निरंतर संघर्ष का मिला फल
बागेश्वर जिले के धारी गांव से ताल्लुक रखने वाले युवा हॉकी खिलाड़ी खजान सिंह टंगड़िया ने खेल की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाने की दिशा में बड़ी छलांग लगाई है। अपनी खेल प्रतिभा और कभी न हार मानने वाले जज्बे के दम पर उन्होंने आखिरकार उत्तराखंड की सीनियर हॉकी टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है। हल्द्वानी में आयोजित राज्य स्तरीय ट्रायल के दौरान खजान सिंह ने अपने शानदार खेल का प्रदर्शन किया, जिसके बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें टीम के लिए चुना। अब खजान सिंह 16वीं हॉकी इंडिया सीनियर पुरुष राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए नजर आएंगे। यह गौरवपूर्ण प्रतियोगिता 10 अक्टूबर को ओडिशा के राउरकेला शहर में आयोजित की जाएगी।
दो बार की असफलता के बाद मिली जीत
राष्ट्रीय स्तर की इस टीम तक पहुंचना खजान सिंह के लिए कतई आसान नहीं था। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि वे इससे पहले दो बार सीनियर टीम के ट्रायल में शामिल हो चुके थे, लेकिन दोनों ही बार उन्हें निराशा हाथ लगी। चयन न हो पाने के कारण मन में मायूसी आना स्वाभाविक था, लेकिन खजान सिंह ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने इन दो असफलताओं को अपनी हार मानने के बजाय सबक की तरह लिया। खजान ने बताया कि उन्होंने अपनी गलतियों का विश्लेषण किया, अपनी कमियों पर बारीकी से काम किया और निरंतर अभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया। उनकी इसी लगन और मेहनत का सुखद परिणाम रहा कि तीसरे ट्रायल में उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की और प्रदेश की टीम का हिस्सा बन गए।
साल 2016 से जारी है हॉकी का सफर
खेल के प्रति खजान सिंह का लगाव कोई नया नहीं है। उन्होंने वर्ष 2016 से हॉकी खेलना शुरू किया था। बचपन से ही खेलों के प्रति उनकी गहरी रुचि रही है, जो धीरे-धीरे उनके जुनून में बदल गई। एक छोटे से गांव से निकलकर सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने जिस तरह से खेल को गंभीरता से लिया, वह अपने आप में अनुकरणीय है। अपनी लगन से उन्होंने न केवल खुद को बेहतर बनाया, बल्कि अब राष्ट्रीय पटल पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं। यह सफर साबित करता है कि अगर लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो गांव की गलियों से उठकर राष्ट्रीय स्तर तक का रास्ता तय किया जा सकता है।
परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर
खजान सिंह की इस कामयाबी से उनके गांव और परिवार में जश्न का माहौल है। उनके परिवार में माता-पिता के साथ एक बड़े भाई हैं। खजान के पिता लघु सिंचाई विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनकी माता एक गृहिणी हैं। उनके बड़े भाई वर्तमान में मर्चेंट नेवी की तैयारी में जुटे हुए हैं। खजान सिंह की इस उपलब्धि ने न केवल उनके माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि क्षेत्र के अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक नई उम्मीद जगाई है। उनकी यह कहानी उन तमाम खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो पहली या दूसरी बार की असफलता के बाद मैदान छोड़कर हताश हो जाते हैं। खजान की यह सफलता दर्शाती है कि धैर्य और निरंतरता ही जीत का असली मंत्र है। अब सबकी निगाहें 10 अक्टूबर को होने वाले मुकाबले पर टिकी हैं, जहां खजान सिंह अपनी कला का जौहर दिखाएंगे।
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