उड़ीसा में खूंखार रॉयल बंगाल टाइगर के गांव में घुसने से मचा हड़कंप, ग्रामीणों की चतुराई से हुआ सुरक्षित बचाव

उड़ीसा के मयूरभंज जिले में एक भटकता हुआ रॉयल बंगाल टाइगर गांव के एक घर में जा घुसा, जिसे ग्रामीणों ने बड़ी सूझबूझ दिखाते हुए बाहर से बंद कर दिया। वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सुरक्षित टाइगर को काबू में किया और अब उसे उपचार के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा।

मयूरभंज के गांव में दहशत का माहौल

उड़ीसा के मयूरभंज जिले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मयूरभंज के खापरखाई गांव में एक विशालकाय रॉयल बंगाल टाइगर भटकता हुआ रिहायशी इलाके में आ धमका। यह घटना गुरुवार की रात को घटी, जब यह जंगली जानवर अचानक एक ग्रामीण के मवेशी बाड़े में दाखिल हो गया। इस खूंखार मेहमान को देखकर ग्रामीणों की सांसे अटक गईं। गनीमत रही कि इस पूरी घटना के दौरान किसी भी व्यक्ति को कोई शारीरिक नुकसान नहीं हुआ और समय रहते स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।

ग्रामीणों ने दिखाई बहादुरी

घटना की शुरुआत तब हुई जब टाइगर मवेशी बाड़े के भीतर पहुंचा। वहां से आ रही गुर्राने की आवाज सुनकर मकान मालिक की नींद खुल गई और उन्होंने तुरंत शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर गांव के अन्य लोग भी मौके पर एकत्र हो गए। लोगों की भारी भीड़ और शोरगुल से घबराकर वह खूंखार टाइगर बाड़े से बाहर निकला और बगल में बने एक खाली घर के अंदर जा घुसा। ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालने के बजाय चतुराई का परिचय देते हुए उस खाली घर के दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया और कुंडी लगा दी। इस तरह से उन्होंने उस खतरनाक जानवर को एक कमरे के भीतर सुरक्षित कैद कर लिया।

वन विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन

ग्रामीणों ने फौरन इस घटना की सूचना स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों को दी। सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व यानी एसटीआर के फील्ड डायरेक्टर प्रकाश चंद्र गोगिनेनी ने जानकारी दी कि रॉयल बंगाल टाइगर पूरी रात उसी सुनसान घर के अंदर बंद रहा। शुक्रवार की सुबह जब वन विभाग की रेस्क्यू टीम घटनास्थल पर पहुंची, तो उन्होंने अत्यंत सावधानी के साथ अपना ऑपरेशन शुरू किया। वन अधिकारी अजय कुमार साहू ने बताया कि इस अभियान में एसीएफ, रेंजर्स, फॉरेस्टर्स और वन रक्षकों की एक विशेष टीम शामिल थी, जिन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद टाइगर को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।

बीमारी की आशंका और अगला कदम

वन विभाग के जानकारों का मानना है कि यह टाइगर संभवतः किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, जिसकी वजह से वह भटककर आबादी वाले क्षेत्र में पहुंच गया। फिलहाल, बारिपदा से एक विशेष पशु चिकित्सक को बुलाया गया है जो टाइगर का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे और उसका इलाज करेंगे। अधिकारियों का कहना है कि जब यह रॉयल बंगाल टाइगर पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा, तब इसे इसके प्राकृतिक आवास यानी सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में वापस छोड़ दिया जाएगा। यह टाइगर पिछले तीन दिनों से गांव के आस-पास के जंगलों में घूम रहा था, जिसकी ग्रामीणों को भनक लग गई थी, लेकिन गुरुवार रात यह सीधे रिहायशी इलाके में घुस आया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  • रॉयल बंगाल टाइगर उड़ीसा के किस जिले में पाया गया: यह टाइगर उड़ीसा के मयूरभंज जिले के खापरखाई गांव में देखा गया।
  • टाइगर ने सबसे पहले कहां प्रवेश किया था: गांव के एक व्यक्ति के मवेशी बाड़े में टाइगर सबसे पहले घुसा था।
  • टाइगर को कैसे पकड़ा गया: मवेशी बाड़े से निकलकर जब टाइगर एक खाली घर में गया, तो ग्रामीणों ने बाहर से दरवाजा बंद कर उसे कैद कर लिया।
  • गांव में टाइगर आने का कारण: अधिकारियों के अनुसार, टाइगर किसी बीमारी के चलते रास्ता भटक गया था।
  • आगे का क्या निर्णय है: इलाज पूरा होने और स्वस्थ होने के बाद इसे सुरक्षित सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा।

https://hindi.news18.com/news/nation/odisha-mayurbhanj-royal-bengal-tiger-rescued-from-house-in-mayurbhanj-village-bolt-gate-when-it-enter-home-10864607.html