बडगाम में सुरक्षाबलों का बड़ा प्रहार
जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों ने आतंकवाद के खिलाफ एक बेहद सफल अभियान को अंजाम दिया है। सेंट्रल कश्मीर के गुरवैथकलां इलाके में सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा चलाए गए एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार आतंकी कमांडर फौजी मूसा को मार गिराया गया है। सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियां पिछले काफी समय से मूसा की तलाश कर रही थीं, क्योंकि उसका नाम वर्ष 2025 में हुए भीषण पहलगाम हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल था। इस ऑपरेशन को सुरक्षाबलों की एक बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।
मुठभेड़ की पूरी कहानी
सुरक्षा एजेंसियों को मंगलवार, 29 सितंबर को गुरवैथकलां इलाके में आतंकवादियों के छिपे होने की ठोस खुफिया जानकारी मिली थी। जानकारी मिलते ही सेना और पुलिस ने क्षेत्र की घेराबंदी शुरू कर दी। खुद को सुरक्षाबलों से घिरा देख आतंकी मूसा ने जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने भी अपनी स्थिति संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आतंकी मूसा मौके पर ही ढेर हो गया। इस मुठभेड़ के बाद इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां और कोई आतंकी मौजूद न हो। सुरक्षाबल लगातार इलाके में पेट्रोलिंग कर रहे हैं और हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।
ऑपरेशन गुरवैथकलां का ब्योरा
बडगाम जिले के गुरवैथकलां गांव में आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना के बाद जवानों ने मोर्चा संभाला था। सुरक्षाबलों ने जब इलाके को घेरकर आतंकी को सरेंडर करने का मौका दिया, तो उसने आत्मसमर्पण करने के बजाय गोलियां चलाना शुरू कर दिया। जवानों ने बेहद संयम और सधे हुए तरीके से जवाबी फायरिंग की और उसे मार गिराया। फिलहाल सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को सील कर रखा है और एक-एक घर तथा संदिग्ध ठिकाने की बारीकी से जांच की जा रही है। पहलगाम कांड के कई अन्य आरोपियों को सुरक्षाबल पहले ही अपने अंजाम तक पहुंचा चुके हैं, और मूसा का मारा जाना इस कड़ी में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
घाटी में क्यों है हाई अलर्ट
बडगाम की इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है। सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों जैसे कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। यह सतर्कता विशेष रूप से मजालता के जंगलों में हुए हालिया सफल ऑपरेशनों के बाद बढ़ाई गई है। इन इलाकों का भूगोल ऐसा है कि ये पुराने घुसपैठ मार्गों से जुड़े हुए हैं, जो सीधे अंतरराष्ट्रीय सीमा से होकर मजालता और बसंतगढ़ के रास्ते कश्मीर घाटी तक जाते हैं। सुरक्षाबलों ने किसी भी नई घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करने के लिए नाकेबंदी को पहले से अधिक मजबूत कर दिया है।
आधुनिक तकनीक और बेहतर तालमेल
जंगलों में छिपे आतंकवादियों को खदेड़ने के लिए सुरक्षाबल अब अत्याधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। नेशनल हाईवे और सभी महत्वपूर्ण लिंक रोड्स पर वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है। इससे पहले उधमपुर के मजालता इलाके में चलाए गए ऑपरेशन सोहन में जैश-ए-मोहम्मद के दो पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया गया था। उस मुठभेड़ के दौरान आतंकियों के पास से बड़ी मात्रा में असॉल्ट राइफलें और ग्रेनेड बरामद हुए थे। फिलहाल बचे हुए आतंकियों का पता लगाने के लिए सुरक्षाबल इन तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं:
- ड्रोन कैमरों से जंगलों की एरियल निगरानी।
- थर्मल इमेजिंग कैमरों के जरिए रात में आतंकियों की थर्मल सिग्नेचर पहचान।
- घने जंगलों में तलाशी के लिए स्निफर डॉग्स की विशेष टीम का उपयोग।
- सेना, पुलिस और विभिन्न अर्धसैनिक बलों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान।
इन समन्वित प्रयासों का सीधा असर आतंकियों के नेटवर्क के टूटने के रूप में दिख रहा है, जिससे घाटी में सुरक्षा का दायरा और मजबूत हुआ है।
https://hindi.news18.com/news/nation/budgam-encounter-terrorist-moosa-killed-jammu-kashmir-security-forces-alert-10874061.html