होर्मुज क्षेत्र में भारतीय जहाजों की स्थिति पर MEA की नजर
पश्चिम एशिया में पैदा हुए मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य के पास मंडराते संकट को देखते हुए भारत ने अपने समुद्री हितों और नागरिकों की सुरक्षा के संबंध में स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस युद्धग्रस्त क्षेत्र में भारत के झंडे वाले 6 जहाज पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके अतिरिक्त, भारत के लिए आवश्यक सामग्री लेकर आ रहे 6 विदेशी कार्गो जहाजों पर कुल 163 भारतीय नाविक तैनात हैं। भारत का शिपिंग मंत्रालय इन सभी जहाजों की सुरक्षा, उनकी आवाजाही और गतिविधियों पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है।
तुर्की के बयान को भारत का कड़ा जवाब
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर भारत ने एक बार फिर अपनी बेबाक और मजबूत स्थिति दुनिया के सामने रखी है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन ने कश्मीर को लेकर एक अनावश्यक टिप्पणी की थी। भारत ने इस बयान को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने बेहद सख्त शब्दों में कहा है कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का अभिन्न हिस्सा है। भारत ने स्पष्ट किया है कि इस आंतरिक मामले में किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है और न ही किसी अन्य देश को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार है।
समुद्री क्षेत्र में तैनात जहाजों का ब्यौरा
विदेश मंत्रालय ने होर्मुज के आसपास मौजूद भारतीय जहाजों और वहां काम कर रहे नाविकों को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की है, जो इस प्रकार है:
- भारतीय झंडे वाले जहाज: वर्तमान में फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले कुल 6 जहाज मौजूद हैं, जो सुरक्षित स्थितियों में हैं।
- सुरक्षित आवाजाही: ये सभी छह जहाज सामरिक रूप से अति संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम की ओर सुरक्षित रूप से तैनात हैं और अपना परिचालन जारी रखे हुए हैं।
- विदेशी झंडे वाले जहाज: इन जहाजों के अलावा 6 ऐसे विदेशी झंडे वाले कार्गो जहाज भी उसी क्षेत्र में काम कर रहे हैं, जो भारत के लिए महत्वपूर्ण माल लेकर आ रहे हैं।
- भारतीय नाविकों की सुरक्षा: इन 6 विदेशी जहाजों पर कुल 163 भारतीय नाविक सवार हैं। भारत सरकार के लिए इन नाविकों की सुरक्षा और संरक्षा इस समय सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- मंत्रालय की निगरानी: शिपिंग मंत्रालय द्वारा इन जहाजों की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर बारीक नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कदम उठाया जा सके।
आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भारत का रुख
संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से विदेश मंत्रालय ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का दो टूक रुख दोहराया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के मामले में किसी भी तरह का दोहरा रवैया कतई स्वीकार नहीं करेगा। विदेश मंत्री के बयानों का हवाला देते हुए यह रेखांकित किया गया कि सीमा पार से फैलने वाले आतंकवाद से सख्ती से निपटने के लिए अब वैश्विक समुदाय को एक मंच पर आने की जरूरत है। भारत का मानना है कि आतंकवाद का समूल नाश तभी संभव है जब सभी राष्ट्र अपने आपसी मतभेदों को दरकिनार कर मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सामूहिक प्रयास सुनिश्चित करें।
एक तरफ जहां भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने आंतरिक मामलों में बाहरी दखलंदाजी का मुंहतोड़ जवाब देने में पीछे नहीं है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण समुद्री इलाकों में फंसे अपने नागरिकों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर रहा है। सरकार की कोशिश है कि इस संवेदनशील वैश्विक परिस्थिति के बावजूद भारत के समुद्री व्यापार और उसके नागरिकों के जीवन पर कोई आंच न आए।
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