लंदन में सुरक्षा को लेकर खलबली
ब्रिटेन की राजधानी लंदन से एक बड़ी खबर सामने आई है। मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट यानी MQM के संस्थापक अल्ताफ हुसैन के घर में दो अज्ञात नकाबपोश व्यक्तियों के जबरन घुसने की कोशिश का मामला सामने आया है। पार्टी की ओर से इस घटना को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है और इसे सीधे तौर पर अल्ताफ हुसैन की जान लेने की एक सोची-समझी साजिश बताया गया है।
सोशल मीडिया पर मुस्तफा अजीजाबादी का बयान
MQM के वरिष्ठ नेता मुस्तफा अजीजाबादी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटना की पुष्टि करते हुए सनसनीखेज दावा किया है। उनके अनुसार, घर में घुसने वाले दोनों हमलावर पूरी तरह से प्रशिक्षित लग रहे थे और यह हमला केवल घुसपैठ नहीं, बल्कि अल्ताफ हुसैन की हत्या का प्रयास था। अजीजाबादी ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस स्थिति को देखते हुए ब्रिटिश सरकार को मामले की गंभीरता को समझना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि ब्रिटेन प्रशासन को इस सुरक्षा चूक की गहन जांच करनी चाहिए और अल्ताफ हुसैन को उचित सुरक्षा घेरा प्रदान करना चाहिए।
सीसीटीवी फुटेज में कैद घटना
पार्टी की ओर से जारी किए गए सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से दो नकाबपोश व्यक्तियों को घर के परिसर में प्रवेश करने का प्रयास करते हुए देखा जा सकता है। पार्टी के आधिकारिक बयानों के मुताबिक, सौभाग्य से इस घटना में अल्ताफ हुसैन को किसी प्रकार की कोई चोट नहीं पहुंची है। समर्थकों का मानना है कि यह ईश्वरीय कृपा और लोगों की दुआओं का ही असर है कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।
कौन हैं अल्ताफ हुसैन
अल्ताफ हुसैन मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं। उनका संबंध विभाजन के बाद भारत से पाकिस्तान गए परिवारों से है। उनका शुरुआती जीवन कराची के अजीजाबाद इलाके में बीता। उन्होंने कराची विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और 1979 में बैचलर ऑफ फार्मेसी की डिग्री प्राप्त की। राजनीति के गलियारों में उतरने से पहले उन्होंने अस्पताल और फार्मास्यूटिकल उद्योग में अपनी सेवाएं भी दी थीं।
संगठन की शुरुआत और MQM का गठन
अल्ताफ हुसैन ने 11 जून 1978 को कराची विश्वविद्यालय में ऑल पाकिस्तान मोहाजिर स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन यानी APMSO की नींव रखी थी। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य मोहाजिर छात्रों के शैक्षणिक और राजनीतिक अधिकारों के लिए आवाज उठाना था। यही संगठन आगे चलकर MQM की नींव बना। 1984 में मोहाजिर कौमी मूवमेंट यानी MQM का गठन हुआ और अल्ताफ हुसैन इसके सर्वमान्य नेता बनकर उभरे। इसके बाद कराची और हैदराबाद जैसे शहरों में पार्टी का जनाधार बहुत तेजी से बढ़ा। 1988 के आम चुनावों में MQM ने शहरी सिंध की राजनीति में अपनी धाक जमा दी और बाद में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के साथ सत्ता का समझौता भी किया।
राजनीतिक वर्चस्व और उठापटक
अस्सी और नब्बे के दशक में कराची के पूरे संगठनात्मक ढांचे पर MQM का गहरा प्रभाव था। हालांकि, इस दौरान कराची का माहौल जातीय और राजनीतिक हिंसा की आग में भी झुलसा। कई सशस्त्र समूहों के बीच संघर्ष ने शहर की शांति को प्रभावित किया। MQM के शुरुआती सफर के दौरान पाकिस्तान के सैन्य और खुफिया प्रतिष्ठानों के साथ उनके संबंधों को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहीं। कुछ विश्लेषकों का मानना था कि सेना MQM को अन्य राजनीतिक शक्तियों के खिलाफ एक ढाल के तौर पर देखती थी, हालांकि MQM और उनके समर्थक इन आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं।
ब्रिटेन में निर्वासन और प्रभाव
दिसंबर 1991 में अल्ताफ हुसैन पर कथित हत्या के प्रयास के बाद उन्होंने पाकिस्तान छोड़ दिया और ब्रिटेन में जाकर राजनीतिक शरण ली। इसके कुछ समय बाद 19 जून 1992 को पाकिस्तान सरकार ने कराची में MQM के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान छेड़ा। लंदन में रहते हुए भी अल्ताफ हुसैन ने कई दशकों तक फोन और अन्य माध्यमों से कराची में अपनी पार्टी की गतिविधियों को नियंत्रित करना जारी रखा। उनके समर्थक आज भी उन्हें मोहाजिर समुदाय का सबसे बड़ा नेता मानते हैं, जबकि विरोधी उन पर हिंसा, टारगेट किलिंग और जबरन वसूली जैसे गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। अल्ताफ हुसैन ने इन सभी आरोपों को हमेशा नकारने का काम किया है। अब लंदन में हुई इस घुसपैठ की कोशिश ने उनकी सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
https://www.indiatv.in/world/asia/masked-men-break-into-the-london-home-of-altaf-hussain-founder-of-pakistan-muttahida-qaumi-movement-assassination-plot-2026-09-19-1244053