पोल्ट्री फार्मिंग: मुर्गियों की सेहत के लिए वरदान है 'बाहुबली पंखा', जानें कैसे बदल रहा है मुर्गी पालन का तरीका

आधुनिक मुर्गी पालन में तापमान और हवा के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए 'बाहुबली पंखा' बेहद प्रभावी साबित हो रहा है। यह तकनीक न केवल मुर्गियों की उत्पादकता बढ़ाती है, बल्कि बिजली की खपत को भी कम करने में मददगार है।

मुर्गी पालन में आधुनिक तकनीक का बढ़ता प्रभाव

आज के दौर में पोल्ट्री फार्मिंग का स्वरूप पूरी तरह से बदल चुका है। मुर्गियों के बेहतर स्वास्थ्य और उनकी बेहतर विकास दर के लिए अब किसान पारंपरिक तरीकों की जगह आधुनिक तकनीक को अपना रहे हैं। इसी क्रम में 'एन्वायरमेंट कंट्रोल सिस्टम' यानी पर्यावरण नियंत्रित व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पूरी व्यवस्था का एक मुख्य हिस्सा है विशेष प्रकार का बड़ा पंखा, जिसे किसान और विशेषज्ञ प्यार से 'बाहुबली पंखा' कहते हैं। यह उपकरण क्लोज्ड पोल्ट्री फार्म के भीतर के तापमान को संतुलित रखने और हानिकारक हवा को बाहर निकालने में मुख्य भूमिका निभाता है।

मौसम का मुर्गियों पर असर और समाधान

एसएस पोल्ट्री इक्विपमेंट्स से जुड़े साहिल रजा के अनुसार, भारत में मौसम का मिजाज मुर्गियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। गर्मियों में जब तापमान का पारा चढ़ता है, तो मुर्गियां गंभीर तनाव में आ जाती हैं, जिससे उनका उत्पादन प्रभावित होता है। वहीं, सर्दियों में अत्यधिक ठंड से बचाव के लिए उन्हें अलग तरह की सुरक्षा की जरूरत होती है। पहले के पारंपरिक फार्मों में इन स्थितियों पर नियंत्रण पाना मुश्किल होता था, लेकिन अब इस उन्नत तकनीक के जरिए मुर्गियों को उनकी उम्र और आवश्यकता के अनुरूप अनुकूल वातावरण मुहैया कराया जा रहा है।

क्या है यह बाहुबली पंखा और कैसे काम करता है?

इस पंखे को 'बाहुबली' नाम इसके विशाल आकार और अत्यधिक क्षमता के कारण मिला है। यह मूल रूप से एक अत्याधुनिक एक्जास्ट फैन है। आधुनिक क्लोज्ड फार्म में यह एक तय दिशा में हवा के प्रवाह को बनाए रखता है। फार्म की एक दीवार पर इन बड़े पंखों को लगाया जाता है, जबकि दूसरी ओर कूलिंग पैड लगाए जाते हैं। जब ये पंखे चलते हैं, तो अंदर की गर्म और दूषित हवा बाहर खींच ली जाती है और कूलिंग पैड के जरिए शुद्ध एवं ठंडी हवा अंदर प्रवेश करती है। इस चक्र से पूरे फार्म के भीतर एक समान और नियंत्रित वातावरण बना रहता है, जिससे मुर्गियां सुरक्षित रहती हैं।

बिजली की बचत और कम उपकरणों की जरूरत

इस पंखे की तकनीकी क्षमता के बारे में बात करते हुए साहिल रजा ने बताया कि इसमें डेढ़ एचपी की शक्तिशाली मोटर लगी होती है। इसकी कार्यक्षमता का अंदाजा इसके सीएफएम यानी हवा प्रवाह की दर से लगाया जा सकता है। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जहां सामान्य पंखों के साथ किसी फार्म को चलाने के लिए 10 पंखों की आवश्यकता पड़ सकती है, वहीं इस 'बाहुबली पंखे' की क्षमता के कारण केवल 7 पंखे ही पर्याप्त साबित होते हैं। पंखों की संख्या घटने का सीधा लाभ यह है कि बिजली की खपत कम होती है और जनरेटर पर पड़ने वाला भार भी काफी हद तक कम हो जाता है।

नीदरलैंड से जुड़ा है कनेक्शन

गुणवत्ता पर जोर देते हुए कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ये पंखे नीदरलैंड से आयात किए जाते हैं। साहिल रजा बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध उपकरणों की गुणवत्ता और स्थायित्व काफी बेहतर होता है। भारतीय किसानों को विश्वस्तरीय तकनीक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उनकी कंपनी एसएस पोल्ट्री इक्विपमेंट्स इन उपकरणों को सीधे नीदरलैंड की फर्मों से मंगवाती है, ताकि फार्मिंग के व्यवसाय में लंबी अवधि का मुनाफा सुनिश्चित किया जा सके।

10 हजार मुर्गियों वाले फार्म का खर्च

निवेश के संदर्भ में जानकारी देते हुए साहिल रजा ने बताया कि यदि कोई किसान 10,000 मुर्गियों की क्षमता वाला एक पूर्ण रूप से पर्यावरण नियंत्रित फार्म स्थापित करना चाहता है, तो उस पर लगभग 25 से 30 लाख रुपये का खर्च आ सकता है। यह बजट केवल पंखों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सिविल निर्माण कार्य से लेकर फार्म में इस्तेमाल होने वाले अन्य जरूरी तकनीकी उपकरणों का खर्च भी सम्मिलित है। हालांकि शुरुआती निवेश थोड़ा बड़ा लग सकता है, लेकिन मुर्गियों की मृत्यु दर में कमी और बेहतर उत्पादन इसे एक लाभदायक सौदा बनाता है।

सिस्टम का तालमेल ही है असली सफलता

ध्यान देने वाली बात यह है कि केवल एक पंखा लगाने से काम नहीं चलता। आधुनिक पोल्ट्री फार्मिंग एक समन्वित प्रणाली पर कार्य करती है। इसमें पंखों के अलावा कूलिंग पैड और सर्दियों के लिए गैस ब्रूडर का इस्तेमाल किया जाता है। गर्मी के मौसम में निकासी पंखे और कूलिंग पैड मिलकर तापमान को गिरने नहीं देते, वहीं ठंड में ब्रूडर के जरिए कृत्रिम गर्मी पैदा की जाती है। इसका मूल उद्देश्य यही है कि बाहरी वातावरण चाहे कैसा भी हो, फार्म के भीतर मुर्गियों के लिए आदर्श स्थिति बनी रहे। जो किसान इस तकनीक के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, वे बिहार के आरा स्थित एसएस पोल्ट्री इक्विपमेंट्स से उनके संपर्क नंबर 8789765545 पर बात कर सकते हैं।

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