ब्रिक्स मंच पर भारत का कड़ा रुख
दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट 2026 के दौरान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ सफल वार्ता के बाद, अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है। इस समिट के दौरान भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार को स्थानीय मुद्राओं में करने का एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया है।
डॉलर पर निर्भरता घटाने की रणनीति
भारत ने व्यापार को सुगम बनाने के लिए डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने और MSME सेक्टर को मजबूती देने पर जोर दिया है। अमेरिका द्वारा लगातार दी जा रही टैरिफ वॉर की धमकियों के बीच, भारत का यह रणनीतिक कदम अमेरिकी डॉलर पर दुनिया की निर्भरता को कम करने वाला साबित होगा। यह स्पष्ट करता है कि भारत की विदेश नीति किसी भी दबाव से मुक्त है और पूरी तरह से स्वतंत्र है।
सफल आयोजन और भारत की कूटनीति
एक तरफ ब्रिक्स का शानदार आयोजन और दूसरी तरफ यूरोपीय संघ के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर तेजी से जारी काम यह दर्शाता है कि भारत अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को सर्वोपरि रख रहा है। आज का भारत किसी भी बाहरी ताकत के प्रभाव में आए बिना, केवल अपने देश के हितों को ध्यान में रखकर बड़े और कड़े फैसले ले रहा है।
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