देश की सियासत में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा साल 2029 से पहले देश के 21 राज्यों में UCC लागू करने के बड़े एलान के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार के इस फैसले पर बेहद कड़ा ऐतराज जताया है। ओवैसी ने आरोप लगाया है कि इस कानून का असली मकसद समाज में समानता लाना नहीं है, बल्कि गैर-हिंदुओं पर जबरन हिंदू कानून थोपना और अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाना है।
विविधता पर प्रहार और विधि आयोग की रिपोर्ट
असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपनी बात रखते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि खुद भाजपा सरकार द्वारा गठित किए गए विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि देश के लिए UCC न तो जरूरी है और न ही इसकी कोई आवश्यकता है। ओवैसी ने कहा कि भारत जैसे बहुसांस्कृतिक देश की असली खूबसूरती और ताकत इसकी विविधता में ही बसती है। ऐसे में UCC लागू करने का सीधा मतलब यह होगा कि सरकार गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानूनों को थोपना चाहती है, जो इस देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के खिलाफ है।
भाजपा की दोहरी नीतियों और कानूनों पर तीखा हमला
हैदराबाद के सांसद ने भाजपा शासित राज्यों में लागू कानूनों का हवाला देते हुए सत्ताधारी दल के विरोधाभासों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि यह कितनी बड़ी विडंबना है कि एक तरफ भाजपा देश में समानता के नाम पर UCC लागू करने की वकालत कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उसके शासन वाले राज्यों में अशांत क्षेत्र अधिनियम जैसे कानून लागू हैं। ये कानून सीधे तौर पर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच किसी भी तरह की संपत्ति की खरीद-बिक्री पर रोक लगाते हैं। इसके अलावा, ओवैसी ने 'लव जिहाद' से जुड़े कानूनों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों को खास तौर पर केवल ईसाइयों और मुसलमानों के खिलाफ ही इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे साफ पता चलता है कि असली मंशा समानता की नहीं बल्कि मुसलमानों को परेशान करने की है।
सहयोगी दलों को ओवैसी की चुनौती
केंद्रीय गृह मंत्री के इस बड़े एलान के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल भाजपा के सहयोगी दलों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब भाजपा के सहयोगियों को अपनी स्वतंत्र राजनीतिक आवाज का प्रदर्शन करना चाहिए। उन्हें देश के सामने यह साबित करना होगा कि वे महज भाजपा की कठपुतली या "छोटी भाजपा" बनकर नहीं रह गए हैं, बल्कि उनके अपने भी कुछ सिद्धांत और स्वतंत्र सरोकार हैं।
CAA और NRC विरोधी आंदोलन का दिलाया याद
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए ओवैसी ने साल 2019 के घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमित शाह के गलत अहंकार और उनकी बहुचर्चित 'क्रोनोलॉजी' के कारण ही देश को साल 2019 में CAA और NRC विरोधी ऐतिहासिक आंदोलनों का सामना करना पड़ा था। उस जनआक्रोश का ही असर था कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंच पर आकर यह घोषणा करनी पड़ी थी कि देश में कोई NRC लागू नहीं होने जा रहा है।
नागरिकता साबित करने का संकट और आम लोगों की मुश्किलें
ओवैसी ने SIR की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज देश में SIR के नाम पर बेहद दुखद परिस्थितियां बनी हुई हैं, जहां गरीब और आम लोगों को जरूरी कागजात जुटाने और सुनवाई के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर किया जा रहा है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों और प्रवासी मजदूरों को उठानी पड़ रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर देश में NRC लागू किया गया तो इसके नतीजे इससे भी 100 गुना अधिक विनाशकारी होंगे। उन्होंने असम में लागू हुए NRC का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की त्रासदी सबके सामने है। ओवैसी ने सवाल किया कि जिस देश में आज भी 80 करोड़ लोग सरकार के मुफ्त राशन पर निर्भर हैं, वहां सरकार लोगों से पुराने कागजात ढूंढने और अपनी नागरिकता साबित करने की उम्मीद कैसे कर सकती है? उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार चाहती है कि देश का हर नागरिक अपनी पहचान के लिए किसी न किसी सरकारी बाबू के रहम-ओ-करम पर जीने को मजबूर हो जाए।
https://hindi.news18.com/news/nation/ucc-is-ploy-to-corner-muslims-asaduddin-owaisi-questions-over-amit-shah-ucc-announcement-10833899.html