अयोध्या राम मंदिर में ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी, कर्मचारियों और पुजारियों के लिए होगा नया परिधान

अयोध्या स्थित राम मंदिर प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं अनुशासित बनाने के लिए कर्मचारियों और पुजारियों हेतु ड्रेस कोड लागू करने पर विचार कर रहा है। इसके तहत अब मंदिर के सेवादारों की पहचान उनके विशेष परिधान से की जा सकेगी।

अयोध्या राम मंदिर में बड़े बदलाव की तैयारी

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार नई पहल की जा रही है। हाल ही में मंदिर में चढ़ावे को लेकर हुई घटनाओं के बाद प्रशासन सतर्क हुआ है और अब मंदिर की कार्यप्रणाली में अनुशासन लाने के लिए कई बड़े निर्णय लिए जा रहे हैं। राम मंदिर के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र मिश्रा ने कार्यभार संभालने के बाद से ही मंदिर की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने के लिए सक्रियता दिखाई है। इसी सिलसिले में अब मंदिर के कर्मचारियों और गर्भगृह में तैनात पुजारियों के लिए एक निर्धारित ड्रेस कोड लागू करने की योजना तैयार की गई है।

कर्मचारियों के लिए निर्धारित होगा विशिष्ट परिधान

राम मंदिर में सेवा देने वाले विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों की पहचान को और अधिक सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने उन्हें एक विशेष ड्रेस में रखने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, कर्मचारियों के परिधान के लिए गेरुआ अथवा पीले रंग के विकल्पों पर गंभीरता से चर्चा की जा रही है। यह माना जा रहा है कि इन रंगों से मंदिर की धार्मिक महत्ता भी बनी रहेगी और आम श्रद्धालुओं को भी मंदिर के सेवादारों को दूर से पहचानने में आसानी होगी।

डिजाइन की बात करें तो मंदिर प्रशासन इस बात पर विचार कर रहा है कि ड्रेस का स्वरूप वर्तमान में गणना कार्य में लगे कर्मियों द्वारा पहने जाने वाले बिना जेब वाले कुर्ता और पायजामा जैसा ही रखा जाए। हालांकि, ड्रेस के अंतिम रंग और उसकी बनावट पर मुहर ट्रस्टियों के साथ विचार-विमर्श के बाद ही लगाई जाएगी।

पुजारियों के लिए पीतांबरी का प्रस्ताव

केवल सामान्य कर्मचारी ही नहीं, बल्कि गर्भगृह में नियमित पूजा-अर्चना संपन्न कराने वाले पुजारियों के लिए भी प्रशासन ने एक विशेष परिधान का प्रस्ताव रखा है। योजना के अनुसार, पुजारियों को विशेष रूप से पीतांबरी धारण करना होगा, जो रेशमी या सूती वस्त्र का हो सकता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मंदिर की परंपराओं के अनुकूल मर्यादा बनाए रखना और पुजारियों को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करना है।

गर्भगृह में मोबाइल फोन पर पूरी तरह रोक

ड्रेस कोड के अलावा, गर्भगृह की शुचिता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए जितेंद्र मिश्रा ने कड़े नियम तय किए हैं। नई व्यवस्था के तहत गर्भगृह के अंदर पुजारियों द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी लगाने का निर्णय लिया गया है। पूजा की प्रक्रिया के दौरान अब पुजारी न तो अपने पास फोन रख पाएंगे और न ही वहां किसी भी तरह की फोटोग्राफी या वीडियो रिकॉर्डिंग जैसी गतिविधियों को अंजाम दे पाएंगे। इस कदम को मंदिर की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

कार्य के आधार पर होगी अलग-अलग पहचान

प्रशासन की योजना केवल एक जैसी ड्रेस तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्य के अनुसार ड्रेस को वर्गीकृत करने का भी विचार है। मंदिर परिसर में सफाई व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों की ड्रेस अलग हो सकती है, वहीं दान और चढ़ावे की गणना करने वाले कर्मचारियों के लिए अलग रंग निर्धारित किया जा सकता है। इस तरह के वर्गीकरण से मंदिर के अधिकारियों और आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह पहचानना आसान हो जाएगा कि कौन सा कर्मचारी किस कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारी के लिए तैनात है।

ट्रस्ट की सहमति के बाद लागू होगी व्यवस्था

ड्रेस कोड से जुड़े इन तमाम प्रस्तावों पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है। मंदिर प्रशासन ने इन सुझावों को ट्रस्टियों के सामने रखा है, और उनकी सहमति मिलने के बाद ही इसे धरातल पर उतारा जाएगा। जितेंद्र मिश्रा की देखरेख में चल रहे ये सुधार, मंदिर की सुरक्षा को पुख्ता करने, सीसीटीवी निगरानी को बढ़ाने और कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित करने की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही ट्रस्ट की बैठक के बाद इन बदलावों को औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा, जिससे राम मंदिर की व्यवस्था और अधिक अनुशासित एवं सुदृढ़ हो सकेगी।

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