कांग्रेस में बदल रही है हवा, क्या राहुल गांधी की नई टीम ने ओल्ड गार्ड को किनारे कर दिया है

कांग्रेस के भीतर संगठन की कमान अब युवा चेहरों और राहुल गांधी की रणनीति के इर्द-गिर्द घूम रही है। पार्टी की नई कार्यशैली से पुराने दिग्गजों का प्रभाव कम होता दिख रहा है।

पार्टी के भीतर बदलते समीकरण

कांग्रेस पार्टी में एक बड़ा बदलाव महसूस किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या अब पुरानी पीढ़ी जिसे अक्सर ओल्ड गार्ड कहा जाता है, उसका दौर खत्म हो रहा है। कांग्रेस कार्य समिति यानी CWC की बैठक के दौरान घटी घटनाओं ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है। बैठक में नीतीश कुमार से जुड़े विषय पर दिग्विजय सिंह द्वारा रखी गई बात और उस पर सोनिया गांधी की कथित प्रतिक्रिया ने राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की ओर संकेत दिया है।

राहुल गांधी की सक्रिय भूमिका

पार्टी की बदलती तस्वीर में राहुल गांधी की भूमिका सबसे अहम नजर आ रही है। वे युवाओं और छात्रों के बीच पैठ बनाने के लिए लगातार सक्रिय हैं। राहुल गांधी छात्रों की गूंज अभियान के जरिए सीधे तौर पर देश के युवाओं और विद्यार्थियों से संवाद कर रहे हैं। यह कदम साबित करता है कि कांग्रेस अब अपनी पुरानी शैली को छोड़कर सीधे जनता के साथ जुड़ने की रणनीति पर जोर दे रही है।

संगठन में नई जिम्मेदारी और बदलाव

पंजाब में पार्टी के भीतर जारी गुटबाजी को समाप्त करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सचिन पायलट को सौंपी गई थी। इस कदम के बाद संगठन में कई बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले, जो राहुल गांधी की कार्यशैली और नई टीम पर बढ़ते भरोसे को दर्शाते हैं। दूसरी ओर कांग्रेस का कभी चर्चा में रहा जी-23 समूह अब अपनी चमक खो चुका है और उसके कई वरिष्ठ चेहरे अब पार्टी का हिस्सा नहीं हैं। इन तमाम घटनाओं को जोड़कर देखें तो साफ है कि कांग्रेस की राजनीति अब पूरी तरह से राहुल गांधी और उनकी युवा टीम के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गई है।

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