किस्मत का क्रूर खेल
जीवन में संघर्ष और दुखों का सामना कर रहे लोग अक्सर यह सोचते हैं कि उनके दिन सबसे बुरे चल रहे हैं, लेकिन फरीदाबाद के रहने वाले 33 वर्षीय दराब सिंह की कहानी सुनकर किसी का भी दिल दहल सकता है। दराब सिंह एक टैक्सी चालक हैं, जिन्होंने अपनी जिंदगी के तीन साल एक गंभीर बीमारी के साथ बिस्तर पर बिताए थे। जब वे तीन साल के लंबे अंतराल के बाद ठीक होकर अपनी आजीविका कमाने के लिए दोबारा सड़क पर निकले, तो नियति ने उनके साथ एक ऐसा भयानक खेल खेला कि वे आज फिर से बिस्तर पर हैं। उनके माथे पर एक ऐसे हादसे का कलंक लग गया है, जिसमें उनकी कोई गलती नहीं थी, लेकिन उसने एक होनहार छात्रा की जान ले ली।
सफर के दौरान हुआ खौफनाक हादसा
सोमवार का दिन दराब सिंह के लिए एक नया सवेरा बनकर आया था, लेकिन वह शाम तक अंधेरे में डूब गया। दराब सिंह ने इसी साल जनवरी में ऐप-आधारित टैक्सी सर्विस के जरिए अपना काम फिर से शुरू किया था। सोमवार की सुबह उन्हें शेख सराय से नोएडा के लिए एक सवारी मिली। यात्री थी 22 वर्षीय हृषिता लाहोन, जो असम की रहने वाली थी और दिल्ली यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई कर रही थी। वह दक्षिण दिल्ली के पंचशील पार्क इलाके में रहती थी। दराब सिंह उसे बाइक टैक्सी पर बैठाकर नोएडा की ओर ले जा रहे थे, तभी आश्रम फ्लाईओवर के पास डीएनडी फ्लाइवे पर एक दर्दनाक घटना घटी।
पीछे से आई मौत
दराब सिंह ने बताया कि पीछे से आ रही एक आसमानी नीले रंग की डीटीसी बस ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों सवारों के हेलमेट बुरी तरह टूट गए। दराब सिंह ने घटना को याद करते हुए बताया कि टक्कर के बाद उन्हें सिर्फ इतना याद है कि एक महिला ने आकर उनकी मदद की और अस्पताल पहुंचाया। दोनों को पहले जीवन अस्पताल ले जाया गया, जहां से हृषिता को सरिता विहार स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल रेफर कर दिया गया। दुर्भाग्यवश, दोपहर करीब 2 बजे इलाज के दौरान हृषिता ने दम तोड़ दिया।
पुलिस और कानून की जटिलताएं
पुलिस के अनुसार, घटना सुबह करीब 10 बजे हुई थी। हालांकि, घटनास्थल पर कोई सीसीटीवी कैमरा मौजूद नहीं था, जिसकी वजह से जांच में मुश्किलें आ रही हैं। पुलिस को इस दुर्घटना की सूचना दोपहर 12:58 बजे मेडिको-लीगल केस यानी एमएलसी रिपोर्ट के माध्यम से मिली। पुलिस अधिकारी अभी तक दराब सिंह का आधिकारिक बयान दर्ज नहीं कर पाए हैं। जांचकर्ताओं ने घटनास्थल के आसपास गवाहों की तलाश भी की, लेकिन किसी ने भी इस घटना को सीधे तौर पर नहीं देखा था। फिलहाल, पुलिस मामले की तहकीकात में जुटी है।
बेरोजगारी और शारीरिक चोटों का दंश
दराब सिंह की हालत अत्यंत दयनीय है। तीन साल तक सीने के गंभीर संक्रमण के कारण वे बेड रेस्ट पर थे, जिसके चलते उनके परिवार को दाने-दाने का मोहताज होना पड़ा था। अब इस सड़क हादसे में उनके हाथ, घुटने और पैरों में गहरी चोटें आई हैं। वे चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं और एक बार फिर बिस्तर तक सीमित हो गए हैं। दराब कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि वे फिर से कब काम कर पाएंगे। दो बच्चों के पिता के रूप में, वे शारीरिक दर्द से कहीं ज्यादा मानसिक रूप से परेशान हैं, क्योंकि उनके पीछे बैठी सवारी की जान चली गई। उन्होंने कहा कि उस दुर्घटना की याद उन्हें ताउम्र परेशान करती रहेगी, जो उनकी रोजी-रोटी का जरिया बनने के बजाय उनके जीवन का सबसे बड़ा दुख बन गई।
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