कर्नाटक में LPG सिलेंडरों की हेराफेरी का भंडाफोड़, हर 4 में से 1 सिलेंडर में कम मिली गैस

कर्नाटक सरकार द्वारा चलाए गए 'मिशन निखार' के तहत LPG बॉटलिंग यूनिट्स पर छापेमारी की गई, जिसमें बड़ी संख्या में सिलेंडर तय वजन से कम पाए गए। विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना भी लगाया है।

कर्नाटक में मिशन निखार का बड़ा एक्शन

कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के विभाग ने राज्य भर की LPG बॉटलिंग इकाइयों पर एक बड़ा औचक निरीक्षण अभियान चलाया है। इस अभियान को सरकार ने मिशन निखार का नाम दिया है। इस छापेमारी का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को मिलने वाली रसोई गैस की शुद्धता और उसकी मात्रा की जांच करना था। निरीक्षण के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। जांच में पाया गया कि हर चार में से एक सिलेंडर में गैस की मात्रा उतनी नहीं थी, जितनी उस पर अंकित की गई थी। इस गंभीर अनियमितता के सामने आने के बाद, विभाग ने तुरंत सख्त कानूनी कार्यवाही की और दोषी इकाइयों पर जुर्माना भी लगाया है।

छापेमारी और निरीक्षण का ब्यौरा

खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिज़वान अरशद के स्पष्ट निर्देशों पर, लीगल मेट्रोलॉजी विभाग के अधिकारियों ने 24 सितंबर, 2026 को इस राज्यव्यापी अभियान को अंजाम दिया। इस दौरान कुल 18 LPG बॉटलिंग यूनिट्स की गहन जांच की गई। इन इकाइयों में BPCL, HPCL और IOCL की 4-4 यूनिट्स, टोटल एनर्जीज़ की 2 यूनिट्स और 4 निजी बॉटलिंग इकाइयां शामिल थीं। हालांकि, जांच टीम को एक यूनिट पूरी तरह बंद मिली। इस औचक निरीक्षण का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि उपभोक्ताओं को उनके द्वारा चुकाए गए पैसों के बदले पूरी गैस मिल रही है या नहीं।

जांच के परिणाम और कार्रवाई

इस पूरे अभियान के दौरान कुल 1,530 भरे हुए सिलेंडरों का वजन किया गया। आंकड़ों के अनुसार, 1,148 यानी करीब 75 प्रतिशत सिलेंडरों में गैस की मात्रा मानक के अनुसार या उससे अधिक पाई गई। वहीं, 382 सिलेंडरों में गैस की मात्रा निर्धारित वजन से कम निकली, हालांकि विभाग के अनुसार यह कमी स्वीकार्य त्रुटि सीमा के भीतर थी। इसके बावजूद, नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में विभाग ने 3 मामले दर्ज किए हैं और संबंधित इकाइयों से कुल 79,000 का जुर्माना वसूला है। मंत्री रिज़वान अरशद ने स्पष्ट किया कि सही मात्रा में LPG प्राप्त करना उपभोक्ता का कानूनी अधिकार है और सरकार इसे हर हाल में सुनिश्चित करेगी।

उपभोक्ता अपने अधिकारों का रखें ध्यान

सरकार की ओर से कहा गया है कि भविष्य में भी ऐसे औचक निरीक्षण नियमित रूप से जारी रहेंगे। भारत सरकार की 6 जून 2013 की अधिसूचना G.S.R. 359(E) के तहत, 'लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज़) रूल्स, 2011' में किए गए संशोधन के अनुसार, हर LPG मार्केटिंग कंपनी और डिस्ट्रीब्यूटर के लिए यह अनिवार्य है कि वे सिलेंडर की डिलीवरी करने वाले व्यक्ति को वजन करने वाली मशीन या तराजू उपलब्ध कराएं।

उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

उपभोक्ताओं को सतर्क रहने और अपने अधिकारों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। सुरक्षित रहने के लिए नीचे दी गई बातों का पालन करें:

  • डिलीवरी लेने से पहले सिलेंडर लाने वाले कर्मचारी से अपने सामने ही सिलेंडर का वजन करने का आग्रह करें।
  • यह सुनिश्चित करें कि वजन मशीन पर दिख रहा आंकड़ा सिलेंडर पर मुद्रित वजन से मेल खाता हो।
  • यदि सिलेंडर का वजन कम पाया जाता है या डिलीवरी बॉय के पास वजन करने की मशीन नहीं है, तो डिलीवरी स्वीकार करने से मना कर दें।
  • किसी भी अनियमितता की स्थिति में उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1800 599 1100 पर शिकायत दर्ज करें या clm-lm-ka@nic.in पर ईमेल के जरिए सूचना दें।

https://www.indiatv.in/india/national/karnataka-surprise-inspections-conducted-of-lpg-bottling-units-less-quantity-of-gas-found-in-cylinders-fines-imposed-2026-09-29-1245921