ग्लोबल मंच पर दिखी नेताओं की अनूठी केमिस्ट्री
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में अकसर चेहरे और हाव-भाव बहुत कुछ कह जाते हैं। आमतौर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को एक बेहद गंभीर, सख्त और नपे-तुले शब्दों में बात करने वाले नेता के तौर पर जाना जाता है। दुनिया के किसी भी बड़े मंच पर उन्हें शायद ही कभी खुलकर ठहाके लगाते देखा गया होगा। लेकिन हाल ही में संपन्न हुए BRICS सम्मेलन की तस्वीरों ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। इन तस्वीरों में शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हंसते-मुस्कुराते और ठहाके लगाते नजर आ रहे हैं। यह नजारा न केवल दुर्लभ है, बल्कि कूटनीतिक दुनिया में एक बड़े बदलाव का संकेत भी है।
ट्रंप की कूटनीति और इन तस्वीरों का फर्क
अगर हम इन तस्वीरों की तुलना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन और रूस के नेताओं के साथ हुई मुलाकातों से करें, तो जमीन-आसमान का अंतर साफ नजर आता है। डोनाल्ड ट्रंप के साथ जब भी शी जिनपिंग या व्लादिमीर पुतिन की तस्वीरें सामने आती थीं, उनमें एक अजीब सी सख्ती और औपचारिकता दिखाई देती थी। वहां हंसी की जगह तनाव और विश्वास की कमी साफ झलकती थी। ट्रंप के दौर में नेताओं का हाथ मिलाना केवल एक मजबूरी भरा कूटनीतिक शिष्टाचार मात्र लगता था। ऐसा लगता था जैसे वे केवल कैमरों की खातिर साथ खड़े हैं, जबकि उनके मन में एक-दूसरे के प्रति अविश्वास की गहरी खाई थी।
सहजता और भरोसे का नया अध्याय
BRICS सम्मेलन से आई नई तस्वीरों में पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग को एक-दूसरे का हाथ थामे हुए देखा जा सकता है। यह महज एक फोटोग्राफी के लिए किया गया पोज नहीं है, बल्कि यह उन नेताओं के बीच पनपे गहरे भरोसे का प्रतीक है। जब नेता एक-दूसरे के साथ सहज महसूस करते हैं, तो उनकी बॉडी लैंग्वेज खुद-ब-खुद बदल जाती है। इन तीनों नेताओं के बीच की ट्यूनिंग यह साबित करती है कि भले ही देशों के बीच छोटे-मोटे मतभेद हों, लेकिन आपसी सम्मान और मित्रता की डोर कहीं ज्यादा मजबूत है। दूसरी तरफ, ट्रंप जैसे पश्चिमी नेता शायद ही कभी ऐसी गर्मजोशी और खुलेपन वाली तस्वीरों के लिए अवसर जुटा पाए हों।
पुतिन की सहजता किसके साथ
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का मिजाज भी इन मुलाकातों में बदला हुआ दिखता है। जब वे ट्रंप के साथ होते थे, तो उनके चेहरे पर वही पुरानी कूटनीतिक दूरी बनी रहती थी, चाहे ट्रंप ने कितनी ही कोशिश क्यों न की हो। लेकिन, जब पुतिन को पीएम मोदी और शी जिनपिंग के साथ देखा जाता है, तो उनका चेहरा खिल उठता है। यह साफ दिखाता है कि पुतिन खुद को किस गुट के साथ ज्यादा सहज और भरोसेमंद महसूस करते हैं। यह वैचारिक तालमेल का नतीजा है जो उन्हें पश्चिमी दबावों से दूर एक अलग धुरी पर लाता है।
ग्लोबल साउथ की बढ़ती ताकत
डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति का आधार अकसर 'अमेरिका फर्स्ट', टैरिफ वॉर और सख्त धमकियां रहा है। इसके विपरीत, BRICS और RIC के नेता एक ऐसे मंच का निर्माण कर रहे हैं जहां हर देश का सम्मान बराबर है। तस्वीरों में दिखने वाली यह आपसी गर्मजोशी इस बात का संदेश है कि दुनिया अब पश्चिमी दबावों के सामने झुकने वाली नहीं है। इन नेताओं का अनौपचारिक जुड़ाव और एक-दूसरे के साथ हंसना-बोलना 'ग्लोबल साउथ' की बढ़ती हुई सामूहिक शक्ति की कहानी बयान करता है। यह दिखावा नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है।
भारत का कूटनीतिक प्रभाव और पीएम मोदी की भूमिका
इन तस्वीरों का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे फ्रेम के केंद्र में दिखाई दे रहे हैं। यह भारत की उस संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति का परिणाम है, जिसके चलते भारत रूस और चीन दोनों के साथ अपने समीकरणों को सहज बनाए हुए है। सीमा पर मतभेदों के बावजूद, जिनपिंग का मोदी के साथ इस तरह हाथ मिलाना और हंसना भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को हाइलाइट करता है। यह तस्वीर अमेरिका जैसे देशों के लिए एक बड़ा संकेत है कि भारत दुनिया को विभाजित करने के बजाय जोड़ने का काम कर रहा है और एक मजबूत पुल की भूमिका निभा रहा है। यह कूटनीति का वह स्तर है जिसे ट्रंप जैसे नेता शायद ही कभी हासिल कर सके।
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