विधानसभा में बढ़ी विधायक की मुश्किलें
गुजरात विधानसभा में वंदे मातरम के अपमान से जुड़े एक मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण में कांग्रेस के विधायक इमरान खेड़ावाला की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। विधानसभा के अध्यक्ष शंकर चौधरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया है और सख्त जांच के निर्देश जारी किए हैं। अध्यक्ष के अनुसार, सदन के सभी सदस्यों को राष्ट्रगीत के दौरान सम्मान में खड़े रहने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन इमरान खेड़ावाला का आचरण नियमों के विपरीत रहा और वे बीच में ही अपनी सीट पर बैठ गए। शंकर चौधरी ने बताया कि उन्होंने मामले की पूरी जांच के लिए घटना के CCTV फुटेज की भी बारीकी से समीक्षा की है, जिसमें यह पुष्टि हुई है कि विधायक वंदे मातरम के दौरान बैठे थे। इस आधार पर उनके विरुद्ध जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है।
उपमुख्यमंत्री ने उठाई थी आपत्ति
सदन में इस मुद्दे को राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने पुरजोर तरीके से उठाया था। उन्होंने 'पॉइंट ऑफ ऑर्डर' के जरिए खेड़ावाला पर न केवल सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने, बल्कि वंदे मातरम का अनादर करने का भी गंभीर आरोप लगाया। विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि से यह उम्मीद की जाती है कि वह सदन के नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करेगा और इसकी गरिमा को बनाए रखेगा। अध्यक्ष ने इमरान खेड़ावाला द्वारा मीडिया में दिए गए बयानों का संज्ञान लेते हुए कहा कि विधायक को अपनी बात सदन के पटल पर रखनी चाहिए थी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि इस तरह की अनुशासनहीनता की पुनरावृत्ति होती है, तो उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
इमरान खेड़ावाला ने रखा अपना पक्ष
अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने 9 सितंबर को स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र की शुरुआत राष्ट्रगीत के साथ हुई थी। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल, महात्मा गांधी, मौलाना आज़ाद, बाबासाहेब अंबेडकर और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों का स्मरण करते हुए कहा कि वे इन हस्तियों की विरासत का पूरा सम्मान करते हैं और राष्ट्रगीत के लिए खड़े हुए थे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पूरा गीत खड़े होकर गाया है। हालांकि, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी द्वारा राष्ट्रगीत में नए पद जोड़ने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें इस बदलाव को लेकर असहमति थी। खेड़ावाला के मुताबिक, वे सदन से बाहर नहीं गए थे, बल्कि अपनी सीट पर बैठ गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का यह तरीका उन नेताओं का अपमान है जिन्होंने देश को आजादी दिलाई।
संसदीय नियमों और मर्यादा की दुहाई
स्पीकर शंकर चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी एक व्यक्ति के व्यवहार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य विधानसभा की पवित्रता से जुड़ा है। उन्होंने विधायकों द्वारा ली गई संवैधानिक शपथ और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति उनके उत्तरदायित्वों को याद दिलाया। स्पीकर ने बताया कि जब उपमुख्यमंत्री ने 'पॉइंट ऑफ ऑर्डर' उठाया, तब खेड़ावाला सदन में उपस्थित नहीं थे, जिससे उन्होंने अपनी सफाई देने का अवसर खो दिया। विधानसभा के नियमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने नियम 249 के तहत विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना के बिंदुओं को स्पष्ट किया। साथ ही, सदस्यों के आचरण को नियंत्रित करने वाले नियम 51 और नियम 52 का हवाला देते हुए व्यवस्था और मर्यादा बनाए रखने के पीठासीन अधिकारी के अधिकारों पर जोर दिया। गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी वंदे मातरम के सभी पद गाए जाने के बजाए शुरुआती दो पदों को ही गाए जाने की पक्षधर है और इस मुद्दे पर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं।
https://www.indiatv.in/gujarat/speaker-ordered-privileges-committee-proceedings-against-congress-mla-imran-khedawala-in-vande-mataram-row-2026-09-11-1242684