पंजाब में बिजली संकट: जल्द सामान्य होगी स्थिति, केंद्रीय कोटे से 1,000 मेगावाट बिजली की कमी पर सरकार सक्रिय

पंजाब के बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड ने बताया कि राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र से कोटे की बिजली की मांग की है और उम्मीद जताई है कि अगले 48 घंटों में स्थिति में सुधार होगा।

बिजली संकट पर पंजाब सरकार का रुख

पंजाब के बिजली और लोक निर्माण मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड ने शनिवार को राज्य में व्याप्त बिजली की मौजूदा स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। मंत्री ने स्वीकार किया कि इस समय पंजाब को सेंट्रल पावर पूल से मिलने वाले उसके निर्धारित हिस्से की तुलना में 1,051 मेगावाट कम बिजली प्राप्त हो रही है। इस संकट को सुलझाने के लिए उन्होंने केंद्रीय बिजली मंत्री को एक पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और पंजाब को उसका पूरा हक दिलाने के लिए उचित कदम उठाएं।

मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर

मंत्री ने बताया कि वर्तमान में पंजाब में बिजली की कुल मांग 17,000 मेगावाट है, जबकि राज्य के पास अभी केवल 14,000 मेगावाट बिजली ही उपलब्ध है। इस प्रकार राज्य के सामने 3,000 मेगावाट की बिजली की कमी बनी हुई है। सोंड ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केंद्र सरकार से मिलने वाली उस 1,000 मेगावाट बिजली को प्राप्त करना है जो पंजाब का वाजिब अधिकार है, लेकिन फिलहाल नहीं मिल रही है।

तकनीकी खामियों के कारण उत्पादन पर असर

बिजली मंत्री ने जानकारी दी कि पंजाब सरकार के 10 बिजली यूनिट दिन-रात लगातार काम कर रहे हैं। हालांकि, राज्य में मौजूद 2 प्राइवेट यूनिट तकनीकी खामियों के चलते ठप हो गए थे, जिससे संकट और गहरा गया। राहत की बात यह है कि सरकार ने कल रात उनमें से 1 यूनिट को सफलतापूर्वक फिर से चालू कर दिया है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर बाकी के 2 यूनिट भी सुचारू रूप से कार्य करने लगेंगे, जिससे 2,000 मेगावाट बिजली की कमी को पूरा करने में काफी मदद मिलेगी।

कोयले की कोई कमी नहीं

कोयले की कमी की चर्चाओं को पूरी तरह नकारते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि पंजाब के थर्मल पावर प्लांट में ईंधन का कोई अभाव नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के प्रयासों से पचवारा कोयला खदान फिर से शुरू हो चुकी है, जिससे राज्य के बिजली उत्पादन केंद्रों के लिए कोयले की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो गई है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि पंजाब एक कृषि प्रधान प्रदेश है, इसलिए राज्य के किसानों और आर्थिक विकास के लिए बिजली की निर्बाध सप्लाई अत्यंत आवश्यक है। केंद्र सरकार को बिना देरी किए पंजाब को उसका पूरा हिस्सा उपलब्ध कराना चाहिए ताकि बिजली संकट को स्थायी रूप से हल किया जा सके।

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