दिशा सालियान मामला: क्या होती है क्रिमिनल रिट याचिका? जानिए छह साल बाद CBI ने क्यों दर्ज की हत्या और सामूहिक दुष्कर्म की एफआईआर

बॉम्बे हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद CBI ने दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के मामले में हत्या, सामूहिक दुष्कर्म और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं के तहत नियमित मामला दर्ज किया है। इस कदम ने छह साल पुराने इस संवेदनशील मामले में एक नया कानूनी मोड़ ला दिया है।

छह साल बाद दिशा सालियान मामले में CBI का बड़ा कदम

देश के सबसे चर्चित और रहस्यमयी मामलों में से एक, दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के मामले में एक बड़ा और अप्रत्याशित कानूनी मोड़ आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के कड़े रुख और स्पष्ट आदेश के बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने छह साल पुराने इस मामले में एक नियमित प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। जांच एजेंसी की स्पेशल क्राइम-II यूनिट, नई दिल्ली ने 13 सितंबर 2026 को इस संबंध में औपचारिक मामला दर्ज किया है। यह FIR केवल एक सामान्य दुर्घटना मृत्यु की जांच नहीं है, बल्कि इसमें भारतीय दंड संहिता की अत्यंत गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं, जिनमें सामूहिक दुष्कर्म, हत्या और सबूतों को मिटाने की आपराधिक साजिश शामिल हैं।

यह मामला 8 और 9 जून 2020 की दरम्यानी रात का है, जब मुंबई के मालवणी इलाके में स्थित Regent Galaxy Apartment के फ्लैट नंबर 1202 से गिरकर दिशा सालियान की मौत हो गई थी। उस समय मुंबई पुलिस ने इसे एक आकस्मिक मृत्यु का मामला मानकर केवल ADR दर्ज की थी। लेकिन अब, घटना के छह साल से अधिक समय बीत जाने के बाद, CBI ने इस मामले में हत्या (धारा 302), सामूहिक दुष्कर्म (धारा 376-D), आपराधिक साजिश (धारा 120-B), साक्ष्यों को नष्ट करने (धारा 201), लोक सेवक द्वारा कानून की अवहेलना करने (धारा 217) और झूठे दस्तावेज तैयार करने (धारा 218) जैसी संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इस नए घटनाक्रम ने देश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

क्रिमिनल रिट याचिका क्या होती है और यह कब दायर की जाती है?

इस पूरे मामले की जड़ में वह क्रिमिनल रिट याचिका है, जिसे दिशा सालियान के पिता सतीश ईश्वर सालियान ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर किया था। आम लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह क्रिमिनल रिट याचिका क्या होती है और इसका कानूनी महत्व क्या है? भारतीय कानून और संविधान के तहत, जब किसी पीड़ित पक्ष को लगता है कि स्थानीय पुलिस या राज्य की जांच एजेंसियां किसी गंभीर आपराधिक मामले की निष्पक्ष जांच करने में पूरी तरह विफल रही हैं, या वे FIR दर्ज करने से इनकार कर रही हैं, अथवा जांच प्रक्रिया में जानबूझकर ढिलाई और लापरवाही बरती जा रही है, तो पीड़ित या उसका परिवार सीधे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के पास यह विशेष अधिकार होता है कि वह नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए और न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष निर्देश या रिट जारी कर सके। क्रिमिनल रिट याचिका के माध्यम से अदालत से गुहार लगाई जाती है कि वह पुलिस को तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दे, जांच को किसी स्वतंत्र एजेंसी जैसे CBI को सौंपे, या अदालत की निगरानी में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराए। दिशा सालियान के पिता ने भी इसी अधिकार का उपयोग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका आरोप था कि मुंबई पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की और वास्तविक परिस्थितियों की अनदेखी करते हुए इसे केवल एक साधारण दुर्घटना मानकर ठंडे बस्ते में डाल दिया।

CBI ने हत्या और सामूहिक दुष्कर्म की धाराओं में क्यों दर्ज किया मामला?

जब भी कोई जांच एजेंसी FIR दर्ज करती है, तो उसके पास इसके लिए पर्याप्त कानूनी और तार्किक आधार होना चाहिए। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को अपने आदेश में मुंबई पुलिस की छह साल लंबी चली जांच प्रक्रिया पर बेहद कड़े और असहज करने वाले सवाल उठाए थे। न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि इतने संवेदनशील और विवादित मामले में छह साल बीत जाने के बाद भी एक नियमित प्राथमिकी दर्ज न करना और केवल ADR के तहत जांच को सीमित रखना कानूनी तौर पर पूरी तरह से अपर्याप्त और संदेहास्पद है।

अदालत के इसी रुख को देखते हुए CBI ने गहनता से विचार किया और दिशा के पिता सतीश ईश्वर सालियान का बयान 11 सितंबर 2026 को दर्ज किया। इस बयान में पिता ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। चूंकि पिता का यह बयान अत्यंत गंभीर प्रकृति के अपराध की ओर इशारा करता था, इसलिए CBI ने कानून के प्रावधानों के अनुरूप हत्या, सामूहिक दुष्कर्म, आपराधिक साजिश और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। कानून के अनुसार, जब कोई गंभीर संज्ञेय अपराध होने का संदेह या आरोप लगाया जाता है, तो जांच एजेंसी को उसी के अनुसार धाराएं लगानी पड़ती हैं ताकि सत्यता की गहराई से जांच हो सके।

CBI की FIR में शामिल प्रमुख नाम और संदिग्ध भूमिकाएं

CBI द्वारा दर्ज की गई इस नई FIR में कई प्रभावशाली लोगों, राजनेताओं, अधिकारियों और डॉक्टरों के नामों का उल्लेख किया गया है जिनकी भूमिका की जांच की जानी है। हालांकि, कानूनी तौर पर यह स्पष्ट समझना बेहद जरूरी है कि FIR में नाम होने का अर्थ यह कतई नहीं है कि वे सभी आरोपी या दोषी सिद्ध हो चुके हैं। FIR केवल जांच की शुरुआत होती है, जिसमें आरोपों और संदिग्ध परिस्थितियों से जुड़े सभी कड़ियों की पड़ताल की जाती है। इस प्राथमिकी के अनुसार, निम्नलिखित व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका को जांच के दायरे में रखा गया है:

  • आदित्य ठाकरे
  • रोहन रॉय (दिशा के मंगेतर)
  • डिनो मोरिया
  • सूरज पंचोली
  • आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड्स
  • रिया चक्रवर्ती
  • शोविक चक्रवर्ती
  • सचिन वाजे
  • परमबीर सिंह
  • DCP विशाल ठाकुर
  • उद्धव ठाकरे
  • अनिल देशमुख
  • अशोक देवदहे (API)
  • जगदेव कलापाड़ (PI)
  • शैलेंद्र नागरकर (PI)
  • चिमाजी अढाव (PI)
  • अर्जुन राजने (PI)
  • मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारी
  • शव परीक्षण (पोस्टमार्टम) में देरी से जुड़े डॉक्टर और कर्मचारी
  • डॉ. संजय जाधव
  • कालिना FSL के संबंधित अधिकारी (जिसमें एन.पी. भाले का नाम भी शामिल है)
  • Regent Galaxy के सुरक्षा गार्ड (सुशील कुमार यादव और शिवमुराद गौतम उर्फ मुन्ना)
  • प्रीति राणे
  • प्रवीण राणे
  • अंकिता साटुर
  • इंद्रनील वैद्य
  • दीप अजमेरा
  • हिमांशु शिखारे
  • रेशा पाडवाल
  • सतवंत सिंह
  • नावेद मुजावर
  • प्रियेश राणे

इसके अलावा, FIR में पूर्व में गठित विशेष जांच दल (SIT) के वरिष्ठ सदस्यों, संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों की भूमिका की भी सघन जांच करने की बात कही गई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इनमें से किसी व्यक्ति की अपराध में कोई सीधी भागीदारी थी या उन्होंने जांच को गुमराह करने का प्रयास किया था।

सतीश सालियान का बयान: FIR का सबसे मजबूत आधार

CBI द्वारा दर्ज की गई इस प्राथमिकी का सबसे बड़ा और प्राथमिक आधार दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान का वह लिखित और मौखिक बयान है जो उन्होंने जांच एजेंसी के समक्ष दर्ज कराया है। उनके इस बयान में घटना से ठीक पहले और बाद के घटनाक्रमों का विस्तार से विवरण दिया गया है। बयान के अनुसार, दिशा सालियान 4 जून 2020 को अपने परिवार से विदा लेकर घर से बाहर निकली थीं। उन्होंने अपनी मां को बताया था कि वह अपने मंगेतर रोहन रॉय के साथ एक विज्ञापन की शूटिंग से जुड़े काम के सिलसिले में जा रही हैं।

इसके बाद, 6 जून को दिशा ने अपनी मां से फोन पर सामान्य बातचीत भी की थी, जिसमें किसी भी प्रकार की परेशानी या तनाव का कोई संकेत नहीं मिला था। लेकिन, 7 जून से दिशा का अपने परिवार के साथ सीधा संपर्क पूरी तरह से बंद हो गया। जब भी परिवार ने उनके फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, तो मंगेतर रोहन रॉय ही फोन उठाता था और अलग-अलग बातें कहकर टाल देता था। इसके बाद, सीधे 9 जून की सुबह परिवार को यह हृदयविदारक सूचना मिली कि दिशा अब इस दुनिया में नहीं रहीं और उनकी मौत हो चुकी है। पिता का यह भी आरोप है कि शुरुआत में पुलिस ने उन्हें अपनी बेटी का शव तक देखने की अनुमति नहीं दी। काफी मिन्नतों के बाद जब उन्हें केवल तस्वीरें दिखाई गईं, तो शव पर मौजूद गंभीर चोटों के निशानों ने उनके मन में गहरे संदेह पैदा कर दिए, जिसकी वजह से वे शुरू से ही हत्या और सामूहिक दुष्कर्म की आशंका जता रहे थे।

CCTV फुटेज और समय के अंतरालों पर उठते गंभीर सवाल

इस पूरे मामले में तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के तौर पर CCTV फुटेज एक बेहद महत्वपूर्ण और केंद्रीय कड़ी बन चुका है। FIR में शिकायतकर्ता पिता के हवाले से CCTV फुटेज से जुड़े समय के अंतरालों पर बड़े सवाल खड़े किए गए हैं। पिता का दावा है कि CCTV फुटेज में दिशा सालियान को 8 जून की रात करीब 8:15 बजे फ्लैट नंबर 1101 की तरफ जाते हुए देखा जा सकता है। इसके बाद, उसी रात करीब 12:55 बजे दिशा के मंगेतर रोहन रॉय, सुरक्षा गार्ड और कुछ पुलिसकर्मियों को लिफ्ट से ऊपर जाते हुए देखा गया है।

यही वह बिंदु है जहां पुलिस की कहानी और CCTV फुटेज के समय में गंभीर विरोधाभास पैदा होता है। मुंबई पुलिस का प्रारंभिक दावा था कि दिशा सालियान अपने फ्लैट में ही मौजूद थीं और उन्होंने रात के करीब 1:20 बजे खिड़की से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अब सवाल यह उठता है कि यदि वे अपने फ्लैट में थीं, तो रात 12:55 बजे पुलिसकर्मी और गार्ड लिफ्ट से ऊपर किस बात की जांच करने जा रहे थे? क्या घटना उससे पहले ही घट चुकी थी? CBI के लिए कानूनी तौर पर इस CCTV फुटेज की प्रामाणिकता, इसके मूल रिकॉर्डर (DVR/NVR) की स्थिति और 'चेन ऑफ कस्टडी' की जांच करना सबसे बड़ी चुनौती होगी ताकि यह साबित हो सके कि फुटेज के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।

शव की स्थिति, पहनावा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विसंगतियां

दिशा सालियान की मौत के बाद तैयार किए गए पंचनामे, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और शव की स्थिति को लेकर भी FIR में अनेक विसंगतियों का जिक्र किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अलग-अलग सरकारी दस्तावेजों और पुलिस रिकॉर्ड में दिशा के शव पर मौजूद कपड़ों के रंग और उनके विवरण को लेकर विरोधाभासी बातें लिखी गई हैं। इसके अलावा, शव के गिरने के स्थान यानी 'लैंडिंग पोजीशन' पर भी बड़ा संदेह व्यक्त किया गया है।

दावे के अनुसार, दिशा सालियान का शव इमारत की दीवार से लगभग 25 फीट की दूरी पर पड़ा हुआ मिला था। फॉरेंसिक विज्ञान के नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी इमारत से सीधे नीचे गिरता है या छलांग लगाता है, तो उसका शव इतनी दूरी पर नहीं गिर सकता, जब तक कि उसे अत्यधिक बलपूर्वक धक्का न दिया गया हो। FIR में उल्लेख है कि इस संदेह को दूर करने के लिए जब पुलिस ने घटना स्थल के पुनर्गठन यानी कृत्रिम डमी टेस्ट किया, तो कोई भी डमी इतनी दूरी पर लैंड नहीं कर सकी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस महत्वपूर्ण रिकंस्ट्रक्शन प्रक्रिया की कोई भी वीडियो रिकॉर्डिंग या वीडियोग्राफी जांच के आधिकारिक दस्तावेजों से गायब है। इस वजह से CBI को अब घटना स्थल के मूल दस्तावेजों, पंचनामों, तस्वीरों और फॉरेंसिक रिपोर्टों को नए सिरे से खंगालना होगा।

योनि और गुदा के स्वैब से जुड़ा बेहद संवेदनशील विवाद

इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील और गंभीर हिस्सा योनि और गुदा के स्वैब (Vaginal और Anal Swabs) की जांच से जुड़ा हुआ है, जो सीधे तौर पर सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों को साबित या खारिज करने के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। FIR के अनुसार, प्रारंभिक मेडिकल और पुलिस रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि दिशा के शरीर से स्वैब लिए गए थे और उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था। इस संबंध में PSI अशोक देवदहे द्वारा 12 जून और 16 जून 2020 को लिखे गए पत्र और DCP विशाल ठाकुर द्वारा 3 अगस्त 2020 को भेजे गए पत्र का संदर्भ दिया गया है।

लेकिन रहस्य तब गहरा गया जब 28 अगस्त 2020 की एक रिपोर्ट सामने आई, जो स्वैब की मूल फॉरेंसिक रिपोर्ट के बजाय केवल स्मियर स्लाइड्स (Smear Slides) से संबंधित थी। बाद में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने स्पष्टीकरण दिया कि Form No. 2 में गलती से 'स्वैब' लिख दिया गया था, और वास्तव में केवल स्मियर ही लिए गए थे। परंतु कहानी में एक और नया मोड़ तब आया जब साल 2023 में SIT के सामने बयान देते हुए PSI अशोक देवदहे ने अपने पुराने रुख को दोहराया कि वास्तव में वेजाइनल और एनल स्वैब लिए गए थे और उन्हें FSL भेजा गया था। यह विरोधाभास इशारा करता है कि या तो मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया या फिर अत्यंत महत्वपूर्ण जैविक साक्ष्यों को नष्ट कर दिया गया।

डिजिटल सबूतों और मोबाइल फोन के डेटा से छेड़छाड़ की आशंका

आधुनिक दौर की किसी भी आपराधिक जांच में डिजिटल साक्ष्य सबसे मजबूत कड़ियों में से एक होते हैं। FIR में दिशा सालियान के मोबाइल फोन को लेकर भी कई संगीन सवाल खड़े किए गए हैं। अलग-अलग बयानों और मीडिया में आई खबरों के हवाले से शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने घटना के बाद दिशा का मोबाइल फोन कब और किस स्थिति में अपने कब्जे में लिया, इसकी कोई पारदर्शी जानकारी नहीं दी गई।

साथ ही, इस बात पर भी संदेह जताया गया है कि क्या मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच नियमों के अनुसार की गई थी? पिता का आरोप है कि दिशा के मोबाइल फोन में मौजूद महत्वपूर्ण कॉल रिकॉर्ड, संदेश, चैट और अन्य डिजिटल डेटा को जानबूझकर मिटाया (डिलीट) गया है या उनके साथ छेड़छाड़ की गई है ताकि अपराधियों तक पहुंचने वाली साक्ष्य श्रृंखला को पूरी तरह से नष्ट किया जा सके। CBI के लिए अब मोबाइल फोन का क्लाउड बैकअप निकालना, नष्ट किए गए डेटा को पुनर्जीवित करना, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और घटना के समय की टावर लोकेशन की जांच करना बेहद महत्वपूर्ण होगा।

क्या FIR में नाम आने का मतलब गिरफ्तारी या दोष साबित होना है?

इस मामले की कानूनी बारीकियों को समझाना अत्यंत आवश्यक है। FIR में किसी भी राजनेता, अधिकारी या अन्य व्यक्ति का नाम आने मात्र से यह कतई सिद्ध नहीं होता कि वे अपराधी हैं या उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। कानून की नजर में FIR केवल एक प्रारंभिक सूचना रिपोर्ट होती है, जिसके आधार पर जांच की दिशा तय की जाती है।

इस विशेष मामले में तो CBI की FIR की भाषा स्वयं स्पष्ट करती है कि जिन लोगों के नाम इसमें दर्ज हैं, उनके संबंध में 'उनकी भूमिका की जांच आवश्यक है' (Roles Require Investigation)। इसका सीधा अर्थ यह है कि जांच एजेंसी को अभी इन सभी लोगों से पूछताछ करनी होगी, उनके घटना के समय के ठिकानों का सत्यापन करना होगा और यह देखना होगा कि क्या उनके खिलाफ कोई ठोस, वैज्ञानिक और दस्तावेजी सबूत उपलब्ध हैं। जब तक CBI को किसी व्यक्ति के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं मिलते, तब तक किसी भी बड़ी गिरफ्तारी की संभावना कम ही रहती है।

CBI के सामने मौजूद 7 सबसे बड़े कानूनी और वैज्ञानिक सवाल

इस बेहद जटिल और बहुचर्चित मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के लिए CBI को सात प्रमुख कानूनी और वैज्ञानिक सवालों के जवाब ढूंढने होंगे, जो इस प्रकार हैं:

  • मृत्यु का वास्तविक कारण: क्या दिशा की मौत केवल ऊंचाई से गिरने के कारण लगी चोटों से हुई या गिरने से पहले ही उनके साथ कोई अन्य शारीरिक हिंसा की गई थी? क्या यह आत्महत्या थी या हत्या?
  • यौन उत्पीड़न के वैज्ञानिक साक्ष्य: क्या दिशा के साथ कोई जबरदस्ती या सामूहिक दुष्कर्म हुआ था? इस बात को साबित करने के लिए स्वैब, स्मियर, डीएनए और FSL रिकॉर्ड की पूरी कड़ियों की गहराई से पड़ताल करनी होगी।
  • CCTV की प्रामाणिकता: अपार्टमेंट के मूल CCTV DVR/NVR की सत्यता की जांच करनी होगी ताकि यह पता चल सके कि फुटेज के साथ कोई काट-छांट तो नहीं की गई है।
  • डिजिटल और मोबाइल डेटा का विश्लेषण: क्या घटना की रात के कॉल रिकॉर्ड, संदेश और इंटरनेट गतिविधि से किसी असामान्य घटनाक्रम की पुष्टि होती है? नष्ट किए गए डेटा की बहाली इस मामले में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
  • साक्ष्यों से छेड़छाड़ की पुष्टि: क्या पुलिस डायरी, पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जानबूझकर विसंगतियां पैदा की गईं? यदि ऐसा हुआ है, तो इसके पीछे किसका हाथ था?
  • लोक सेवकों की भूमिका: क्या जांच में शामिल पुलिस अधिकारियों या डॉक्टरों ने किसी दबाव में आकर झूठे रिकॉर्ड तैयार किए या असली गुनहगारों को बचाने की कोशिश की?
  • आपराधिक साजिश (धारा 120-B) की पुष्टि: क्या इस पूरी घटना को अंजाम देने और बाद में इसे दबाने के लिए विभिन्न प्रभावशाली लोगों के बीच कोई गुप्त सांठगांठ या साजिश रची गई थी? इसे अदालत में साबित करने के लिए मजबूत कड़ियों की आवश्यकता होगी।

घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन: दिशा सालियान से लेकर सुशांत सिंह राजपूत तक

इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को समझने के लिए पिछले छह वर्षों में घटे घटनाक्रमों की इस समय-रेखा (टाइमलाइन) पर नजर डालना आवश्यक है:

  • 8-9 जून 2020 की दरमियानी रात: दिशा सालियान की मुंबई के मलाड स्थित 'रीजेंट गैलेक्सी' इमारत की 12वीं मंजिल के फ्लैट की खिड़की से नीचे गिरने से संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मुंबई पुलिस ने तुरंत इसे आकस्मिक मृत्यु मानकर ADR दर्ज किया।
  • 14 जून 2020 (ठीक 6 दिन बाद): बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत, जिनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान रह चुकी थीं, बांद्रा स्थित अपने फ्लैट में मृत पाए गए। दोनों की मौतों के बीच केवल छह दिनों का अंतर होने के कारण पूरे देश में इन घटनाओं के बीच किसी गहरे और रहस्यमयी संबंध की आशंका जताई जाने लगी।
  • वर्ष 2020 से 2025 तक का समय: इस दौरान मीडिया में इस मामले को लेकर व्यापक चर्चाएं हुईं। कई तरह की थ्योरी सामने आईं। शुरुआत में दिशा के पिता ने किसी साजिश से इनकार किया था, लेकिन बाद में परिस्थितियों और दस्तावेजों में विसंगतियों को देखते हुए उन्होंने अपनी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का गंभीर आरोप लगाया। राज्य सरकार द्वारा एक SIT का गठन भी किया गया था।
  • 2 सितंबर 2026: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की ढीली जांच पर गंभीर आपत्ति जताते हुए ऐतिहासिक आदेश पारित किया और इस पूरे मामले की जांच सीधे CBI को सौंपते हुए नियमित FIR दर्ज करने का निर्देश दिया।
  • 11 सितंबर 2026: CBI ने दिल्ली की अपनी विशेष इकाई में दिशा के पिता सतीश ईश्वर सालियान का विस्तृत बयान दर्ज किया, जिसमें उन्होंने हत्या और सामूहिक दुष्कर्म की आशंका जताई।
  • 13-14 सितंबर 2026: पिता के बयान और हाईकोर्ट के कड़े आदेश के आधार पर CBI ने आखिरकार सामूहिक दुष्कर्म, हत्या, आपराधिक साजिश और सबूत नष्ट करने की संगीन धाराओं के तहत नियमित FIR दर्ज की और अपनी जांच को आधिकारिक रूप से एक नए चरण में पहुंचा दिया।

CBI द्वारा दर्ज की गई इस हालिया FIR ने ठंडे बस्ते में जा चुके इस मामले को फिर से देश की सबसे बड़ी कानूनी बहस के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी फॉरेंसिक विज्ञान, डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की बिखरी हुई कड़ियों को जोड़कर किसी तार्किक और न्यायसंगत निष्कर्ष पर पहुंच पाती है या फिर यह रहस्य हमेशा के लिए अनसुलझा ही रह जाएगा।

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