न्यूकैसल यूनिवर्सिटी में अनंत अंबानी को मिली प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की जिम्मेदारी

न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने अनंत अंबानी को सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस नियुक्त किया है। यह सम्मान उन्हें ग्रीन एनर्जी, डीकार्बोनाइजेशन और वन्यजीव संरक्षण में उनके विशेष योगदान के लिए दिया गया है।

सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में बड़ी जिम्मेदारी

न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने अनंत अंबानी को सस्टेनेबिलिटी यानी स्थिरता के विषय में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के पद पर नियुक्त करने की घोषणा की है। यह महत्वपूर्ण नियुक्ति उनके द्वारा औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, हरित ऊर्जा के विकास और वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में किए गए उल्लेखनीय कार्यों को देखते हुए की गई है। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस का पद विशेष रूप से उन अनुभवी विशेषज्ञों और ऑपरेशनल लीडर्स के लिए आरक्षित होता है, जो अपने व्यावहारिक अनुभव से अकादमिक क्षेत्र को नई दिशा दे सकते हैं। पारंपरिक शोध या पीएचडी की डिग्री वाले पदों से अलग, इस भूमिका के लिए पीयर रिव्यूड प्रकाशनों की अनिवार्यता नहीं होती है। इसका मुख्य उद्देश्य पूंजी आवंटन, नियामक वातावरण, ESG का क्रियान्वयन और बड़े स्तर पर ऑपरेशनल मैनेजमेंट जैसे जटिल विषयों को अकादमिक माहौल में लाना है।

वैश्विक संस्थानों में परंपरा

प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में एक सामान्य प्रक्रिया बनती जा रही है। ऑक्सफोर्ड सैद, वारविक, क्रैनफील्ड, हार्वर्ड, एमआईटी स्लोन और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर जैसे संस्थान पहले ही कॉरपोरेट जगत के दिग्गजों को इस पद से जोड़ चुके हैं। न्यूकैसल यूनिवर्सिटी भी इसी क्रम में उन गैर अकादमिक विशेषज्ञों को सम्मान दे रही है, जिनके पास तकनीक और संचालन का वास्तविक अनुभव है। भारत में भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने वर्ष 2022 में इस श्रेणी को मंजूरी दी थी। इस पहल का लाभ यह है कि अनुभवी कॉरपोरेट लीडर्स बिना किसी औपचारिक शोध डिग्री के भी छात्रों का मार्गदर्शन करने के लिए अधिकृत हैं।

2035 तक नेट कार्बन जीरो का विजन

अनंत अंबानी की यह नियुक्ति रिलायंस इंडस्ट्रीज में उनके ऊर्जा परिवर्तन कार्यों से सीधे जुड़ी हुई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में वे कंपनी के 2035 तक नेट कार्बन जीरो बनने के लक्ष्य को साकार करने में लगे हैं। वे गुजरात के जामनगर में 5000 एकड़ में फैले धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स की कमान संभाल रहे हैं। इस कॉम्प्लेक्स में पांच मुख्य गीगा-फैक्ट्रियां शामिल हैं, जो सोलर पीवी मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रोलाइजर, उन्नत बैटरी स्टोरेज और फ्यूल सेल सिस्टम पर केंद्रित हैं। इंटीग्रेटेड सोलर इकोसिस्टम का लक्ष्य 2030 तक 100 GW सौर ऊर्जा क्षमता हासिल करना है, जबकि ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए 1 डॉलर प्रति किलोग्राम का बेंचमार्क तय किया गया है।

वन्यजीव संरक्षण और वंतारा का योगदान

अनंत अंबानी का सस्टेनेबिलिटी का सफर केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है। जामनगर के औद्योगिक परिसर में उन्होंने 1 करोड़ से अधिक पेड़ लगाकर वनीकरण को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा, जामनगर में ही 3500 एकड़ क्षेत्र में फैला पारिस्थितिक अभयारण्य और रेस्क्यू फैसिलिटी वंतारा उनके संरक्षण प्रयासों का बड़ा हिस्सा है। वंतारा में हाथियों की स्वास्थ्य देखभाल और उनके पुनर्वास के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं मौजूद हैं। अब तक वंतारा के माध्यम से शेर, बाघ, तेंदुए, गैंडे और गंभीर रूप से संकटग्रस्त सरीसृपों सहित हजारों जंगली जानवरों को नया जीवन मिला है। यहां स्थित 650 बेड वाले मल्टी स्पेशियलिटी वाइल्डलाइफ हॉस्पिटल में वेटरनरी एमआरआई, सीटी स्कैनर, डिजिटल एक्स-रे और रोबोटिक सर्जिकल यूनिट जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा प्रणालियां उपलब्ध हैं।

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