जम्मू-कश्मीर में रची जा रही है एक नई खतरनाक साजिश
सीमा पार से घुसपैठ पर कड़ाई के बाद पाकिस्तान ने अब अपनी नापाक चालें बदल ली हैं। सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी चौकसी के कारण अब सीमा पार से आतंकवादियों की सीधी घुसपैठ लगभग असंभव हो गई है, जिसके चलते पाकिस्तान ने अब जम्मू-कश्मीर के भीतर ही एक नया और बेहद खौफनाक नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश शुरू की है। हाल ही में जम्मू पुलिस ने अरनिया सेक्टर में जिस साजिश का पर्दाफाश किया है, उसने सुरक्षा तंत्र को चिंता में डाल दिया है। इस नेटवर्क का मकसद नाबालिग बच्चों को मोहरा बनाकर हथियारों की तस्करी करना और घाटी में फिर से दहशत का माहौल पैदा करना है।
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
जम्मू पुलिस को अरनिया सेक्टर में कुछ संदिग्ध गतिविधियों की पुख्ता जानकारी मिली थी। पुलिस ने विशेष इनपुट पर कार्रवाई करते हुए एक गिरोह का भंडाफोड़ किया, जिसे 'खौफ गैंग' के नाम से जाना जाता है। इस छापेमारी के दौरान कुल छह व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए इन लोगों में से तीन नाबालिग हैं। पुलिस ने तलाशी के दौरान इनके पास से तीन पिस्तौल और छह जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। यह बरामदगी इस बात का संकेत है कि हथियारों की यह खेप किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के इरादे से जुटाई गई थी।
नाबालिगों को मोहरा बनाने के पीछे की घिनौनी सोच
जांच के शुरुआती नतीजों से पता चला है कि पाकिस्तान स्थित हैंडलर और जेल में बंद अपराधी सोची-समझी रणनीति के तहत नाबालिगों को चुन रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि बच्चों या किशोरों पर सुरक्षा एजेंसियों को आमतौर पर शक नहीं होता है। वे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकते हैं और सुरक्षा बलों की नजरों से बच सकते हैं। इस तरीके से अपराधी वर्ग अपनी पहचान छिपाने में कामयाब हो रहा था। पुलिस इस पहलू पर गंभीरता से जांच कर रही है कि इन नाबालिगों को इस रास्ते पर लाने के लिए किस तरह का लालच दिया गया था और किन लोगों ने उन्हें इस काम के लिए तैयार किया है।
जेल में बंद गैंगस्टरों की भूमिका
इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इसके तार जेल में बंद गैंगस्टरों से जुड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि जेल के अंदर से ही पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। यह महज स्थानीय स्तर की आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि एक बड़ा षड्यंत्र प्रतीत होता है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि जेल में कैद अपराधी किस तरह से बाहर के नाबालिगों के संपर्क में थे और पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों के साथ उनका संचार कैसे हो रहा था। क्या ये गैंगस्टर जेल से ही अपने साथियों के जरिए आदेश जारी कर रहे थे, यह अब जांच का मुख्य विषय है।
ड्रोन का इस्तेमाल और सीमा पार कनेक्शन
सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले हैं कि बरामद किए गए हथियार संभवतः सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से गिराए गए थे। पाकिस्तान पिछले कुछ समय से ड्रोन का इस्तेमाल कर लगातार हथियार और नशीले पदार्थ भारतीय सीमा में भेजता रहा है। हालांकि, बरामद हथियारों के सटीक स्रोत की पुष्टि के लिए विस्तृत जांच जारी है। एजेंसियों का मानना है कि इन हथियारों को जम्मू से कश्मीर भेजने का लक्ष्य था, ताकि वहां सक्रिय आतंकी नेटवर्कों को मजबूत किया जा सके। पाकिस्तान का स्पष्ट मकसद स्थानीय युवाओं का एक ऐसा जखीरा तैयार करना है जो सीधे तौर पर हथियारों की सप्लाई चेन का हिस्सा बन जाए।
जांच का दायरा और आगामी चुनौतियां
अब सवाल यह उठ रहा है कि इन हथियारों का इस्तेमाल किस तरह की आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाना था। क्या घाटी में किसी बड़े हमले की योजना थी या फिर इन हथियारों के जरिए किसी नए आतंकी गुट को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा था? जम्मू पुलिस की यह त्वरित कार्रवाई बेशक एक बड़ी सफलता है, जिसने हथियारों की सप्लाई को समय रहते रोक दिया, लेकिन यह पूरा मामला एक बड़े खतरे की ओर इशारा करता है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के पीछे के मास्टरमाइंड को खोजने में जुटी हैं। इसमें शामिल स्थानीय लोगों की पहचान की जा रही है और उनके संपर्कों को खंगाला जा रहा है। जम्मू से लेकर कश्मीर के सुदूर इलाकों तक फैले इस नेटवर्क की हर एक कड़ी को जोड़कर उसे पूरी तरह से नष्ट करना सुरक्षा बलों की अगली प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है क्योंकि कड़ी से कड़ी जोड़कर पुलिस इस षड्यंत्र की तह तक जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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