मोतिहारी के कलाकार मधुरेंद्र का अनोखा हुनर: जिस पत्तल पर परोसा जाता है भोज, उस पर उकेरे दुनिया के बड़े नेताओं के चेहरे

बिहार के मोतिहारी के रहने वाले मशहूर रेत कलाकार मधुरेंद्र कुमार ने पत्तल को अपना कैनवास बनाकर 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले वैश्विक नेताओं के बेहद खूबसूरत चित्र तैयार किए हैं।

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी से कला की एक ऐसी अनूठी और बेजोड़ मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। अक्सर कहा जाता है कि सच्ची कला को किसी बड़े कैनवास या महंगे संसाधनों की जरूरत नहीं होती, बल्कि कलाकार की गहरी सोच और मजबूत कल्पना ही उसे जीवंत बनाती है। इस बात को एक बार फिर सच साबित कर दिखाया है बिहार के सुप्रसिद्ध रेत कलाकार यानी सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने। मधुरेंद्र ने इस बार रेत से अलग हटकर एक बेहद साधारण और पारंपरिक माध्यम को अपनी कला का जरिया बनाया है। उन्होंने भारतीय ग्रामीण जीवन और मांगलिक कार्यों में भोजन परोसने के लिए इस्तेमाल होने वाली पत्तलों पर दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के राष्ट्रध्यक्षों के चेहरे उकेरे हैं। यह पूरी कलाकृति नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS 2026) के स्वागत समारोह को समर्पित है।

कैनवास छोटा पर सोच बड़ी: पत्तल पर कला का अनूठा प्रदर्शन

आमतौर पर पत्तलों का इस्तेमाल किसी भी बड़े भोज, शादी-ब्याह या धार्मिक अनुष्ठानों में मेहमानों को खाना परोसने के लिए किया जाता है। भोजन के बाद इन पत्तलों को व्यर्थ समझकर फेंक दिया जाता है। लेकिन मधुरेंद्र कुमार ने इसी साधारण और उपेक्षित पत्तल को अपनी रचनात्मकता का मुख्य कैनवास बना दिया। उन्होंने अलग-अलग पत्तलों पर दुनिया के कई बड़े नेताओं के चेहरे बहुत ही खूबसूरती के साथ उकेरे हैं, जो सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। इन सभी चित्रों को एक त्रिकोणीय आकार में सजाया गया है। पूरी कलाकृति को एक साथ देखने पर ये अलग-अलग पत्तलें एक बड़े और बेहद रचनात्मक फ्रेम का हिस्सा दिखाई देती हैं। इसके साथ ही इस पर “WELCOME TO INDIA – BRICS 2026” का संदेश भी बड़ी खूबसूरती से लिखा गया है।

इन वैश्विक नेताओं के चेहरे किए गए शामिल

मधुरेंद्र कुमार ने अपनी इस अनोखी चित्रकारी में किसी एक देश के नेता को नहीं, बल्कि BRICS संगठन के सभी प्रमुख सदस्य देशों और वैश्विक राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने वाले शीर्ष नेताओं के चेहरों को पत्तलों पर बहुत ही बारीकी से उकेरा है। इस विशेष कलाकृति में निम्नलिखित प्रमुख नेताओं के चित्र शामिल किए गए हैं:

  • भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
  • रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
  • ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन
  • ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा
  • दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा
  • मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी
  • इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद
  • इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो

इन सभी नेताओं के चेहरों को पत्तलों पर इस तरह सजाया गया है कि उनकी हर एक भाव-भंगिमा बिल्कुल स्पष्ट और सजीव नजर आती है। यह दिखाता है कि बारीक से बारीक काम को भी पत्तल जैसे नाजुक माध्यम पर कितनी संजीदगी से किया जा सकता है।

पत्तल को ही माध्यम चुनने के पीछे का खास संदेश

जब कलाकार मधुरेंद्र कुमार से यह पूछा गया कि उन्होंने पत्तल को ही अपनी कलाकृति के लिए क्यों चुना, तो उन्होंने इसके पीछे छिपे गहरे सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश को साझा किया। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में मेहमानों का स्वागत बहुत ही पवित्र और आदरपूर्ण माना जाता है। भारत की असली पहचान उसकी मेहमाननवाजी और 'अतिथि देवो भवः' की भावना से है। गांवों और कस्बों में आज भी मेहमानों को पत्तलों पर भोजन परोसना आदर और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इसलिए, उन्होंने वैश्विक नेताओं के भारत आगमन पर उनके स्वागत के लिए इसी पत्तल को माध्यम बनाया। यह कलाकृति न केवल नेताओं का स्वागत करती है, बल्कि पूरी दुनिया को शांति, पारस्परिक संवाद, अटूट मित्रता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक सकारात्मक संदेश भी देती है।

असाधारण माध्यमों से पहले भी बटोरी हैं सुर्खियां

यह पहली बार नहीं है जब मोतिहारी के इस कलाकार ने अपनी कला से लोगों को अचंभित किया हो। मधुरेंद्र कुमार मुख्य रूप से अपनी सैंड आर्ट यानी रेत की कलाकृतियों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर रेत के जरिए कई दिल छू लेने वाली कलाकृतियां बनाई हैं। लेकिन इस बार पत्तल का उपयोग करना उनके प्रयोगधर्मी स्वभाव को दर्शाता है। उनका मानना है कि कला के लिए किसी महंगे साजो-सामान या बड़े कैनवास की जरूरत नहीं होती। अगर कलाकार के पास एक नया विचार और उसे साकार करने का हुनर हो, तो वह एक साधारण सी पत्तल से भी दुनिया भर का ध्यान अपनी तरफ खींच सकता है। बिहार के इस होनहार कलाकार का मोतिहारी से शुरू हुआ यह सफर आज इस कलाकृति के जरिए वैश्विक मंच तक पहुंच गया है। उनकी इस अनोखी कोशिश की हर स्तर पर सराहना हो रही है, जो भारत की अनूठी परंपरा और आधुनिक कला का एक अद्भुत मेल प्रस्तुत करती है।

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