पहाड़ी स्वाद की जान है जम्बू मसाला
उत्तराखंड की वादियों में उगने वाला पारंपरिक मसाला जम्बू न केवल पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार और आमदनी का एक बेहतरीन जरिया भी बन सकता है। उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन जैसे पहाड़ी दाल, सब्जी और झोल में जम्बू का तड़का लगते ही इसकी खुशबू और स्वाद दोगुना हो जाता है। हालांकि, ताजे जम्बू की पत्तियों का इस्तेमाल केवल सीमित समय के लिए ही किया जा सकता है। ऐसे में इसकी पत्तियों को सुखाकर बाजार में बेचने से कमाई के नए रास्ते खुल रहे हैं।
जम्बू की पत्तियों को सुखाने का सही तरीका
जम्बू की खुशबू और स्वाद को लंबे समय तक बरकरार रखने के लिए इसकी पत्तियों को सही तरीके से सुखाना बेहद जरूरी है। बागेश्वर के स्थानीय निवासी किशन मलड़ा ने पत्तियों को सुखाने और सुरक्षित रखने से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं। अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए, तो यह मसाला खराब नहीं होगा और इसकी गुणवत्ता बनी रहेगी:
- नमी से बचाएं: पत्तियों को सुखाने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि उनमें बिल्कुल भी पानी या नमी न हो। अगर गीली पत्तियों को सुखाने के लिए रखा जाएगा, तो उनके सड़ने या उनमें फफूंद लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
- पतली परत में फैलाएं: जम्बू की हरी पत्तियों को सुखाने के लिए किसी साफ कपड़े या बड़ी ट्रे का इस्तेमाल करें। पत्तियों को एक के ऊपर एक रखने के बजाय एक पतली परत के रूप में अच्छी तरह फैलाकर बिछाएं।
- हवा और उलट-पलट: पत्तियों को सुखाते समय उन्हें बीच-बीच में हल्के हाथों से पलटते रहें। ऐसा करने से सभी पत्तियां समान रूप से और जल्दी सूख जाती हैं।
- भंडारण का सही तरीका: पूरी तरह सूखने के बाद जम्बू को किसी एयरटाइट डिब्बे में बंद करके रखें। इस डिब्बे को हमेशा ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह पर रखना चाहिए। ऐसा करने से जम्बू की लाजवाब खुशबू महीनों तक वैसी ही बनी रहती है।
ग्रामीण महिलाएं इस पारंपरिक जड़ी-बूटी को सुखाकर और पैक करके बाजार में बेच सकती हैं, जिससे उन्हें घर बैठे एक अच्छा स्वरोजगार मिल सकता है।
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