार्य ने अपने इस दौरे को पारिवारिक बताया है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने करीब 12 महीने के बाद वापसी की है, उसने राजनीतिक हलकों में फिर से सवालों को जन्म दे दिया है। पिछले दिनों के विवाद के बाद अब परिवार के साथ यह मिलन किस दिशा में जाएगा, यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल रोहिणी पूरी तरह से अपने माता-पिता के साथ समय बिताने पर ध्यान केंद्रित करती दिखाई दे रही हैं और उन्होंने स्पष्ट रूप से अपने सफर को लेकर निजी होने की बात पर जोर दिया है।
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