गोंडा जिले के मनकापुर क्षेत्र में किसान प्रवीण सिंह ने आम की बागवानी को आमदनी का बेहतर जरिया बना लिया है। उनके बाग में आम की कई अलग-अलग किस्मों के पेड़ लगे हुए हैं, जो हर साल अच्छी उपज देते हैं।
बाग में ही होती है बिक्री
गर्मियों के मौसम में जब पेड़ों पर आम पककर तैयार हो जाते हैं, तब व्यापारी खुद बाग में पहुंचकर फलों की खरीद करते हैं। इस वजह से किसान को अपनी उपज को बाजार तक ले जाकर बेचने की ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ती।
दूर-दूर तक रहती है मांग
प्रवीण सिंह के आमों की मांग सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के जिलों में भी इनकी अच्छी खपत होती है। यही वजह है कि उन्हें अपनी फसल बेचने में कोई कठिनाई नहीं होती।
पारंपरिक खेती से बेहतर मुनाफा
प्रवीण सिंह का कहना है कि पारंपरिक खेती की तुलना में बागवानी से उन्हें कहीं बेहतर आमदनी हो रही है। उनके अनुसार एक बार पेड़ तैयार हो जाने के बाद कई वर्षों तक उनसे लगातार उत्पादन मिलता रहता है।
शुरुआत में धैर्य जरूरी
उनका मानना है कि शुरुआती वर्षों में बागवानी के लिए धैर्य और निवेश दोनों की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि एक बार पेड़ों के स्थापित हो जाने पर यह खेती अच्छा लाभ देने लगती है।
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