ब्रिटेन के सांसदों ने पीओके पर खोली पाकिस्तान की पोल, इंटरनेट और मोबाइल बंदी पर जताई गहरी चिंता

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद किए जाने के बाद ब्रिटेन के कई दलों के सांसदों और लॉर्ड्स ने एक साझा पत्र लिखकर चिंता जताई है। उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान की अपील की है।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में इंटरनेट और मोबाइल फोन सेवाएं ठप किए जाने के बाद ब्रिटेन के सांसदों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। कश्मीर से जुड़े ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप के अध्यक्ष और ब्रिटिश सांसद इमरान हुसैन ने इस मामले में ब्रिटेन की विदेश सचिव को एक पत्र भेजा है। इस पत्र पर अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े कई सांसदों और लॉर्ड्स के हस्ताक्षर हैं।

दरअसल, पीओके में जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने 9 जून को हड़ताल का ऐलान किया था। इसके बाद वहां इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गईं।

विरोध दबाने के लिए रेंजर्स की तैनाती

प्रदर्शन को कुचलने के मकसद से मुजफ्फराबाद, मीरपुर, कोटली समेत कई जिलों में बड़ी तादाद में पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स तैनात कर दिए गए हैं। आंदोलन की अगुवाई कर रही जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर भी रोक लगा दी गई है।

इसके साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के प्रशासन ने पर्यटकों और बाहरी लोगों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। सूत्रों के अनुसार 5 जून से 20 जून तक वहां पर्यटन से जुड़ी सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है।

परिवारों से संपर्क टूटा

पत्र में सांसदों ने आशंका जताई है कि पीओके में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद होने के कारण ब्रिटेन में रह रहे कई कश्मीरी अपने परिवारों और रिश्तेदारों से बात नहीं कर पा रहे हैं। इससे लोगों में चिंता और बेचैनी लगातार बढ़ रही है।

सांसदों ने यह भी रेखांकित किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारियां जारी हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के साथ बातचीत ठप पड़ जाने से इलाके में तनाव और गहरा गया है।

जनता का गुस्सा दबाने का आरोप

पीओके के स्थानीय संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तान समर्थित प्रशासन जनता के आक्रोश को दबाने के लिए सेना का इस्तेमाल कर रहा है। लगातार हो रही गिरफ्तारियों, इंटरनेट बंदी और सुरक्षा कार्रवाई ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का माहौल और तनावपूर्ण बना दिया है।

सांसदों ने ब्रिटेन सरकार से पूछा है कि वह पीओके के मौजूदा हालात का किस तरह आकलन कर रही है, वहां मौजूद ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और इंटरनेट तथा कॉलिंग सेवाएं बहाल कराने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी जानना चाहा है कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए ब्रिटेन की ओर से कौन-कौन से कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं।

पत्र में सांसदों का कहना है कि पीओके के लोगों और ब्रिटेन में बसे कश्मीरी समुदाय के हित में सभी पक्षों को बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्ण हल तलाशना चाहिए।

ईयू उपाध्यक्ष का दौरा

गौरतलब है कि 1 जून 2026 को यूरोपीय संघ की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने पाकिस्तान का दौरा किया था। यूरोपीय संघ ने इस यात्रा को एक द्विपक्षीय दौरे और 8वीं ईयू-पाकिस्तान रणनीतिक वार्ता के हिस्से के रूप में पेश किया था।

https://hindi.news18.com/world/pakistan-british-mps-express-concern-over-tension-in-pok-seek-report-from-uk-government-10547907.html