लाहौल स्पीति में बड़ा हादसा: 15 हजार फीट की ऊंचाई पर ड्रिलबुरी पर्वत की परिक्रमा के दौरान भारी बर्फबारी, दो महिला श्रद्धालुओं की मौत

हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में पवित्र ड्रिलबुरी पहाड़ी की परिक्रमा कर रहे श्रद्धालु सीजन की पहली बर्फबारी की चपेट में आ गए, जिससे दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत लेकिन ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र लाहौल स्पीति से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। लाहौल घाटी में स्थित धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र और पूजनीय माने जाने वाले ड्रिलबुरी पर्वत की परिक्रमा के दौरान अचानक मौसम खराब हो गया। सीजन की पहली तेज बर्फबारी के कारण वहां परिक्रमा कर रहे सैकड़ों श्रद्धालु फंस गए, जिसके चलते दो महिला श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में पांच से छह श्रद्धालुओं के गंभीर रूप से घायल होने की भी खबर है। घायल हुए श्रद्धालुओं में बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए केलांग के क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अचानक बदले मौसम से बढ़ी मुश्किलें

लाहौल घाटी में गुरुवार सुबह से ही मौसम ने अचानक करवट बदली और तेज बर्फबारी का दौर शुरू हो गया। यह इस क्षेत्र में इस सीजन का पहला हिमपात है। मौसम के इस अचानक बदलाव के बारे में श्रद्धालुओं को पहले से कोई अंदाजा नहीं था। हजारों की संख्या में श्रद्धालु पवित्र ड्रिलबुरी पहाड़ी की परिक्रमा के लिए निकले हुए थे। इसी दौरान ऊंचाई वाले इलाके में भारी हिमपात होने लगा, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। अत्यधिक ठंड और बर्फ की चपेट में आने से कई श्रद्धालु गंभीर रूप से बीमार पड़ गए और कुछ फिसलकर चोटिल हो गए।

बचाव अभियान और राहत कार्य

इस हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस मुस्तैद हो गई। क्षेत्र की SP शिवानी मेहला ने इस दुखद घटना के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस पवित्र ड्रिलबुरी कोरा यात्रा में लगभग 300 लोगों ने हिस्सा लिया था। अचानक हुई बर्फबारी के बाद वहां फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए तुरंत 3 राहत और बचाव टीमों को रवाना किया गया।

SP के अनुसार, अब तक दो महिलाओं की मौत की पुष्टि हो चुकी है और एक श्रद्धालु के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी मिली है, जिसकी हड्डी टूट गई है। प्रशासन की ओर से त्वरित कार्रवाई करते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। वर्तमान में पहाड़ी पर लगभग 30 लोग बचे हुए थे, जो अब बचाव दलों की देखरेख में सुरक्षित वापस नीचे लौट रहे हैं।

घायलों का इलाज और चिकित्सकों की निगरानी

केलांग स्थित क्षेत्रीय अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुषमा ने इस घटना पर चिकित्सा विभाग की ओर से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ड्रिलबुरी परिक्रमा के दौरान जान गंवाने वाली दोनों महिला श्रद्धालुओं के शवों को अस्पताल लाया गया है, जहां उनके शवों का पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है। पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक और वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

इसके साथ ही, हादसे में घायल हुए लोगों को इलाज के लिए तुरंत केलांग अस्पताल लाया गया। डॉ. सुषमा के मुताबिक, परिक्रमा से वापस लौटे कई श्रद्धालु बर्फ पर फिसलने के कारण चोटिल हुए हैं। इसके अतिरिक्त, अत्यधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हाई एल्टीट्यूड सिकनेस और अत्यधिक ठंड की वजह से हाइपोथर्मिया के शिकार हुए लोग भी अस्पताल पहुंचे हैं। डॉक्टर लगातार मरीजों की सेहत पर नजर रख रहे हैं और घायलों का उपचार किया जा रहा है।

पूर्व मंत्री राम लाल मारकंडे ने व्यक्त की गहरी संवेदना

लाहौल स्पीति के पूर्व मंत्री राम लाल मारकंडे ने भी इस दर्दनाक हादसे पर गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि पवित्र ड्रिलबुरी पर्वत की परिक्रमा पर निकलीं दो महिला श्रद्धालुओं की असमय मृत्यु का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। इसके साथ ही उन्होंने कई लोगों के बर्फ पर फिसलने और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के कारण घायल होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

राम लाल मारकंडे ने कहा, "मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वह दोनों दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके शोकाकुल परिवारों को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। इसके साथ ही मैं अस्पताल में उपचाराधीन सभी घायल श्रद्धालुओं के शीघ्र अति शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करता हूं।"

ड्रिलबुरी पर्वत का धार्मिक महत्व और आस्था

लाहौल घाटी के तांदी में स्थित चंद्रभागा नदी के संगम स्थल के ठीक ऊपर स्थित ड्रिलबुरी पर्वत का बौद्ध धर्म और स्थानीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस पर्वत को आचार्य मतीसार गुरु घंटापा का प्रमुख पीठ स्थान माना जाता है। धार्मिक इतिहास के अनुसार, नालंदा विश्वविद्यालय के प्रख्यात आचार्य मतिसार 7वीं शताब्दी में लाहौल घाटी आए थे और उन्होंने इसी ड्रिलबुरी पर्वत की गुफाओं में वर्षों तक कठोर तपस्या और साधना की थी।

इसके अलावा, ड्रिलबुरी पर्वत को बौद्ध धर्म के करगयुद्पा संप्रदाय के अत्यंत पूजनीय इष्ट देव चक्रसंवर का भी पीठ स्थान माना जाता है। इस स्थान की महानता और धार्मिक महत्ता को देखते हुए बौद्ध धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा, गलदान त्रिपा, गेलौंग ड्रकपा और तकसंग रिम्बोचे जैसे महान आध्यात्मिक गुरु भी यहां की पवित्र यात्रा कर चुके हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ड्रिलबुरी पर्वत की लगभग 9 किलोमीटर की बेहद सीधी और कठिन चढ़ाई पार करने के बाद श्रद्धालु करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचते हैं। बौद्ध धर्म में ऐसी मान्यता है कि ड्रिलबुरी पीक की केवल एक परिक्रमा पूरी करना, भगवान शिव के निवास स्थान माने जाने वाले कैलाश पर्वत की 13 परिक्रमाएं करने के बराबर पुण्य फल देता है। इसी गहरी आस्था के चलते हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु इस कठिन परिक्रमा को पूरा करने के लिए यहां आते हैं।

लाहौल घाटी और मनाली की चोटियों पर हिमपात का असर

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति समेत राज्य के अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। गुरुवार को लाहौल घाटी के प्रसिद्ध दर्रों जैसे बारालाचा, शिंकुला और रोहतांग में भी सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई है। इसके अलावा, प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली के आसपास की ऊंची पर्वत चोटियों ने भी बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है। इस ताज़ा हिमपात के कारण पूरे क्षेत्र में तापमान में भारी गिरावट आई है, जिससे राज्य में कड़ाके की ठंड का आगाज हो गया है।

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