खाटू श्यामजी की तस्वीर घर में किस दिशा में लगाएं, पूजा के समय किन नियमों का पालन जरूरी; तभी मिलेगी 'हारे के सहारे' की कृपा

खाटू श्यामजी को 'हारे के सहारे' कहा जाता है और भक्त उन्हें घर में स्थापित कर हर समस्या से मुक्ति की कामना करते हैं। वास्तु के अनुसार सही दिशा में तस्वीर लगाना और पूजा के कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है।

सनातन परंपरा में खाटू श्यामजी को कलियुग का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे हृदय से उनकी आराधना करने पर भक्तों की कामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के संकट दूर हो जाते हैं। यही कारण है कि उन्हें 'हारे के सहारे' के नाम से भी पुकारा जाता है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर आज विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल बन चुका है, जहां प्रतिदिन हजारों-लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

हर भक्त के लिए मंदिर तक पहुंच पाना संभव नहीं होता, इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में ही श्याम बाबा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर लेते हैं। हालांकि वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तस्वीर लगाने तथा पूजा करने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन शुभ फलदायी माना जाता है।

तस्वीर लगाने के लिए सबसे शुभ दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मंदिर या पूजा कक्ष में खाटू श्यामजी की तस्वीर उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में लगाना सर्वाधिक शुभ माना गया है। यह दिशा देवताओं की दिशा मानी जाती है और यहां स्थापित देवी-देवताओं की पूजा से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यदि किसी कारणवश ईशान कोण उपलब्ध न हो तो पूर्व दिशा में भी तस्वीर लगाई जा सकती है। ध्यान रहे कि तस्वीर ऐसी जगह हो जहां नियमित साफ-सफाई होती रहे और पूजा में किसी प्रकार की बाधा न आए।

इन जगहों पर तस्वीर लगाने से बचें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खाटू श्यामजी की तस्वीर को कभी भी शयनकक्ष, रसोईघर या बाथरूम के निकट नहीं लगाना चाहिए। इसके अलावा सीढ़ियों के नीचे या ऐसे स्थान पर, जहां लोगों का लगातार आना-जाना बना रहता हो और सम्मान बनाए रखना कठिन हो, वहां भी तस्वीर लगाने से परहेज करना चाहिए। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि भगवान की तस्वीर या मूर्ति को कभी जमीन पर न रखें।

पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

खाटू श्यामजी की पूजा करते समय मन, वचन और कर्म की पवित्रता का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए और भगवान को फूल, चंदन, धूप, दीप तथा प्रसाद अर्पित करना चाहिए। श्याम बाबा को विशेष रूप से गुलाब के फूल और इत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।

पूजा के समय 'ॐ श्री श्याम देवाय नमः' मंत्र का जाप अथवा श्याम बाबा के भजनों का पाठ भी लाभकारी माना गया है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोग अर्पित कर सकते हैं और पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांट सकते हैं।

नियमित आरती और भक्ति का महत्व

मान्यता है कि घर में केवल खाटू श्याम भगवान की तस्वीर स्थापित कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। प्रतिदिन दीपक जलाना, आरती करना और श्रद्धा भाव से भगवान का स्मरण करना भी आवश्यक माना जाता है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इससे परिवार के सदस्यों पर भी आशीर्वाद बना रहता है और सभी की उन्नति होती है।

नियमों के साथ श्रद्धा भी जरूरी

धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि पूजा में दिशा और नियमों का महत्व अपनी जगह है, लेकिन सबसे अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा और विश्वास होता है। यदि भक्त सच्चे मन से भगवान खाटू श्यामजी का स्मरण करता है तो उसे आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक संतोष की प्राप्ति होती है।

संक्षेप में, घर में खाटू श्यामजी की तस्वीर उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है, और पूजा के दौरान स्वच्छता, नियमित आरती तथा श्रद्धा भाव बनाए रखना आवश्यक है। मान्यता है कि इन बातों का ध्यान रखने से घर में सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का वातावरण निर्मित होता है।

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