गर्मी का मौसम शुरू होते ही जिस तरह इंसान बेहाल हो जाते हैं, ठीक वैसे ही पौधों की हालत भी बिगड़ने लगती है। तेज धूप, गर्म हवाएं और मिट्टी में नमी की कमी के चलते कई बार हरे-भरे पौधे अचानक मुरझाने लगते हैं। किसी पौधे की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं तो किसी में फूल आना ही बंद हो जाता है।
ऐसे हालात में ज्यादातर लोग बाजार से महंगे फर्टिलाइजर खरीद लाते हैं, मगर यह जरूरी नहीं कि हर बार उनका असर अच्छा ही हो। कई बार केमिकल वाली खाद पौधों को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान तक कर देती है। अगर आपके घर की बालकनी, छत या गार्डन में लगे पौधे भी गर्मी की मार झेल रहे हैं, तो अब घबराने की जरूरत नहीं।
एक अनुभवी माली ने ऐसा सरल और बिल्कुल मुफ्त तरीका साझा किया है, जिसे रसोई में रोज निकलने वाले लहसुन के छिलकों से तैयार किया जा सकता है। आमतौर पर लोग इन छिलकों को कचरा समझकर फेंक देते हैं, जबकि असल में ये पौधों के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह घरेलू खाद सूखते पौधों को दोबारा हरा-भरा कर सकती है और उनमें ढेर सारे फूल खिलाने में मदद कर सकती है।
लहसुन के छिलके इतने खास क्यों हैं?
खाना पकाते समय निकलने वाले लहसुन के छिलकों को अक्सर बेकार मान लिया जाता है, लेकिन इनमें कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो पौधों की बेहतर ग्रोथ में मदद करते हैं। इनमें पोटैशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम और आयरन जैसे जरूरी तत्व मौजूद रहते हैं।
इतना ही नहीं, लहसुन में प्राकृतिक एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसका उपयोग पौधों को फंगस, सड़न और कई तरह के कीड़ों से बचाने में भी कारगर साबित हो सकता है।
खाद बनाने के लिए जरूरी सामान
इस आसान घरेलू खाद को तैयार करने के लिए किसी महंगे सामान की जरूरत नहीं पड़ती। बस इतनी चीजें ही काफी हैं:
- 2 से 3 मुट्ठी लहसुन के छिलके
- आधा लीटर साफ पानी
- प्लास्टिक या कांच का डिब्बा
- छन्नी
ऐसे तैयार करें लहसुन के छिलकों का लिक्विड फर्टिलाइजर
सबसे पहले लहसुन के छिलकों को जमा कर लें। जब पर्याप्त मात्रा में छिलके इकट्ठा हो जाएं, तब एक साफ डिब्बे में आधा लीटर पानी भरकर उसमें सारे छिलके डाल दें। ध्यान रखें कि छिलके पूरी तरह पानी में डूबे रहें, ताकि उनमें मौजूद पोषक तत्व धीरे-धीरे पानी में घुलते रहें।
धूप में नहीं, छांव में रखें
डिब्बे को ढक्कन या किसी प्लेट से ढककर ऐसी जगह रख दें जहां सीधी धूप न पड़ती हो। इसे करीब 2 से 3 दिनों तक यूं ही रहने दें। इन दिनों में पानी का रंग बदलने लगेगा और छिलकों का अर्क उसमें घुल जाएगा। यही प्रक्रिया इस घोल को पौधों के लिए ताकतवर ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर में बदल देती है।
तीन दिन बाद करें यह काम
तीन दिन पूरे होने पर घोल को छन्नी से अच्छी तरह छान लें। छानने के बाद जो पानी मिलेगा, वही पौधों के लिए असली काम का है। बचे हुए छिलकों को फेंकने की जरूरत नहीं है—इन्हें गमले की मिट्टी में दबाया जा सकता है या फिर कंपोस्ट में मिलाया जा सकता है।
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