जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और उसके मददगारों के खिलाफ देश की प्रमुख जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। शनिवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कश्मीर घाटी में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए कुल 7 रिहायशी ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह सघन तलाशी अभियान प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ी सीमा-पार आतंकी साजिश के सिलसिले में चलाया गया, जिसका उद्देश्य घाटी में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है।
घाटी के तीन जिलों में एक साथ दबिश
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, एनआईए (NIA) की टीमों ने स्थानीय पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के सहयोग से शनिवार सुबह दक्षिण और उत्तर कश्मीर के कई संदिग्ध इलाकों में घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के तहत मुख्य रूप से तीन जिलों में कार्रवाई की गई:
- कुलगाम जिले में कुल 2 ठिकानों पर सघन छापेमारी की गई।
- बांदीपोरा जिले में कुल 3 अलग-अलग जगहों पर सुरक्षा बलों ने तलाशी ली।
- बारामूला जिले के अंतर्गत आने वाले सोपोर इलाके में भी 2 रिहायशी परिसरों को खंगाला गया।
एजेंसी की टीमों ने इस कार्रवाई के दौरान उन स्थानों को निशाना बनाया, जिनका संबंध लश्कर-ए-तैयबा के ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) और पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह तलाशी अभियान बेहद महत्वपूर्ण रहा और आने वाले दिनों में जांच के आगे बढ़ने पर और भी कई जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।
सड़क चेकिंग से खुला था आतंकी साजिश का राज
इस बड़े आतंकी मामले की शुरुआत साल 2026 के मार्च महीने में हुई थी। 31 मार्च, 2026 को श्रीनगर के जकूरा इलाके के पास सुरक्षा बलों की एक टीम देर रात नियमित नाका चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक मोटरसाइकिल सवार को संदेह होने पर रोका गया।
जब सुरक्षा बलों ने उस संदिग्ध मोटरसाइकिल सवार की तलाशी ली, तो उसके पास से एक हैंड ग्रेनेड और कई जिंदा कारतूस बरामद हुए। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ कि पकड़ा गया व्यक्ति प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के लिए एक 'ओवर ग्राउंड वर्कर' (OGW) के रूप में काम कर रहा था और वह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था।
इस संबंध में सबसे पहले जकूरा पुलिस स्टेशन में एक स्थानीय FIR (नंबर 24/2026) दर्ज की गई थी। हालांकि, मामले के सीमा-पार संपर्कों और इसकी गंभीरता को देखते हुए बाद में इसकी जांच का जिम्मा एनआईए (NIA) को सौंप दिया गया। केंद्रीय एजेंसी ने इस मामले को नए सिरे से केस नंबर RC-02/2026/NIA/JMU के तहत दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई।
सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज, सीमा-पार साजिश का पर्दाफाश
इस आतंकी नेटवर्क के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कानून की कई कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों पर इन अधिनियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है:
- गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 की धारा 23
- शस्त्र अधिनियम, 1959 की धारा 7 और 25
- विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 4
जांच एजेंसी की अब तक की तहकीकात से यह साफ हुआ है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी आका स्थानीय स्तर पर मौजूद मददगारों के जरिए एक बड़ी साजिश रच रहे थे। इस साजिश के तहत सीमा पार बैठे हैंडलर इन स्थानीय सहयोगियों (OGWs) को सीधे निर्देश दे रहे थे। इन मददगारों की भूमिका घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों को हर संभव सहायता पहुंचाना था, जिसमें निम्नलिखित शामिल थे:
- आतंकियों को सुरक्षित छिपने की जगह और पनाह देना।
- उनके लिए भोजन, परिवहन और अन्य रसद (लॉजिस्टिकल सपोर्ट) की व्यवस्था करना।
- सुरक्षा बलों के ठिकानों और उनकी आवाजाही की निगरानी (रेकी) करना।
- आतंकियों के आपसी संपर्क के लिए सुरक्षित संचार व्यवस्था बनाए रखने में मदद करना।
इस मामले में जांच एजेंसी ने पहले ही साजिश में शामिल कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, और स्थानीय स्तर पर उनके नेटवर्क से जुड़े कई अन्य संदिग्धों की भूमिका की पहचान की गई है। घाटी में आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे पहले भी इस तरह की आतंकी साजिशों के मामलों में एनआईए (NIA) ने जम्मू-कश्मीर में 10 अलग-अलग स्थानों पर व्यापक छापेमारी की कार्रवाई की थी।
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