ब्रिक्स सम्मेलन: व्लादिमीर पुतिन ने की महिंद्रा एंड महिंद्रा की तारीफ, भारतीय कंपनी को बताया वैश्विक स्तर का बड़ा खिलाड़ी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स मंच से भारतीय औद्योगिक समूह महिंद्रा एंड महिंद्रा की जमकर सराहना की है। पुतिन ने इसे वैश्विक बाजार में उभरती हुई एक बड़ी शक्ति के रूप में रेखांकित किया।

पुतिन ने की महिंद्रा एंड महिंद्रा की सराहना

ब्रिक्स देशों के सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बड़ा बयान देकर सबका ध्यान खींचा है। उन्होंने न केवल ब्रिक्स संगठन की बढ़ती ताकत का जिक्र किया, बल्कि भारतीय कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा की खुलकर प्रशंसा भी की। पुतिन ने पश्चिमी देशों को सीधा संदेश देते हुए कहा कि आज ब्रिक्स सदस्य देशों की कंपनियां वैश्विक बाजार में एक बड़ी खिलाड़ी बनकर उभरी हैं। उनके अनुसार, इन कंपनियों के पास पश्चिमी देशों की स्थापित कंपनियों के बराबर ही क्षमता और तकनीक मौजूद है।

वैश्विक पहचान और तकनीकी योगदान

पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स देशों के बीच आपसी सहयोग के कारण ही आज यहाँ की कंपनियां एक दूसरे के बाजारों में मजबूती के साथ फल-फूल रही हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा का उदाहरण देते हुए उन्होंने विशेष रूप से आईटी और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में कंपनी के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिंद्रा जैसे कॉर्पोरेट घरानों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सदस्य देशों में तेजी से होता शहरीकरण और बढ़ती तकनीकी क्षमताएं अब किसी भी पश्चिमी देश की टक्कर की हैं। अपनी इस बात को पुतिन ने केवल महिंद्रा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने चीन की हुवावे, ब्राजील की एम्ब्रेयर, संयुक्त अरब अमीरात की टीपीओ और रूस की रोसाटॉम जैसी बड़ी कंपनियों का भी उल्लेख किया।

महिंद्रा का ही नाम क्यों लिया गया?

ब्रिक्स के अंतरराष्ट्रीय मंच पर महिंद्रा का नाम लिया जाना काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिंद्रा ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को केवल ऑटोमोबाइल क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा है। कंपनी ने एआई और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया है, जिसने उसे एक वैश्विक पहचान दिलाई है। पुतिन का यह कदम पश्चिमी देशों को यह स्पष्ट संदेश देने के समान है कि दुनिया का आर्थिक संतुलन अब धीरे-धीरे बदल रहा है। यह अब केवल अमेरिकी या यूरोपीय निगमों पर निर्भर नहीं है, बल्कि ब्रिक्स देशों की कंपनियां भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना साम्राज्य खड़ा करने और उसे विस्तार देने में पूरी तरह सक्षम हैं।

महिंद्रा समूह का ब्रिक्स देशों में निवेश

महिंद्रा की वैश्विक उपस्थिति को समझने के लिए इसके निवेश के आंकड़ों पर गौर करना जरूरी है। हालांकि कंपनी ने रूस में अभी तक कोई बड़ा विनिर्माण संयंत्र स्थापित नहीं किया है, लेकिन लगभग 2 दशक पहले वहां स्कॉर्पियो मॉडल की असेंबलिंग को लेकर उनकी एक योजना जरूर चर्चा में रही थी। अन्य ब्रिक्स देशों में महिंद्रा की निवेश स्थिति इस प्रकार है:

  • दक्षिण अफ्रीका में कंपनी ने करीब 161 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश किया है।
  • ब्राजील के बाजार में महिंद्रा समूह का निवेश लगभग 281 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
  • यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात में समूह ने अब तक करीब 87 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
  • इंडोनेशिया के बाजार में भी महिंद्रा समूह ने करीब 10 करोड़ रुपये की भागीदारी दर्ज की है।

निवेश का नया मॉडल और एनबीडी

पुतिन ने केवल कंपनियों की तारीफ ही नहीं की, बल्कि ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए नए निवेश मॉडल का सुझाव भी दिया। उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनबीडी) के मॉडल की वकालत करते हुए कहा कि ब्रिक्स की भविष्य की सफलता इसी तरह के सहयोग पर निर्भर है। उनके अनुसार, एनबीडी के माध्यम से व्यापार, एआई, वित्त और व्यावसायिक संबंधों को नई गति दी जा सकती है। पुतिन का मानना है कि यदि ब्रिक्स देश इस तरह के एकीकृत निवेश मॉडल पर चलते हैं, तो इससे पश्चिमी वित्तीय संस्थानों पर उनकी निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी और सदस्य देशों के बीच एक अधिक मजबूत और स्वतंत्र आर्थिक संबंध स्थापित हो सकेगा।

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