आर्थिक मोर्चे पर भारत की ऐतिहासिक प्रगति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को 76 वर्ष के हो गए हैं। उनके नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के सफर को अगर आर्थिक नजरिए से देखा जाए, तो यह देश की एक बड़ी उपलब्धि को दर्शाता है। भारत ने आर्थिक मजबूती के मामले में वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्तमान में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की रियल जीडीपी ने 7.8 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज की है, जो इसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की कतार में सबसे आगे रखता है। इस विकास में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
वित्तीय समावेशन और जनधन योजना
प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान आर्थिक सुधारों की नींव जनधन योजना के माध्यम से रखी गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के हर व्यक्ति तक बैंकिंग सुविधाओं को पहुंचाना था। इस योजना के आंकड़ों पर गौर करें तो 2 सितंबर 2026 तक देश में कुल 59.21 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों में कुल 3.17 लाख करोड़ रुपए की पूंजी जमा है। वित्तीय समावेशन के इस अभियान में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय है, क्योंकि कुल खातों में से 32.98 करोड़ खाते महिलाओं के स्वामित्व में हैं। साथ ही, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के विकास को गति देते हुए वहां 46.03 करोड़ खाते सक्रिय किए गए हैं।
स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार
देश में नवाचार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने में भी प्रधानमंत्री का योगदान सराहनीय है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 तक डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या बढ़कर 2.47 लाख से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2016 में स्टार्टअप की संख्या मात्र 502 थी। इस भारी उछाल ने युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान की है।
रिकॉर्ड स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार
भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति का एक बड़ा प्रमाण उसका विदेशी मुद्रा भंडार है। 4 सितंबर 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस उपलब्धि के साथ ही भारत अब चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद दुनिया में चौथे स्थान पर काबिज हो गया है। पिछले 10 हफ्तों से विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है और इस अवधि के दौरान इसमें लगभग 120 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। यह आंकड़ा न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक बाजार में देश के बढ़ते प्रभाव का भी संकेत है।
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