यह फसल किसी ATM से कम नहीं! कम लागत में मोटी कमाई, जानें खेती का पूरा तरीका

जिमीकंद की खेती में कम खाद, कम दवा और कम देखरेख की जरूरत होती है, जिससे छोटे किसान भी कम निवेश में लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में बरसात का मौसम इस फसल के लिए बेहद अनुकूल माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में बरसात का मौसम जिमीकंद की खेती के लिए बेहद उपयुक्त रहता है। यही वजह है कि यहां के किसान कम लागत में लाखों रुपये की आमदनी कमाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बाजार में जिमीकंद की लगातार मांग बनी रहती है, और इसी मांग का फायदा उठाते हुए सरगुजा के कुछ किसानों ने इसकी खेती शुरू की, जिससे अब वे सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बरसात के दौरान इस फसल में लागत और मेहनत दोनों कम लगती है, जबकि मुनाफा दोगुना हो जाता है।

खेत की तैयारी सबसे अहम

कृषि जानकारों के मुताबिक, जिमीकंद की खेती में सबसे महत्वपूर्ण काम खेत की तैयारी का होता है। रोपाई के लिए तैयार किए गए गड्ढों में पानी नहीं ठहरना चाहिए, क्योंकि ज्यादा नमी होने पर कंद के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसी कारण खेत में सही ढाल और बेहतर जल निकासी की व्यवस्था जरूरी मानी जाती है।

बीज की कीमत ज्यादा, बाकी खर्च कम

किसान गंगा राम बताते हैं कि जिमीकंद के बीज का दाम तुलनात्मक रूप से अधिक होता है, लेकिन उसके बाद की लागत बहुत कम रह जाती है। आमतौर पर आधा किलो से लेकर 750 ग्राम तक का कंद बोया जाता है, जो एक साल में 4 से 5 किलो तक का हो जाता है। उनके अनुसार, अगर समय रहते खाद, सिंचाई और देखभाल की जाए तो उत्पादन और भी बेहतर मिलता है।

कम खाद और दवा में तैयार होने वाली फसल

दूसरी फसलों के मुकाबले जिमीकंद की खेती में ज्यादा खाद और कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती। यही कारण है कि छोटे और सीमांत किसान भी कम पूंजी में इसकी खेती आसानी से कर सकते हैं। साथ ही इस फसल की देखरेख भी अपेक्षाकृत आसान होती है।

होटलों और शहरी बाजारों में जबरदस्त मांग

जिमीकंद का इस्तेमाल सब्जी और मसाला आधारित व्यंजनों में होता है। इसकी बिक्री अक्टूबर-नवंबर से शुरू हो जाती है। ग्रामीण इलाकों में भले ही इसकी मांग सीमित रहती हो, लेकिन शहरों और होटलों में इसकी खपत काफी ज्यादा है। बाजार में बनी रहने वाली यह लगातार मांग किसानों को बेहतर दाम दिलाने में मददगार साबित होती है।

सरगुजा के किसान बने मिसाल

गंगा राम के अनुसार, सरगुजा क्षेत्र में पहले से ही दो-तीन किसान जिमीकंद की खेती कर रहे हैं और उन्हें अच्छा उत्पादन तथा बढ़िया आमदनी मिल रही है। इन किसानों के अनुभव को देखते हुए अब दूसरे किसानों को भी इस खेती की ओर प्रेरित किया जा रहा है। कृषि विभाग ने किसानों को विपणन और बिक्री में सहयोग देने की बात भी कही है।

कृषि विभाग की किसानों को सलाह

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कम लागत और बेहतर मुनाफे को देखते हुए हर किसान को जिमीकंद की खेती अपनाने पर विचार करना चाहिए। खासकर छोटे किसानों के लिए यह आय बढ़ाने का बेहतरीन जरिया बन सकती है। कम खाद, कम दवा और कम देखरेख में तैयार होने वाली यह फसल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

https://hindi.news18.com/news/agriculture/elephant-foot-yam-or-jimikand-farming-tips-local18-10547251.html