उज्जैन में तनाव और हिंसा का घटनाक्रम
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित ऐतिहासिक शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाए जाने के प्रशासनिक फैसले ने शहर में भारी तनाव पैदा कर दिया है। सोमवार के दिन यह विवाद उस समय हिंसक हो गया जब भीड़ ने पुलिस बल पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। फिलहाल इलाके में शांति है, लेकिन सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। 2,500 से अधिक पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। कल हुई झड़पों के बाद पुलिस ने आठ एफआईआर दर्ज की हैं और अब तक 15 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वाले पांच खातों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है और 100 से अधिक आपत्तिजनक कंटेंट्स को हटा दिया गया है।
विवाद की जड़ और सिंहस्थ कुंभ की तैयारी
यह पूरा विवाद 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ के लिए उज्जैन को तैयार करने की कवायद से जुड़ा है। जिला प्रशासन ने शहर में यातायात को सुगम बनाने के लिए सड़कों को 15 मीटर चौड़ा करने का निर्णय लिया था। इसी सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के दायरे में शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा आ रहा था। प्रशासनिक योजना के अनुसार, मस्जिद का पहला हिस्सा 3.5 फीट और दूसरा हिस्सा 8 फीट गिराया जाना था, जबकि मस्जिद का बाकी मुख्य ढांचा सुरक्षित रहना था। इस दौरान बड़ी मीनार को तकनीक की मदद से दूसरी ओर शिफ्ट करने और प्रभावित दुकानों के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने पर सहमति बनी थी। मस्जिद कमेटी और प्रशासन के बीच इसे लेकर समझौता भी हुआ था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय के लोग खुद इस हिस्से को हटाने के लिए तैयार हो गए थे।
हिंसा का कारण और सोशल मीडिया की भूमिका
सब कुछ समझौते के अनुसार चल रहा था, लेकिन रविवार, 27 सितंबर 2026 की रात एक अफवाह फैल गई। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें यह दावा किया गया कि प्रशासन पूरी जामा मस्जिद को ध्वस्त करने की योजना बना रहा है और वहां बुलडोजर तैनात कर दिए गए हैं। इस खबर के फैलते ही सोमवार की सुबह मस्जिद के बाहर हजारों की संख्या में भीड़ जमा हो गई। भीड़ ने आगे बढ़ने का प्रयास किया और जब पुलिस ने उन्हें रोका, तो स्थिति बिगड़ गई। उपद्रवियों ने पथराव किया, जिससे कई पुलिसकर्मी और एक महिला थाना प्रभारी घायल हो गईं। पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ा और हालात पर काबू पाया।
मस्जिद प्रबंधन का रुख और कानूनी पहलू
मस्जिद प्रबंधन और याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह एक प्राचीन इमारत है और प्रार्थना कक्ष व मीनार को हटाने से उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। उनका सुझाव था कि सड़क की चौड़ाई के लिए मस्जिद को छूने के बजाय दूसरी ओर की संपत्तियों को हटाया जाना चाहिए। नगर निगम की पैमाइश के मुताबिक मस्जिद का 9 से 11 फीट चौड़ा हिस्सा सड़क की जद में था, जो जमात खाना, मजहर चौक और लगभग 120 फीट ऊंची मीनार के हिस्सों को प्रभावित कर रहा था। हालांकि, 9 सितंबर को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने जन सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए इस कार्रवाई को मंजूरी दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसी मार्ग पर पहले भी 10 मंदिरों और लगभग 80 अन्य धार्मिक ढांचों को सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के लिए हटाया जा चुका है।
शाही मस्जिद का इतिहास
शाही मस्जिद उज्जैन के पुराने छतरी चौक या कंथल क्षेत्र में स्थित है। इमाम मोहम्मद इब्राहिम के अनुसार, इसका निर्माण लगभग 1390 ईस्वी में हुआ था, जो इसे 636 साल पुरानी इमारत बनाता है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, इसका निर्माण मालवा के पहले स्वतंत्र शासक दिलावर खान गोरी के काल में सल्तनत कालीन वास्तुकला शैली में किया गया था। अपने समय में यह मस्जिद मालवा के शासकों और बड़े अधिकारियों के लिए प्रमुख नमाज स्थल थी, जिसके कारण इसे 'शाही मस्जिद' कहा जाता है। यह मस्जिद गोपाल मंदिर के समीप स्थित है और यह मार्ग महाकालेश्वर मंदिर व क्षिप्रा नदी की ओर जाता है, जो इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
सियासी बयानबाजी
इस मुद्दे पर देश की राजनीति भी गरमा गई है। भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने इसे सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की साजिश करार दिया है, जबकि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि नए वक्फ संशोधन कानून के जरिए मस्जिदों और दरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुस्लिम समाज से धैर्य रखने की अपील की है।
आगे की कार्ययोजना
फिलहाल प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच बनी सहमति के अनुसार, कार्य जारी रहेगा। केवल 3 फीट हिस्सा ही हटाया जाएगा और 120 फीट ऊंची मीनार को तकनीकी रूप से शिफ्ट किया जाएगा। प्रभावित दुकानदारों को वैकल्पिक जगह दी जाएगी और मस्जिद प्रबंधन को एफएआर (FAR) व टीडीआर (TDR) का लाभ मिलेगा। पूरे क्षेत्र में आईडी कार्ड के बिना प्रवेश प्रतिबंधित है और जिला प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है। शहर काजी खलीक उर रहमान ने भी समुदाय से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने का आह्वान किया है।
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