सीमा विवाद पर भारत का अडिग रुख
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चीन के साथ जारी सीमा तनाव के बीच भारत की नीति को लेकर एक बेहद कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारत पूरी दुनिया में शांति का समर्थक रहा है और वह चीन के साथ भी शांति बनाए रखने का पक्षधर है। हालांकि, देश की सुरक्षा और संप्रभुता के मामले में भारत का स्टैंड बिल्कुल स्पष्ट है। रिजिजू ने साफ किया कि भारत अपनी सरहद की एक इंच जमीन भी किसी के हवाले नहीं करेगा और न ही अपनी क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता किया जाएगा।
चीन की हरकतों को बताया रणनीतिक खेल
अरुणाचल प्रदेश से आने वाले केंद्रीय मंत्री ने चीन द्वारा बार-बार अपनाए जा रहे पैंतरों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश की विभिन्न जगहों के नाम बदलने के प्रयासों को रिजिजू ने केवल एक टैक्टिकल गेम यानी रणनीतिक खेल करार दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अरुणाचल प्रदेश का इतिहास या वहां की सभ्यता कभी भी चीनी इतिहास का हिस्सा नहीं रही है। उन्होंने इस बात को दृढ़ता के साथ रखा कि भारत अपने इस अभिन्न अंग की रक्षा करने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।
मोदी सरकार के प्रयासों और सुरक्षा की स्थिति
रिजिजू ने इस बात का भी जिक्र किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए निरंतर गंभीर प्रयास किए हैं। लेकिन, कूटनीति के साथ-साथ देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। रिजिजू ने सीएनएन-न्यूज18 के एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश के निवासियों ने पूर्व में भी चीन की चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया है और वे भविष्य में भी किसी भी प्रतिकूल स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। सरकार का यह रुख चीन के हर मंसूबे को विफल करने के लिए पर्याप्त है।
सीमा पर बढ़ रहा है भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर
सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास पर बात करते हुए रिजिजू ने स्वीकार किया कि चीन ने पिछले कुछ समय में बॉर्डर के पास इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी तेजी दिखाई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत भी इस मामले में पीछे नहीं है। भारत तेजी से सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। सरकार की ओर से ऐसे तमाम कदम उठाए जा रहे हैं जिससे भारतीय सेना को सीमा पर किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। भारत का लक्ष्य चीन की हर चाल को नाकाम करना है और इसके लिए विकास कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है।
दृढ़ता और जिम्मेदारी के साथ संदेश
किरेन रिजिजू ने कहा कि इस संवेदनशील विषय पर उनके निजी विचार और सरकार का आधिकारिक रुख एक समान हैं। उन्होंने अपनी बात को बहुत ही संतुलित लेकिन प्रभावशाली ढंग से रखा है। उन्होंने कहा कि भारत चीन के साथ तनाव को बेवजह नहीं बढ़ाना चाहता, लेकिन सुरक्षा के प्रति ढिलाई बरतना भारत की नीति में नहीं है। बॉर्डर पर भारत की तैयारी इस बात का प्रमाण है कि देश अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक सतर्क है। उन्होंने अंत में दोहराया कि शांति वार्ता का रास्ता खुला है, लेकिन देश की जमीन की कीमत पर शांति कतई स्वीकार्य नहीं होगी।
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