बिहार दारोगा भर्ती रिजल्ट: क्रमवार 301 अभ्यर्थियों के पास होने से बढ़ा संदेह, ईओयू ने आयोग से मांगा जवाब

बिहार दारोगा मुख्य परीक्षा के परिणाम में एक साथ 301 अभ्यर्थियों के क्रमवार तरीके से सफल होने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आर्थिक अपराध इकाई ने इस अनियमितता को लेकर बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।

रिजल्ट में संदिग्ध पैटर्न से मची खलबली

बिहार में दारोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद से ही विवादों में घिर गया है। मुख्य परीक्षा के नतीजों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि 79 अलग-अलग जगहों पर कुल 301 अभ्यर्थी क्रमवार तरीके से उत्तीर्ण घोषित किए गए हैं। यह विचित्र पैटर्न किसी बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है। इस पूरे मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू ने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग से इस संबंध में जवाब-तलब किया है। ईओयू यह जानना चाहती है कि आखिर सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी सीरियल नंबर से कैसे सफल हो सकते हैं। हालांकि, बार-बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद आयोग की ओर से अभी तक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल आयोग अपना जवाब तैयार करने की प्रक्रिया में जुटा है।

क्या है पूरा मामला और धांधली के आरोप

बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा कुल 1799 पदों के लिए दारोगा मुख्य परीक्षा का आयोजन किया गया था। जब आयोग ने 68 पेज की रिजल्ट शीट जारी की, तो उसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अलग-अलग परीक्षा केंद्रों और कमरों में बैठे उम्मीदवारों के रोल नंबर के क्रमवार सफल होने की 79 कतारें देखने को मिलीं। नाराज अभ्यर्थियों ने राज्य के मुख्य सचिव और ईओयू को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि इसमें 'हॉल मैनेजमेंट' और मूल्यांकन प्रक्रिया में भारी धांधली हुई है।

19 जून को जारी हुआ था रिजल्ट

इस परीक्षा में कुल 34,298 उम्मीदवार शामिल हुए थे, जिनमें से शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए 10,759 लोगों का चयन किया गया। रिजल्ट 19 जून को सार्वजनिक हुआ था। आयोग के आंकड़ों और पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के बीच बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। आयोग का दावा है कि कदाचार के कारण केवल 2 लोगों को अयोग्य करार दिया गया था, जबकि वास्तविकता यह है कि गया के रामपुर थाने में परीक्षा के दिन ही एक संगठित सॉल्वर सिंडिकेट के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में परीक्षा हॉल से ब्लूटूथ और वॉकी-टॉकी का उपयोग करने वाले मुकेश कुमार, सॉल्वर आशुतोष, अर्जुन और बिचौलिए अमन सहित 17 से ज्यादा लोगों को नामजद किया गया था। इसी तरह 1 जून को पूर्णिया में भी केस दर्ज हुआ था। इन सबके बावजूद आयोग ने परिणाम जारी करते समय संदिग्ध रोल नंबरों को फिल्टर करने की जहमत नहीं उठाई। छात्र अब आरटीआई के जरिए अपनी ओएमआर शीट और उत्तर-कुंजी मांग रहे हैं, लेकिन आयोग इसे प्रक्रियाधीन बताकर टाल रहा है, जो कि उच्च न्यायालय के आदेशों का सीधा उल्लंघन है।

सॉल्वर गैंग और तकनीकी सेंधमारी

दारोगा भर्ती परीक्षा के दिन यानी 27 मई को ही यह स्पष्ट हो गया था कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। गया और पूर्णिया में प्रश्नपत्र लीक करने और वॉकी-टॉकी के जरिए उत्तर बताने के मामले सामने आए थे। इसके बाद भी संदिग्ध उम्मीदवारों को बाहर नहीं करना आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। छात्र सोशल मीडिया पर वायरल हुई उन तस्वीरों को सबूत के तौर पर पेश कर रहे हैं, जिनमें ओएमआर शीट और परीक्षा केंद्र के अंदर की तस्वीरें हैं। कुछ तस्वीरों में छात्र अंगूठी पहने हुए दिख रहे हैं और ओएमआर शीट के साथ सेल्फी ली गई है, जबकि परीक्षा हॉल में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित था। एक तस्वीर में दिख रहे छात्र का रोल नंबर सफल अभ्यर्थियों की सूची में भी शामिल है, जो धांधली को सिद्ध करने के लिए काफी है।

परीक्षा केंद्रों पर सवालों की बौछार

गया के रामपुर स्थित गया कॉलेज के पास सॉल्वर गैंग के सदस्यों को नकल कराते हुए गिरफ्तार किया गया था। आंकड़ों के मुताबिक, बिहार के 59 परीक्षा केंद्रों में से सबसे अधिक 471 उम्मीदवार इसी केंद्र से पास हुए हैं। पूर्णिया का राजकीय कन्या उच्च विद्यालय भी विवादों में है, जहां से 113 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। जिस केंद्र पर सॉल्वर सिंडिकेट और प्रश्नपत्र वायरल होने की नामजद एफआईआर दर्ज हुई थी, वहां से कुल 584 उम्मीदवारों का चयन होना आयोग की मंशा पर संदेह पैदा करता है। गया कॉलेज के केस में मुकेश कुमार नामक अभ्यर्थी को वॉकी-टॉकी के जरिए उत्तर लिखवाया जा रहा था, जो कि एक विशेष व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ा था। इसके बावजूद इस केंद्र का रिजल्ट होल्ड नहीं किया गया। आवंटित 1440 छात्रों में से 471 का पास होना यानी 32.71 प्रतिशत की सफलता दर, राज्य के 31.37 प्रतिशत के औसत से कहीं अधिक है।

पूर्णिया में वीक्षक की मिलीभगत

पूर्णिया के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय के कमरा नंबर 23 में तैनात वीक्षक मृत्युंजय कुमार ने खुद प्रश्न पुस्तिका संख्या 22532773 और 22532773 की तस्वीरें लेकर अपने भाई को भेजी थीं, जिसके बाद प्रश्नपत्र वायरल हो गया। पुलिस ने वीक्षक को गिरफ्तार भी किया, लेकिन आयोग ने उस केंद्र के रिजल्ट को रोकने के बजाय सामान्य तौर पर जारी कर दिया। वहां भी 439 में से 113 छात्र पास हुए। अब ईओयू ने आयोग से टॉप 20 परीक्षा केंद्रों का ब्योरा और वीडियो फुटेज तलब किए हैं। आयोग को 3 और 8 सितंबर को पत्र लिखे गए हैं, लेकिन अभी तक ठोस जवाब का इंतजार है।

जांच का दायरा और दुखद अंत

जांच एजेंसियां अब परीक्षा माफिया के संबंधों को खंगाल रही हैं। हालांकि अभी तक सीधे तौर पर परीक्षा से पहले पेपर लीक होने के ठोस सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन डिजिटल साक्ष्य धांधली की पुष्टि करते हैं। इस पूरे विवाद के बीच कई छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में दरभंगा के छात्र रोहन कुमार के परिजन भी शामिल हुए, जिन्होंने धांधली की खबरों से हताश होकर आत्महत्या कर ली थी। अभ्यर्थियों द्वारा जुटाए गए डेटा के अनुसार, रिजल्ट शीट के पेज नंबर 30, 41 और 57 पर लगातार 7 अभ्यर्थी क्रमवार सफल हैं, वहीं कई अन्य पन्नों पर 5 से 6 अभ्यर्थी एक साथ पास हुए हैं, जो किसी भी संयोग से कहीं अधिक है।

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