कृषि विकास के लिए बड़ा वित्तीय आवंटन
भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से अपने खजाने का द्वार खोल दिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान 10 राज्यों के कृषि मंत्रियों को 1200 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय स्वीकृति के पत्र सौंपे हैं। यह राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना यानी पीएम-आरकेवीवाई के तहत जारी की गई है। इस बड़े आवंटन का मुख्य लक्ष्य राज्यों में संचालित खेती से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं में तेजी लाना है ताकि किसानों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें और विकास कार्यों को धरातल पर तुरंत क्रियान्वित किया जा सके। केंद्रीय मंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार अब केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राज्यों को समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर योजनाओं को बिना किसी विलंब के लागू करने पर पूरा जोर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 के बाद से देश की कृषि विकास दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गई है और खाद्यान्न उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
किन राज्यों को मिली कितनी सहायता राशि
केंद्र सरकार ने यह भारी भरकम बजट राज्यों की विशिष्ट प्राथमिकताओं और कृषि संबंधी जरूरतों के आधार पर आवंटित किया है। इस वित्तीय पैकेज में सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल को प्राप्त हुआ है। राज्यों के लिए जारी फंड का विवरण इस प्रकार है:
- पश्चिम बंगाल: 290 करोड़ रुपए
- हरियाणा: 198 करोड़ रुपए
- छत्तीसगढ़: 181 करोड़ रुपए
- अरुणाचल प्रदेश: 154 करोड़ रुपए
- बिहार: 114 करोड़ रुपए
- कर्नाटक: 104 करोड़ रुपए
- मिजोरम: 75 करोड़ रुपए
- हिमाचल प्रदेश: 64 करोड़ रुपए
- झारखंड: 58 करोड़ रुपए
- पंजाब: 43 करोड़ रुपए
यह फंड सीधे तौर पर राज्यों में कृषि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद करेगा, जिससे किसानों को आधुनिक तकनीक और सिंचाई के बेहतर साधन सुलभ हो सकेंगे।
खेत बचाओ अभियान और मिट्टी की सेहत का संकल्प
कृषि मंत्री ने देश भर की जमीनों में घटती उर्वरता पर चिंता व्यक्त करते हुए 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक एक देशव्यापी खेत बचाओ अभियान चलाने की घोषणा की है। इस अभियान के तहत देश के प्रमुख कृषि वैज्ञानिक सीधे खेतों तक पहुंचेंगे और किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए मार्गदर्शन देंगे। सॉइल हेल्थ कार्ड की मदद से संतुलित उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि जमीन की प्राकृतिक उपजाऊ शक्ति को लंबे समय तक संरक्षित रखा जा सके। इसके साथ ही मिट्टी के मित्र कीटों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। विशेष रूप से पूर्वी भारत के राज्यों जैसे झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लिए एक नई रणनीति बनाई गई है, जिसके अंतर्गत धान की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में दलहन की बुवाई कराई जाएगी, जिससे जमीन की उर्वरता में सुधार होगा और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
दलहन किसानों को 48 घंटे में एमएसपी भुगतान
किसानों की फसल का सही मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने क्रांतिकारी कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की है कि तुअर, उड़द और मसूर की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 100 प्रतिशत सुनिश्चित की जाएगी। अब किसानों को अपनी उपज बेचने के बाद भुगतान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। नई व्यवस्था के तहत फसल खरीद पूरी होने के महज 48 घंटे के भीतर भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। सरकार इसके लिए पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट और आधुनिक मार्केटिंग सिस्टम को सुदृढ़ कर रही है। पिछले आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 से 2025-26 के दौरान रबी खाद्यान्न उत्पादन में 205 लाख टन की रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है, जिसे नई व्यवस्था से और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मिलावटखोरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई
किसानों की मेहनत और कमाई को निशाना बनाने वाले नकली खाद और बीज विक्रेताओं पर केंद्र सरकार बेहद सख्त रुख अपना रही है। शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों को चेतावनी देते हुए कहा है कि नकली खाद, घटिया कीटनाशकों और फर्जी बीजों के कारोबारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसे असामाजिक तत्वों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा, क्योंकि देश में प्रमाणित खाद और उन्नत बीजों की कोई कमी नहीं है। इसके अतिरिक्त, आगामी रबी सीजन की तैयारी के लिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे मिट्टी में नमी की मात्रा का आकलन करके ही फसलों और बीजों का चुनाव करें और जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें।
वैश्विक बाजार में भारतीय कृषि की नई उड़ान
भारतीय कृषि को केवल घरेलू बाजार तक सीमित रखने की सोच को बदलते हुए अब सरकार भारत को विश्व की प्रमुख फूड बास्केट बनाने के लिए काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप, भारत अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के माध्यम से मिलने वाले वैश्विक अवसरों का लाभ उठाएगा। देश के ताजे फल, सब्जियां और खाद्यान्न को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप वैश्विक बाजारों में उतारा जाएगा, जिससे भारतीय किसानों को अपनी मेहनत का बेहतर दाम मिल सके। योजनाओं की प्रभावी निगरानी के लिए केंद्र और राज्यों के बीच हर महीने वर्चुअल बैठकें होंगी। राज्य स्तर पर कृषि मंत्रियों, सचिवों, वैज्ञानिकों और किसान उत्पादक संगठनों की एक साझा टीम बनेगी, जो जिला स्तर पर हर महीने समीक्षा करेगी ताकि नीतियां फाइलों से निकलकर सीधे खेत-खलिहानों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकें।
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